हरियाणा सरकार पुरानी पेंशन पर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में, एजी की राय के बाद वित्त विभाग का आदेश जारी

हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से 95 कर्मचारियों को मिली पुरानी पेंशन और पेंशन लाभ की राहत के मामले में अपील का रास्ता चुना है। एडवोकेट जनरल की राय मिलने के बाद वित्त विभाग ने संबंधित प्रशासनिक विभागों को हाईकोर्ट के 9 जुलाई के फैसले के खिलाफ लेटर्स पेटेंट अपील यानी एलपीए दाखिल करने के सख्त निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित विभागों को यह पूरी कार्रवाई केवल 10 दिन के अंदर पूरा करने के लिए कहा गया है। हाईकोर्ट ने ओमप्रकाश बनाम हरियाणा सरकार मामले के साथ जुड़े हुए 94 अन्य मामलों का निपटारा करते हुए कर्मचारियों को दो अलग-अलग श्रेणियों में यह राहत दी थी। सरकार अब इसी आए हुए हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की पूरी तैयारी में जुटी हुई है।
पहली श्रेणी के कर्मचारियों से जुड़े नियम और हाईकोर्ट का आदेश
इस मामले में पहली श्रेणी में वे सभी कर्मचारी आते हैं जिन्हें पहली जनवरी 2006 से पहले पार्ट टाइम, अस्थायी या फिर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया था। इन कर्मचारियों को बाद में सेवा में नियमित कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह कहा था कि नियमितीकरण से पहले की ऐसी सेवा को पेंशन के लिए क्वालिफाइंग सर्विस माना जाना चाहिए। अदालत ने इसी मुख्य आधार पर कर्मचारियों की पेंशन और सेवानिवृत्ति के लाभ की गणना करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही अदालत ने पात्र बकाया राशि को भी तुरंत जारी करने के निर्देश दिए थे। हरियाणा सरकार की जो प्रस्तावित अपील है वह इसी दी गई राहत को भी मुख्य रूप से चुनौती देगी। वित्त विभाग ने संबंधित एक्सपेंडिचर कंट्रोलिंग ब्रांचों के माध्यम से ही इस पूरी कार्रवाई को जल्द से जल्द कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग की तरफ से जारी किए गए इस पत्र में पूरे मामले को मोस्ट अर्जेंट बताते हुए मात्र 10 दिन की बेहद कड़ी समयसीमा तय की गई है।
दूसरी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए नया विकल्प और अन्य महत्वपूर्ण मामले
इस मामले में दूसरी श्रेणी में वे कर्मचारी आते हैं जिनके पदों का विज्ञापन नई पेंशन व्यवस्था लागू होने से पहले ही जारी हो चुका था। हालांकि इन कर्मचारियों की नियुक्ति विज्ञापन जारी होने के बाद हुई थी। हाईकोर्ट ने 8 मई 2023 के एक सरकारी कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में ही ऐसे सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना को चुनने का एक नया विकल्प देने का साफ आदेश दिया था। अदालत ने संबंधित कर्मचारियों को छह सप्ताह के अंदर अपना यह विकल्प देने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही विकल्प मिलने के बाद उनके सभी दावों पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी अदालत द्वारा दिए गए थे।
फैसले में शामिल विभिन्न विभाग और मुख्य याचिका का विवरण
इन सभी 95 मामलों के अंदर शिक्षा विभाग से जुड़े हुए कई महत्वपूर्ण मामले भी शामिल हैं। इस पूरी कानूनी कार्रवाई की मुख्य याचिका ओम प्रकाश की सेवा से संबंधित थी जो सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पार्ट टाइम सफाईकर्मी के रूप में काम कर रहे थे। इसके अलावा जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ मामला भी इस अदालत के फैसले में पूरी तरह से शामिल है। इन सबके अलावा पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक से संबंधित मामला भी इन 95 याचिकाओं का एक अहम हिस्सा है। वित्त विभाग के दो सितंबर को जारी किए गए पत्र के अंदर सभी मामलों का विभागवार पूरा ब्योरा नहीं दिया गया है।