हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ, डिस्कॉम्स द्वारा 1134 करोड़ रुपये से अधिक वसूलने के प्रस्ताव का विरोध

हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ, डिस्कॉम्स द्वारा 1134 करोड़ रुपये से अधिक वसूलने के प्रस्ताव का विरोध

हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) ने उपभोक्ताओं से 1,134 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूलने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले को लेकर बिजली उपभोक्ताओं के एक समूह ने कड़ा विरोध जताया है और हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

नियामक आयोग के समक्ष अंतिम सुनवाई पूरी

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हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को इन याचिकाओं पर अपनी अंतिम सुनवाई पूरी कर ली है। सुनवाई के दौरान डिस्कॉम्स द्वारा मल्टी-इयर टैरिफ (MYT) रेगुलेशंस, 2024 के प्रावधानों में ढील देने की मांग की जा रही है, जिसका उपभोक्ता समूह विरोध कर रहा है। डिस्कॉम्स वर्ष 2025-26 के लिए फ्यूल एंड पावर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) के रूप में प्रति यूनिट 47 पैसे वसूलना चाहती हैं।

उपभोक्ता समूह द्वारा वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप

उपभोक्ता समूह ने डिस्कॉम्स पर उनके वित्तीय कुप्रबंधन का बोझ जनता पर डालने का गंभीर आरोप लगाया है। समूह ने बताया कि डिस्कॉम्स पर 27,915 करोड़ रुपये का संचित घाटा, 27,248 करोड़ रुपये का कर्ज और लगभग 10,000 करोड़ रुपये की प्राप्य राशि बकाया है। इसके अलावा समूह ने अक्टूबर 2025 में सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड को बिना आपूर्ति के लगभग 1,300 करोड़ रुपये के कथित भुगतान पर भी सवाल उठाए, जो बिना मुख्यमंत्री की अनिवार्य मंजूरी के किया गया था।

पुरानी देनदारियों और कानूनी प्रावधानों पर सवाल

चुनौती देते हुए समूह ने तर्क दिया कि नवंबर 2025 के लिए मांगी गई कुल राशि का 84 प्रतिशत यानी 950.09 करोड़ रुपये न्यायिक रूप से निर्धारित पिछली अवधि की देनदारियों से संबंधित है, जिनमें से कुछ 2022-23 की हैं। समूह ने डिस्कॉम्स के चयनात्मक दृष्टिकोण को उजागर किया और कहा कि जब FPPAS की गणना नकारात्मक होती थी और उपभोक्ताओं को पैसे मिलने होते थे, तब ऐसी कोई तत्परता नहीं दिखाई जाती थी। विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि भारत के बिजली अधिनियम, 2003 के तहत उपयोगिताएं आमतौर पर दो साल के बाद उपभोक्ताओं से बकाया वसूल नहीं कर सकती हैं, जब तक कि उन्हें लगातार बकाया के रूप में न दिखाया गया हो। लागत स्थानांतरित करने की ऐसी ही चिंताएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाई गई हैं, जैसे कि ओहायो में ऑफिस ऑफ द ओहायो कंज्यूमर्स काउंसल (OCC) ने बड़े बिजली उपभोक्ताओं से आवासीय उपयोगकर्ताओं पर बुनियादी ढांचे की लागत डालने से रोकने के लिए लागत-कारक भुगतान दृष्टिकोण की वकालत की है ओहायो समर न्यूजलेटर और ओहायो स्प्रिंग न्यूजलेटर

ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 की घोषणा

हाल ही में जारी ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 में डिस्कॉम्स के सामने आने वाले निरंतर वित्तीय तनाव को स्वीकार किया गया है और इन संरचनात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए उपायों का प्रस्ताव दिया गया है।

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