हरियाणा की जेलों में कर्मचारियों के 48 फीसदी पद खाली, वार्डर और डॉक्टरों का भारी संकट

हरियाणा की जेलों में कर्मचारियों के 48 फीसदी पद खाली, वार्डर और डॉक्टरों का भारी संकट

हरियाणा की जेलों में सुरक्षा से लेकर बंदियों की निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। जेल महकमे में कुल 4948 पद मंजूर हैं, लेकिन इनमें से 48 फीसदी पद खाली चल रहे हैं। जेल विभाग को वार्डर से लेकर मेडिकल अफसरों तक की कमी का गंभीर सामना करना पड़ रहा है।

विधानसभा में मुलाना विधायक पूजा के सवाल पर जेल मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के जवाब ने जेल विभाग में स्टाफ की कमी की असली तस्वीर को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। विभाग में स्वीकृत 4948 पदों में से 2380 पद खाली हैं और महज 2568 कर्मचारी ही कार्यरत हैं

ग्रुप-सी और सुरक्षा कर्मियों का सबसे बड़ा संकट

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विभाग में सबसे बड़ा संकट ग्रुप-सी के पदों में बना हुआ है, जहां 2045 पद रिक्त हैं। जेल सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाले 1543 वार्डर और महिला वार्डर के पद खाली हैं। विभाग में कुल 3010 वार्डर के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 1583 कर्मचारी ही कार्यरत हैं और 1427 पद खाली पड़े हैं। इसी प्रकार 179 महिला वार्डर के स्वीकृत पदों में से केवल 63 पर ही कर्मचारी काम कर रहे हैं और 116 पद रिक्त हैं। इसके अलावा हेड वार्डर के 366 पदों में 44 खाली हैं, जबकि महिला हेड वार्डर के 63 पदों में छह पद रिक्त हैं। यह स्थिति जेलों की सुरक्षा, बंदियों की निगरानी और रोजमर्रा की जेल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।

विभिन्न श्रेणियों में खाली पदों के आंकड़े

सरकार की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि खाली पदों को भरने की प्रक्रिया लगातार चल रही है और संबंधित भर्ती एजेंसियों को पदों के लिए मांग-पत्र भेजे जा चुके हैं। रिक्तियों को चरणबद्ध तरीके से जल्द से जल्द भरने की बात भी कही गई है। आंकड़ों की असली स्थिति यह है कि सबसे ज्यादा कमी ग्रुप-सी में है, जहां 4322 में से 2045 पद खाली हैं। इसके बाद ग्रुप-डी में 458 में से 260 पद रिक्त हैं। इसके अलावा ग्रुप-ए में 98 में से 67 पद खाली हैं और ग्रुप-बी में 70 में से आठ पद रिक्त हैं

मेडिकल सेवाओं और विशेषज्ञों की भारी कमी

जेलों में बंदियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले मेडिकल स्टाफ की भारी कमी भी जवाब के दौरान सामने आई है। विभाग में 37 पुरुष मेडिकल अफसरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ तीन ही कार्यरत हैं और 34 पद खाली हैं। इसी तरह 18 महिला मेडिकल अफसरों के पदों में से केवल एक ही कर्मचारी कार्यरत है और 17 पद खाली हैं। इसके अलावा सात डर्मेटोलॉजिस्ट, चार साइकियाट्रिस्ट और दो साइकियाट्रिस्ट/मेडिकल अफसर के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इन सभी स्वीकृत पदों में से एक भी पद भरा हुआ नहीं है। इस प्रकार जेलों में मेडिकल सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ पदों पर भी भारी रिक्तियां बनी हुई हैं।

अन्य मेडिकल और तकनीकी स्टाफ का हाल

मेडिकल स्टाफ की यह कमी केवल डॉक्टरों तक ही सीमित नहीं है। विभाग में 42 फार्मासिस्ट के पदों में से 35 खाली हैं, 20 लैब टेक्नीशियन में से 19 खाली हैं, 18 रेडियोग्राफर में से 17 खाली हैं, 18 ईसीजी टेक्नीशियन के सभी 18 पद खाली हैं और 17 महिला नर्सों में से 16 पद रिक्त हैं। जेल प्रशासन में केवल सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं ही स्टाफ संकट से नहीं जूझ रही हैं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी पद भी खाली हैं।

प्रशासनिक और तकनीकी पदों की स्थिति

क्लर्क के 100 स्वीकृत पदों में से 46 पद खाली हैं। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट जेल के 107 पदों में से 57 पद रिक्त हैं, जबकि सब-असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट जेल के 91 पदों में से 26 पद खाली हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रीशियन के 23 पदों में से 16, कारपेंटर मास्टर के 11 में से आठ, लेदर मास्टर के छह में से पांच, वीविंग मास्टर के आठ में से सात और टेलर मास्टर के आठ में से सभी आठ पद खाली हैं। कई अन्य तकनीकी पद भी पूरी तरह खाली पड़े हुए हैं।

ग्रुप-डी और नई भर्तियों की प्रक्रिया

ग्रुप-डी के कुल 458 स्वीकृत पदों में से केवल 198 कर्मचारी ही कार्यरत हैं और 260 पद खाली हैं। इस श्रेणी में स्वीपर के 333 पदों में से 230 खाली हैं, कुक के 56 पदों में से 24 खाली हैं और जमादार के एक स्वीकृत पद पर कोई भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है। जेल मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। 1039 पुरुष वार्डर और 112 महिला वार्डर की नई भर्ती के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को 24 नवंबर 2025 को रिक्विजिशन भेजी गई थी। इस प्रक्रिया के तहत फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट पूरा हो चुका है और आगे फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट होना बाकी है।

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