हरियाणा में नशे की रोकथाम और पुनर्वास के लिए चार-स्तरीय कमेटियों और टास्क फोर्स का गठन

हरियाणा सरकार ने राज्य में नशे की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सामुदायिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से चार-स्तरीय कमेटियों का गठन किया है। यह कमेटियां राज्य, जिला, उपमंडल तथा ग्राम पंचायत व शहरी वार्ड के स्तर पर गठित की गई हैं। राज्य से लेकर गांवों के स्तर पर गठित यह कमेटियां नशे की रोकथाम का काम करेंगी। इसके साथ ही यह कमेटियां उपचार और पुनर्वास की निगरानी का जिम्मा भी संभालेंगी।
राज्य स्तर पर गठित संचालन एवं समिति
चंडीगढ़ में 14 अगस्त को मिली जानकारी के अनुसार राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय संचालन एवं समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी होंगे। इस समिति में गृह, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, विकास एवं पंचायत, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव शामिल होंगे। इसके अलावा पुलिस महानिदेशक, हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, खेल विभाग के प्रधान सचिव तथा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव इस समिति के सदस्य होंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक इस समिति के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभाएंगे। सिविल सोसायटी, सूचीबद्ध गैर-सरकारी संगठनों या संबंधित विशेषज्ञों में से दो प्रतिनिधियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में इसमें शामिल किया जाएगा।
राज्य समिति के कार्य और समीक्षा
यह समिति नशे की मांग में कमी लाने की राष्ट्रीय कार्य योजना और नशा मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य की कार्य योजना की निगरानी करेगी। यह समिति जागरूकता, उपचार, परामर्श, पुनर्वास और प्रशिक्षण से संबंधित वार्षिक एवं त्रैमासिक लक्ष्यों की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही यह समिति संबंधित विभागों और सामाजिक संगठनों के बीच आपसी समन्वय सुनिश्चित करने का काम करेगी। यह समिति नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की उपलब्धता और उनकी कार्यप्रणाली की भी पूरी समीक्षा करेगी। इसके अलावा नशे की दृष्टि से संवेदनशील जिलों की पहचान करके उनके लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जाएगी। यह समिति जिला स्तर पर किए जा रहे कार्यों का मूल्यांकन करेगी और आवश्यक सुधार के निर्देश देगी। इस समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में नियमित रूप से आयोजित की जाएगी।
जिला और उपमंडल स्तर पर कमेटियों का गठन
जिला स्तर पर उपायुक्तों की अध्यक्षता में विशेष समितियों का गठन किया जाएगा। ये समितियां जिला स्तर की नशा रोकथाम कार्य योजना तैयार करेंगी और संवेदनशील क्षेत्रों तथा जोखिम वाले समूहों की पहचान करेंगी। ये समितियां स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों में चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की निगरानी करेंगी। जिला समितियां नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगी और नशा रोकथाम से जुड़े स्कूलों और केंद्रों का प्रत्येक तीन माह में निरीक्षण सुनिश्चित करेंगी। इसके अलावा उपमंडल स्तर पर उपमंडल अधिकारी नागरिक की अध्यक्षता में समितियां कार्य करेंगी। ये उपमंडल समितियां संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करेंगी और नशा रोकथाम गतिविधियों की प्रगति की निगरानी करेंगी। साथ ही यह समितियां नशा मुक्ति एवं उपचार केंद्रों का मासिक निरीक्षण भी सुनिश्चित करेंगी।
ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर टास्क फोर्स
स्थानीय स्तर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम स्तरीय नशा मुक्ति टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इन टास्क फोर्स में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। इनके साथ ही युवा, वरिष्ठ नागरिक और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इन सभी टास्क फोर्स का मुख्य कार्य नशे के संभावित सेवन या तस्करी वाले स्थानों की पहचान करना होगा। यह टास्क फोर्स इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का काम करेगी।
उपचार और सामुदायिक जागरूकता के उपाय
नशे की लत के लक्षण वाले व्यक्तियों को 72 घंटे के भीतर सरकारी स्तर पर अनुमोदित उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे व्यक्तियों को परामर्श एवं पुनर्वास सेवाओं से जोडऩे की पूरी व्यवस्था की जाएगी। ग्राम एवं वार्ड स्तर की टास्क फोर्स ग्राम सभाओं और वार्ड सभाओं के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेंगी। इन सभी कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य नशे की समस्या से जुड़े सामाजिक कलंक को पूरी तरह मिटाना है। इसका उद्देश्य आम लोगों को उपचार के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि समुदाय में एक स्वस्थ और नशामुक्त माहौल तैयार किया जा सके।