हरियाणा बैंक घोटाला: सीबीआई चार्जशीट में छह आईएएस अधिकारियों के नाम आने से अफसरशाही में मचा हड़कंप, तीन पर गिरफ्तारी की तलवार

हरियाणा बैंक घोटाला: सीबीआई चार्जशीट में छह आईएएस अधिकारियों के नाम आने से अफसरशाही में मचा हड़कंप, तीन पर गिरफ्तारी की तलवार

बैंक घोटाले की चार्जशीट में नाम आने से अफसरशाही में हलचल तेज हो गई है। चंडीगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैंक घोटाले की जांच कर रही सीबीआई द्वारा चार्जशीट में छह आईएएस अधिकारियों का नाम शामिल किए जाने के बाद प्रदेश की अफसरशाही में हड़कंप मच गया है। तीन आईएएस अधिकारियों को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। चार्जशीट में नाम आने के बाद अब तीन अन्य आईएएस अधिकारियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। वीरवार को दिनभर सचिवालय में उक्त अधिकारियों के संबंध में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। यह पहला अवसर है जब सीबीआई ने चार्जशीट में छह आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल किए हैं।

सीबीआई की जांच और 504 करोड़ रुपये की हेराफेरी के आरोप

एजेंसी का मुख्य आरोप है कि सरकारी धन को नियमों को दरकिनार कर कुछ बैंक शाखाओं में स्थानांतरित किया गया था। इस धन को कई खातों में घुमाने के बाद नकदी में बदला गया। सीबीआई ने अपनी जांच में दावा किया कि कुल 504 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है। सीबीआई की चार्जशीट में 1991 बैच के विनीत गर्ग, 2000 बैच के पंकज अग्रवाल, 2002 बैच के मोहम्मद शाइन, 2005 बैच के साकेत कुमार, 2011 बैच के प्रदीप कुमार और 2012 बैच के राम कुमार सिंह के नाम शामिल हैं। सीबीआई इनमें से राम कुमार सिंह को 18 जून, पंकज अग्रवाल को 22 जून और प्रदीप कुमार को 1 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर चुकी है।

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आईएएस अधिकारियों की भूमिका और बैंक खातों के मामले

सीबीआई द्वारा इस मामले में गिरफ्तार किए गए आईएएस राम कुमार सिंह उस अवधि में पंचकूला नगर निगम के आयुक्त थे। यह वह समय था जब निगम के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ स्थित खाते से करीब 79.46 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई थी। आईएएस पंकज अग्रवाल की भूमिका हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के खातों से जुड़े मामले में सामने आई है। वे उस समय स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के प्रधान सचिव थे जब इन संस्थाओं के खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा में खोले गए थे। सीबीआई के अनुसार, इन खातों को खोलने में वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन हुआ है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि दोनों संस्थाओं से जुड़े खातों से करीब 60.54 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई है।

आईएएस प्रदीप कुमार उस समय हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव थे जब बोर्ड से संबंधित सरकारी धन की कथित हेराफेरी की गई थी। सीबीआई के अनुसार, उनकी भूमिका हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उन सरकारी खातों और लेनदेन से जुड़ी जांच का हिस्सा है। इन खातों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा के माध्यम से कथित वित्तीय अनियमितताएं हुईं थीं। सीबीआई की जांच के अनुसार, आरोपी सरकारी अधिकारियों ने दोनों बैंकों के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर सरकारी धन की भारी हेराफेरी की है। हरियाणा सरकार के आठ विभागों का अधिकृत बैंकों में रखा धन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की कुछ शाखाओं में स्थानांतरित किया गया था।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मंजूरी की प्रक्रिया

सीबीआई की चार्जशीट में नाम आने के बाद उक्त अधिकारियों के विरुद्ध शिकंजा कसना पूरी तरह तय माना जा रहा है। हरियाणा सरकार इन छह आईएएस अधिकारियों के खिलाफ केस चलाने के लिए केंद्र से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी मांगेगी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी पर भ्रष्टाचार या रिश्वत के मामले में अदालत में मुकदमा शुरू करने से पहले सरकार या संबंधित विभाग से अनुमति लेना बेहद जरूरी होता है। राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, अभी सरकार ने केंद्र को आवेदन नहीं भेजा है। इस आवेदन पर केंद्र सरकार का डीओपीटी विभाग ही अंतिम निर्णय लेगा।

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