हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी और दुर्व्यवहार के मामलों पर मांगी रिपोर्ट

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी और दुर्व्यवहार के मामलों पर मांगी रिपोर्ट

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पानीपत के बापौली ब्लॉक स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सनौली खुर्द में कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों द्वारा स्कूल प्रशासन पर लगाए गए कथित दुर्व्यवहार और मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है और इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • विद्यालय में बच्चों से दुर्व्यवहार के आरोपों पर आयोग पूरी तरह सख्त है।
  • कक्षा में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और छत से खुले विद्युत तार लटक रहे हैं।
  • विद्यार्थियों ने प्रधानाचार्य पर अभद्र व्यवहार करने और रोल से नाम काटने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।
  • छात्राओं को खुले में शौच करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पर्याप्त एवं कार्यशील शौचालय उपलब्ध नहीं हैं।
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स्कूल में मूलभूत सुविधाओं और बिजली की गंभीर कमी

आयोग को भेजी शिकायत में विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विद्यार्थियों के अनुसार कक्षा में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और छत से खुले विद्युत तार लटक रहे हैं, जिससे सुरक्षा का बड़ा खतरा बना हुआ है। इसके अलावा विद्यालय में पर्याप्त डेस्क-बेंच और पंखों की कमी के आरोप भी लगाए गए हैं। विद्यार्थियों ने भीषण गर्मी के दौरान पंखे चलाने की अनुमति नहीं दिए जाने की बात भी अपनी शिकायत में कही है।

प्रधानाचार्य पर दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोप

विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत की गई इस शिकायत पर उनके हस्ताक्षर एवं अंगूठे के निशान दर्ज हैं। शिकायत के साथ विद्यालय परिसर की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाले फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं। विद्यार्थियों ने प्रधानाचार्य पर कथित रूप से अभद्र एवं अपमानजनक व्यवहार करने, आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने तथा स्कूल रोल से नाम काटने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में यह बात भी सामने आई है कि कक्षा 12वीं-बी के विद्यार्थियों को पिछले दो से तीन माह से उनकी निर्धारित कक्षा में बैठने की सुविधा नहीं मिल रही है और उन्हें मजबूरी में कक्षा के बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

शौचालय की कमी और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर आयोग की सख्त कार्रवाई

शौचालय सुविधाओं को लेकर लगाए गए आरोपों को आयोग ने बहुत अधिक गंभीरता से लिया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार विद्यालय में पर्याप्त एवं कार्यशील शौचालय उपलब्ध नहीं हैं, जिसकी वजह से विशेष रूप से छात्राओं को खुले में शौच करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। आयोग ने यह माना है कि यदि ये सभी आरोप सत्य साबित होते हैं, तो इससे विद्यार्थियों की गरिमा, निजता, स्वास्थ्य और सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित होगी तथा उनके मूलभूत मानव अधिकारों का भी स्पष्ट उल्लंघन माना जाएगा।

आयोग का आदेश और निष्पक्ष सत्यापन के निर्देश

न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि शिकायत के साथ प्रस्तुत किए गए फोटोग्राफ प्रथमदृष्टया विद्यालय के बुनियादी ढांचे में कमियों और असुरक्षित विद्युत व्यवस्था के स्पष्ट संकेत देते हैं। इसी वजह से इन सभी आरोपों का एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सत्यापन किया जाना बेहद जरूरी है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सभी संबंधित अधिकारियों को आयोग के समक्ष जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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