हरियाणा में स्लाटर हाउस और मीट दुकानों के लिए डबल लाइसेंस का झंझट खत्म, सरकार विधानसभा में लेकर आई संशोधन बिल

हरियाणा सरकार ने मीट की दुकानों और स्लाटर हाउस संचालकों के लिए दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया है। नगर निकायों का अलग ट्रेड लाइसेंस अब पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। यह कारोबार अब केवल खाद्य सुरक्षा नियमों के दायरे में रहेगा।
कानून में संशोधन के लिए हरियाणा सरकार लेकर आई दो नए बिल
चंडीगढ़ से 27 अगस्त को मिली जानकारी के अनुसार, नायब सरकार मीट की दुकानों और स्लाटर हाउस संचालकों के सामने आ रही दोहरे लाइसेंस की समस्या का समाधान कर रही है। नए प्रावधान लागू होने के बाद मीट कारोबार के लिए नगर निगम या नगरपालिका से अलग ट्रेड लाइसेंस लेने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग पहले से ही इन सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है, इसलिए दोहरे लाइसेंस की यह व्यवस्था पूरी तरह से अनावश्यक थी।
विधानसभा में पेश किए गए संशोधन विधेयक
बृहस्पतिवार को हरियाणा विधानसभा में दो महत्वपूर्ण बिल पेश किए गए। इनमें हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2026 और हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। संशोधित बिल के अनुसार, केंद्र सरकार के मंत्रिमंडलीय सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ ने दोहरे लाइसेंस की आवश्यकता को समाप्त करने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बाद इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा की गई और दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था को खत्म करने का अंतिम निर्णय लिया गया।
हरियाणा नगर निगम व नगरपालिका अधिनियम 1994 में होगा बदलाव
हरियाणा सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए संशोधित विधेयकों में एक खास प्रावधान किया गया है। इसके तहत हरियाणा नगर निगम व नगरपालिका अधिनियम 1994 की धारा 329 की उपधारा (1) को हटाने का प्रस्ताव है। मौजूदा धारा 329 (1) के नियमों के अनुसार, बिना नगर निगम आयुक्त या नगरपालिका आयुक्त के लाइसेंस के मछली विक्रेता, पोल्ट्री कारोबार, या मानव उपभोग के लिए मांस आयात करने का कारोबार करना प्रतिबंधित था। इसके अलावा मांस, मछली या पोल्ट्री बेचने की जगह का संचालन करना भी बिना लाइसेंस के वर्जित था।
मीट कारोबार पर लागू रहेंगे खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य सभी नियम
इन विधेयकों में किए जा रहे संशोधन का सबसे बड़ा असर यह होगा कि मीट की दुकान या फिर इससे संबंधित अन्य कारोबार के लिए नगर निगम और नगर पालिकाओं से अलग ट्रेड लाइसेंस लेने की बाध्यता हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। इसका बिल्कुल भी यह मतलब नहीं है कि मांस कारोबार पर से सभी प्रकार के नियंत्रण पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। कारोबारियों को खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा खाद्य सुरक्षा से जुड़े लागू नियमों के तहत आवश्यक लाइसेंस, स्वीकृतियां, निरीक्षण और सभी स्वास्थ्य संबंधी मानकों का पूरी तरह से पालन करना होगा।
हरियाणा न्यायालय (संशोधन) विधेयक 2026 भी हुआ पेश
हरियाणा सरकार ने इन सबके साथ विधानसभा में हरियाणा न्यायालय (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किया है। इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य पंजाब न्यायालय अधिनियम 1918 में मौजूद सभी पुराने और अप्रचलित कानूनी प्रावधानों को वर्तमान कानून के बिल्कुल अनुरूप बनाना है। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने राज्य सरकार को इस संबंध में आधिकारिक रूप से सूचित किया था।
उत्तराधिकार कानून से जुड़े पुराने संदर्भ होंगे समाप्त
पंजाब न्यायालय अधिनियम 1918 की धारा 30 में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1865 और वसीयत एवं प्रशासन अधिनियम 1881 का विशेष उल्लेख किया गया था। हालांकि बाद में इन दोनों पुराने कानूनों को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 ने पूरी तरह से निरस्त कर दिया था। सरकार अब धारा 30 की उपधारा (2) के खंड (क) में इन दोनों पुराने कानूनों के स्थान पर केवल भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 शब्द जोड़ने का प्रावधान कर रही है। इस महत्वपूर्ण संशोधन से कानून में मौजूद सभी पुराने संदर्भ स्वतः समाप्त हो जाएंगे और प्रावधान वर्तमान समय में लागू उत्तराधिकार कानून के बिल्कुल अनुरूप हो जाएंगे।