बैंकों में जमा सरकारी फंड की अब हर तीन महीने में होगी सख्त जांच, हरियाणा सरकार ने उठाए बड़े कदम

बैंक घोटाले की सीबीआई जांच के बीच हरियाणा सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। बचत, चालू, टर्म डिपाजिट और फ्लेक्सी खातों की अब हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी। चंडीगढ़ में 14 अगस्त को मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा में हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल बैंक में हुए 661 करोड़ के घोटाले की सीबीआई जांच चल रही है। इसी बीच वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। सभी सरकारी कंपनियों, बोर्ड-निगमों, सहकारी संस्थाओं और स्वायत्त निकायों को बैंकों में जमा सरकारी फंड की हर तीन महीने में जांच करानी होगी।
वित्त विभाग के निर्देश और तिमाही प्रमाणपत्र
वित्त विभाग ने सभी प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को बैंकों में जमा फंड के सत्यापन और मिलान की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए तिमाही प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित संस्था के एमडी या सीईओ को इस प्रोफार्मा को भरकर और हस्ताक्षरों के साथ बैंक खातों में जमा धनराशि के सत्यापन एवं खातों के रिकार्ड से मिलान की पुष्टि करनी होगी। यह प्रोफार्मा उन्हें हर तिमाही वित्त विभाग द्वारा नामित संस्था के निदेशक को भेजना होगा।
खातों की सटीकता और नियमों की घोषणा
एमडी और सीईओ को प्रमाणपत्र में संस्था के विभिन्न बैंक खातों में जमा धनराशि को संबंधित तिमाही के खातों की कापी से सत्यापित और मिलान किए जाने की पुष्टि करनी होगी। प्रमाणपत्र में यह भी घोषित करना होगा कि प्रमाणन की तारीख तक खातों में कोई विसंगति नहीं है। इसके अलावा संस्थाओं को यह प्रमाणित करना होगा कि बैंक खाते वित्त विभाग की ओर से जारी निर्देशों और दिशा-निर्देशों के अनुसार खोले और संचालित किए जा रहे हैं।
ब्याज सत्यापन और ऑडिट की स्थिति
बैंक द्वारा निवेश के समय खाते या एफडीआर पर दिए गए ब्याज को संबंधित खाते में सही तरीके से जमा किए जाने और उसके सत्यापन की भी पुष्टि करनी होगी। बैंक रिकंसिलिएशन स्टेटमेंट तैयार किए जाने तथा उसमें दर्शाए गए बैलेंस का संस्था की लेखा पुस्तकों-बैलेंस शीट और संबंधित बैंकों के बैलेंस से मिलान किया जाएगा। संस्था को अपने अंतिम स्टैच्यूटरी आडिट, एजी आडिट और इंटरनल आडिट की स्थिति का भी उल्लेख करना होगा।