हरियाणा में डेंटल कालेजों के लिए दाखिला प्रक्रिया तय, सरकारी डाक्टरों के लिए 40 प्रतिशत सीटें आरक्षित

हरियाणा में मास्टर आफ डेंटल सर्जरी यानी एमडीएस के नए शैक्षणिक सत्र के लिए सरकारी व निजी डेंटल कालेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिलों की प्रक्रिया पूरी तरह से तय कर दी गई है। चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार सरकारी संस्थानों में आधी यानी 50 प्रतिशत सीटें नीट एमडीएस-2026 की आल इंडिया मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी। वहीं, शेष सभी सीटें हरियाणा स्टेट मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी। हरियाणा में डेंटल कालेजों के लिए दाखिला प्रक्रिया तय कर दी गई है।
आरक्षण और बीडीएस छात्रों के लिए नियम
राज्य कोटे की कुल 40 प्रतिशत सीटें इन-सर्विस डाक्टरों और ईएसआइसी अस्पतालों, डिस्पेंसरी, अन्य संगठनों तथा स्वायत्त निकायों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए पूरी तरह से आरक्षित रखी जाएंगी। इसके अलावा, हरियाणा में स्थित विभिन्न संस्थानों से बीडीएस की डिग्री उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों के लिए 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। हरियाणा से बीडीएस करने वालों के लिए 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। राज्य कोटे के तहत यह पूरी व्यवस्था सभी सरकारी डेंटल संस्थानों, निजी डेंटल संस्थानों और निजी विश्वविद्यालयों में समान रूप से लागू की जाएगी। इसके साथ ही दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए पांच प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी।
कालेजों में सीटों का वर्गीकरण और काउंसलिंग
निजी डेंटल संस्थानों में कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें ओपन मेरिट या स्टेट कोटा के तहत होंगी। वहीं, शेष 50 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट कैटेगरी के अंतर्गत भरी जाएंगी। मैनेजमेंट कैटेगरी की मेरिट लिस्ट आल इंडिया मेरिट के आधार पर ही तैयार की जाएगी। सभी संस्थानों में दाखिले के लिए संयुक्त केंद्रीयकृत आनलाइन काउंसलिंग कराई जाएगी। यह पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक द्वारा ही संपन्न कराई जाएगी।
पाठ्यक्रम बीच में छोड़ने पर कड़े नियम और बांड राशि
यदि कोई भी अभ्यर्थी एमडीएस पाठ्यक्रम को बीच में ही छोड़ देता है, तो उसे नियम के अनुसार 10 लाख रुपये की भारी बांड राशि चुकानी होगी। पाठ्यक्रम बीच में छोड़ा तो 10 लाख रुपये की बांड राशि देनी होगी। पाठ्यक्रम छोड़ने वाले छात्र हरियाणा राज्य में किसी भी पीजी पाठ्यक्रम में अगले तीन वर्ष तक आवेदन करने के लिए पात्र नहीं होंगे। जिस भी शैक्षणिक सत्र में पाठ्यक्रम छोड़ा जाएगा, उस सत्र की फीस के साथ-साथ अगले शैक्षणिक सत्र की फीस का 50 प्रतिशत हिस्सा भी जमा करना होगा। यह सभी सख्त प्रावधान मैनेजमेंट कैटेगरी के छात्रों पर भी पूरी तरह से लागू होंगे।
पंजीकरण शुल्क, फीस और स्टाइपेंड के नियम
काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 2500 रुपये का पंजीकरण शुल्क देना होगा। वहीं, हरियाणा के आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को इसके लिए 1250 रुपये पंजीकरण शुल्क के रूप में देने होंगे। सभी निजी डेंटल संस्थानों को भी अपनी प्रत्येक स्वीकृत सीट के लिए विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित प्रोसेसिंग फीस अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। एमडीएस की पूरी फीस केवल सालाना आधार पर ही देय होगी। संस्थान अभ्यर्थियों से पूरे पाठ्यक्रम की फीस एक साथ एडवांस में नहीं ले सकेंगे। निजी कालेजों में प्रवेश के समय केवल 50 प्रतिशत फीस जमा करने का नियम है। शेष राशि अंतिम प्रवेश तिथि से पहले जमा करनी होगी। पीजी विद्यार्थियों को राज्य के सरकारी कालेजों के पीजी विद्यार्थियों के समान ही स्टाइपेंड प्राप्त होगा।