हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में कोरोना काल के 79 में से 56 ऑक्सीजन प्लांट पड़े बंद, मात्र 23 चालू

चंडीगढ़, 28 अगस्त। हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश भर के अस्पतालों में कोरोना महामारी के दौरान पीएम केयर्स और सीएसआर फंड से सरकारी अस्पतालों में लगाए गए थे। इन अस्पतालों में कुल 79 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इनमें से 56 पूरी तरह बंद पड़े हैं। सिर्फ 23 प्लांट ही चालू हालत में हैं। सरकार ने माना कि अधिकांश प्लांट खराब हो चुके हैं।
ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के कारण
सरकार ने माना कि अधिकांश प्लांट मैकेनिकल और टेक्निकल खराबियों की वजह से बंद हुए हैं। इसके अलावा स्पेयर पार्ट्स की कमी भी एक बड़ा कारण है। सर्विसिंग की लागत में एकरूपता न होना और वेंडर द्वारा जरूरत से ज्यादा मरम्मत खर्च बताना भी वजह है। इन कारणों से प्लांट गैर-कार्यात्मक हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें दोबारा चालू करने के लिए केंद्रीयकृत टेंडर जारी करने की जानकारी दी है। यह जानकारी सदन में दी गई है।
कोरोना काल में थी इनकी अहम भूमिका
कोविड की दूसरी लहर के दौरान इन्हीं प्लांटों को अस्पतालों में बेडसाइड ऑक्सीजन सप्लाई की रीढ़ माना गया था। लेकिन महामारी गुजरने के कुछ साल बाद ही यह व्यवस्था निष्क्रिय हो चुकी है। प्रदेश के अधिकांश अस्पतालों में यह व्यवस्था अब बंद हो चुकी है। यह जवाब मुलाना विधायक पूजा चौधरी के सवाल पर सरकार ने दिया है।
विभिन्न जिलों के आंकड़े
विधानसभा में रखे गए आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट मेवात जिले में लगाए गए थे। यहां आठ प्लांट स्थापित हुए थे। लेकिन उनमें से सात बंद हैं और सिर्फ एक चालू है। गुरुग्राम की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। यहां सात में से छह प्लांट बंद हैं और केवल एक काम कर रहा है। रेवाड़ी में लगाए गए चारों प्लांट बंद पड़े हैं। जींद, भिवानी, कैथल, पलवल, पानीपत, सिरसा, चरखी दादरी और हांसी जैसे जिलों में भी हालात खराब हैं। इन जिलों में एक भी ऑक्सीजन प्लांट फिलहाल चालू नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान और केंद्रीयकृत टेंडर
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की ओर से सदन में जवाब दिया गया। उनके जवाब में कहा गया कि प्लांट बंद होने के पीछे कई तकनीकी और प्रशासनिक कारण हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण मैकेनिकल और टेक्निकल खराबियां हैं। इसके अलावा स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न होना भी शामिल है। अलग-अलग कंपनियों द्वारा सर्विसिंग की अलग-अलग लागत तय करना भी समस्या है। वेंडरों द्वारा मरम्मत के लिए अनुमान से कहीं अधिक खर्च बताना भी वजह बताया गया है। सरकार ने कहा कि इन प्लांटों के संचालन के लिए केंद्रीयकृत टेंडर जारी कर दिया गया है। इस टेंडर को जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद बंद प्लांटों को चरणबद्ध तरीके से चालू किया जाएगा।
जिलेवार ऑक्सीजन प्लांट की पूरी स्थिति
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार मेवात में आठ में से सात ऑक्सीजन प्लांट बंद हैं। केवल एक प्लांट चालू स्थिति में है। गुरुग्राम में सात में से छह प्लांट बंद हैं। गुरुग्राम में केवल एक प्लांट चल रहा है। अंबाला, फरीदाबाद और करनाल में छह-छह प्लांट स्थापित किए गए थे। इनमें से तीन-तीन प्लांट बंद हैं। रेवाड़ी में सभी चार प्लांट बंद पड़े हैं। रोहतक में चार में से तीन प्लांट ठप पड़े हैं। झज्जर में तीन में से दो प्लांट बंद हैं। जींद में तीनों प्लांट बंद हैं। कुरुक्षेत्र में तीन में से दो प्लांट बंद हैं। पंचकूला में तीन में से दो प्लांट बंद हैं। नारनौल में तीन में से एक प्लांट बंद है। सोनीपत में तीन में से एक प्लांट बंद है। यमुनानगर में भी तीन में से एक प्लांट बंद है। भिवानी में दोनों प्लांट बंद हैं। कैथल में दोनों प्लांट बंद हैं। पलवल में दोनों प्लांट बंद हैं। पानीपत में दोनों प्लांट बंद हैं। सिरसा में दोनों प्लांट बंद हैं। हिसार में दो में से एक प्लांट बंद है। चरखी दादरी में स्थापित एक प्लांट भी बंद पड़ा है। हांसी में स्थापित एक प्लांट भी बंद पड़ा है। कुल मिलाकर प्रदेश में 79 ऑक्सीजन प्लांटों में से 23 चालू हैं। प्रदेश में 56 ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह बंद पड़े हैं।