हरियाणा की 3 बेटियों का कमाल: सरकारी स्कूल की छात्राओं को प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में मिली 100% स्कॉलरशिप

Atal Hind Team Online13 August 20266 min read34 viewsगुरुग्राम
हरियाणा की 3 बेटियों का कमाल: सरकारी स्कूल की छात्राओं को प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में मिली 100% स्कॉलरशिप

हरियाणा: KBC से YTS+ तक का सफर, सरकारी स्कूल की तीन छात्राओं को प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में 100% स्कॉलरशिप

हरियाणा के सरकारी स्कूलों की तीन छात्राओं को प्लाक्षा यूनिवर्सिटी के यंग टेक्नोलॉजी स्कॉलर्स प्रोग्राम के लिए 100% स्कॉलरशिप

हरियाणा के सरकारी स्कूलों की तीन छात्राओं को टेक्नोलॉजी सीखने का बड़ा मौका, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में मिली 100% स्कॉलरशिप

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गुरुग्राम /13 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स /फतह सिंह उजाला

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली तीन छात्राओं- लक्ष्मी शर्मा, नरगिस और सृष्टि को प्लाक्षा यूनिवर्सिटी के यंग टेक्नोलॉजी स्कॉलर्स (वाईटीएस+) प्रोग्राम के लिए 100% स्कॉलरशिप मिली है। यह कक्षा 9 से 12वीं तक के हाई स्कूल छात्रों के लिए दो हफ्ते का रेसिडेंशियल समर प्रोग्राम है। यह प्रोग्राम उन छात्रों के लिए तैयार किया गया है, जिनकी टेक्नोलॉजी और उसके असल जिंदगी में इस्तेमाल को लेकर रुचि है। इसमें छात्रों को रोबोटिक्स, डेटा साइंस और बायोलॉजी + टेक्नोलॉजी जैसे नए क्षेत्रों को प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स, फैकल्टी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मेंटरशिप और कैंपस में साथ मिलकर सीखने के जरिए समझने का मौका मिलता है।

वाईटीएस+ प्रोग्राम में छात्र कैंपस में रहकर प्रैक्टिकल तरीके से सीखते हैं। वे असल प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं, अपने आइडिया आजमाते हैं और एक्सपर्ट मेंटर्स की मदद से अलग-अलग समस्याओं का समाधान खोजते हैं। इस प्रोग्राम का उद्देश्य छात्रों को यह समझने में मदद करना है कि टेक्नोलॉजी अलग-अलग क्षेत्रों से किस तरह जुड़ती है। साथ ही, प्रोजेक्ट के जरिए सीखने पर जोर देते हुए छात्रों में ऐसी प्रैक्टिकल स्किल्स विकसित की जाती हैं, जो उन्हें सिर्फ पारंपरिक क्लासरूम पढ़ाई से नहीं मिल पातीं।

हरियाणा सरकार की उद्यमिता पहल कुशल बिजनेस चैलेंज (केबीसी) में भाग लेने के बाद इन छात्राओं का चयन हुआ। उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ मिलकर चलाए गए इस प्रोग्राम का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के छात्रों को किसी समस्या को सही तरीके से समझने और उसका समाधान खोजने, नई सोच विकसित करने और शुरुआत से ही उद्यमिता की समझ देने का था। केबीसी के जरिए ऐसे छात्रों की पहचान भी की गई, जिनमें सीखने की मजबूत इच्छा और जिज्ञासा दिखाई दी। यह हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड में वाईटीएस+ के लिए छात्रों के चयन की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा रहा। केबीसी से वाईटीएस+ तक इन छात्राओं का सफर दर्शाता है कि स्कूल में विकसित हुई उद्यमिता की सोच को आगे की पढ़ाई, मेंटरशिप और क्लासरूम से बाहर नई टेक्नोलॉजी सीखने के मौकों से जोड़ा जा सकता है।

लक्ष्मी शर्मा की टेक्नोलॉजी में रुचि कक्षा 9 में शुरू हुई, जब उसने वैकल्पिक विषय के तौर पर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी चुना। बाद में कक्षा 12वीं तक उसने पाइथन और एडवांस प्रोग्रामिंग सीखी। स्कूल की एक प्रदर्शनी में उसकी टीम ने कोडिंग की मदद से एलपीजी गैस लीक होने का पता लगाने वाला डिटेक्टर बनाया। इस प्रोजेक्ट ने उसे प्रोग्रामिंग को असल जिंदगी की समस्याओं से जोड़ने में मदद की और सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने की उसकी इच्छा और मजबूत हुई। नरगिस की रोबोटिक्स में रुचि स्कूल में हुए सेशंस के दौरान बढ़ी, जहाँ उसने डांसिंग रोबोट जैसे प्रोजेक्ट बनाए। वह अपनी सीखने की यात्रा को जिज्ञासा, प्रयोग करने और प्रैक्टिकल तरीके से समस्याओं का समाधान खोजने से जोड़ती है। सृष्टि की बायोलॉजी में रुचि कोविड-19 महामारी के दौरान बढ़ी, जब उसने बड़े स्तर पर वैक्सीन तैयार होने की प्रक्रिया देखी। इसके बाद उसने किताबों से आगे बढ़कर बायोलॉजी और डेटा साइंस के बीच के संबंध को समझना शुरू किया और अब उसका ध्यान असल जिंदगी में बायोटेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को समझने पर है।

सृष्टि ने अपने चयन के बारे में कहा, “मुझे हमेशा से यह जानने में रुचि रही है कि साइंस और टेक्नोलॉजी की मदद से असल जिंदगी की समस्याओं को कैसे हल किया जा सकता है। वाईटीएस+ मेरे लिए किताबों से आगे बढ़कर सीखने, प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स पर काम करने और यह समझने का मौका है कि बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र किस तरह उपयोगी बदलाव ला सकते हैं।”

नरगिस ने कहा, “वाईटीएस+ में मुझे सबसे ज्यादा यह बात उत्साहित करती है कि मुझे कुछ बनाने, प्रयोग करने और अपनी जैसी रुचि रखने वाले दूसरे छात्रों के साथ सीखने का मौका मिलेगा। मैं रोबोटिक्स को और गहराई से समझने और यह जानने के लिए उत्साहित हूँ कि टेक्नोलॉजी की मदद से रोजमर्रा की समस्याओं को कैसे हल किया जा सकता है।”

लक्ष्मी शर्मा ने कहा, “प्रोग्रामिंग सीखने से मुझे समझ आया कि टेक्नोलॉजी की मदद से ऐसे समाधान बनाए जा सकते हैं, जो लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकें। वाईटीएस+ के जरिए मैं अपनी स्किल्स को बेहतर करना, मेंटर्स से सीखना और प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करना चाहती हूँ, जो मुझे सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के अपने लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा।”

प्लाक्षा यूनिवर्सिटी के प्रो वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल ने छात्रों के अनुभव पर कहा, “उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के छह प्रतिभाशाली छात्रों की प्लाक्षा के यंग टेक स्कॉलर्स (वाईटीएस+) प्रोग्राम में मेजबानी करना हमारे लिए खुशी की बात रही। उन्होंने हर ट्रैक में अपनी ऊर्जा, जिज्ञासा और उत्साह दिखाया। छात्रों ने रोबोटिक नारियल पेड़ पर चढ़ने वाली मशीन और स्मार्ट वेस्ट सेग्रीगेशन सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इसके साथ ही उन्होंने शैवाल से बनने वाले इमारत के बाहरी हिस्से पर काम किया और मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों पर रिसर्च की। सीखने की उनकी इच्छा ने पूरे ग्रुप के अनुभव को और बेहतर बनाया। हमने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते, नए सवाल पूछते और इंजीनियरिंग व साइंस में अपने भविष्य को लेकर ज्यादा स्पष्ट होते देखा। हमें उनकी उपलब्धियों पर गर्व है और आने वाले वर्षों में उद्यम के ऐसे कई और छात्रों का स्वागत करने की उम्मीद है।”

उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ मेकिन माहेश्वरी ने कहा, “असल जिंदगी से जुड़े सीखने के मौके छात्रों को समस्याओं को समझने, अपनी क्षमता बढ़ाने और टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करने का आत्मविश्वास देते हैं। इससे सीखना सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छात्र कुछ बनाने, उसे आजमाने और समस्याओं का समाधान करने के बारे में सोचना शुरू करते हैं। ऐसे प्रोग्राम इसलिए भी जरूरी हैं, क्योंकि इनके जरिए छात्रों के सामने आगे बढ़ने के ज्यादा रास्ते खुलते हैं और उन्हें अपनी रुचि और क्षमता समझने का मौका मिलता है। हरियाणा जैसे राज्यों में, जहाँ एडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़े सीखने के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, वहाँ छात्रों का पूरी स्कॉलरशिप पर डीप-टेक और प्रोजेक्ट आधारित प्रोग्राम तक पहुँचना यह प्रदर्शित करता है कि सही अवसर मिलने से उनके सामने भविष्य के और भी कई रास्ते खुल सकते हैं।”

इन तीनों छात्राओं का चयन छात्रों को प्रैक्टिकल तरीके से सीखने, मेंटरशिप लेने और असल जिंदगी की समस्याओं का समाधान करने का शुरुआती अनुभव देने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। इसका उद्देश्यछात्रों को रेसिडेंशियल यूनिवर्सिटी में टेक्नोलॉजी की अलग-अलग शाखाओं से जुड़ी नई और भविष्य के लिए उपयोगी पढ़ाई के ज्यादा मौके देना है।

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