हरियाणा सरकार 15 सितंबर से शुरू करे धान की सरकारी खरीद : गुरनाम सिंह चढूनी

हरियाणा सरकार 15 सितंबर से शुरू करे धान की सरकारी खरीद : गुरनाम सिंह चढूनी

चंडीगढ़ में 27 अगस्त को भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने एक बयान जारी किया है। गुरनाम सिंह चढूनी ने हरियाणा सरकार से एक प्रमुख मांग की है। उन्होंने कहा है कि वर्ष 2026-27 की धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर 2026 से शुरू की जाए। खरीद शुरू होने से पहले किसानों की फसल की निर्बाध खरीद की व्यवस्था हो। समय पर भुगतान और मंडियों से समय पर उठान की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

चढूनी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को लिखे पत्र को गुरुवार को चंडीगढ़ में जारी किया। उन्होंने बताया कि 2025-26 की धान खरीद से संबंधित लगभग 6.69 लाख टन चावल की डिलीवरी अभी लंबित बताई जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा चावल जमा करवाने की समय-सीमा 30 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। इसके बावजूद भारतीय खाद्य निगम द्वारा हरियाणा का निर्धारित 36 लाख टन का खरीद लक्ष्य पूरा होने की बात सामने आई है।

ऐसी स्थिति में सरकार को आगामी धान खरीद सीजन शुरू होने से पहले यह स्पष्ट करना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि पिछले वर्ष की लंबित सीएमआर डिलीवरी का वर्तमान खरीद व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि शैलर मालिक धान लेने में असमर्थ रहते हैं अथवा हड़ताल जैसी स्थिति बनती है तो क्या होगा। ऐसी स्थिति में किसानों की फसल की खरीद और उठान कैसे सुनिश्चित किया जाएगा, यह स्पष्ट होना चाहिए।

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

किसानों को किसी भी परिस्थिति में अपनी तैयार धान की फसल औने-पौने दाम पर निजी व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारण से शैलर धान लेने में असमर्थ रहते हैं तो सरकार क्या करेगी। ऐसी स्थिति में सरकारी एजेंसियां अपने स्तर पर पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था करें। इसके साथ ही अस्थायी भंडारण तथा उठान की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि मंडियों में किसान की फसल न रुके।

चढूनी ने ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल से संबंधित आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 4,83,897 किसानों द्वारा पंजीकरण कराया गया था। इन किसानों द्वारा 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान का रकबा पंजीकृत किया गया था। जबकि कृषि विभाग द्वारा 30,16,285 एकड़ रकबा वैरिफाई किया गया है।

इस प्रकार दोनों आंकड़ों में लगभग 1,36,116 एकड़ का अंतर दिखाई देता है। किसान नेता ने धान खरीद में लागू की जा रही बायोमेट्रिक व्यवस्था पर भी बात की। उन्होंने इस व्यवस्था को लेकर सरकार का ध्यान किसानों की व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर आकर्षित किया। अब बायोमेट्रिक व्यवस्था के कारण इस पूरी प्रक्रिया में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न होने की आशंका है।

इसलिए 15 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू करना किसानों के हित में सबसे प्रभावी समाधान होगा। इससे किसान की तैयार फसल को लेकर अनावश्यक परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को धान खरीद शुरू होने से पहले सभी खरीद एजेंसियों की समीक्षा करनी चाहिए। मंडी अधिकारियों, आढ़तियों और शैलर व्यवस्था की भी पूरी समीक्षा की जानी चाहिए।

प्रत्येक मंडी में खरीद की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इसमें भुगतान, भंडारण और उठान की स्पष्ट कार्ययोजना शामिल होनी चाहिए। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Share:

Comments

Leave a comment