हरियाणा में जल्द बनेगा अल्पसंख्यक आयोग और महिला आयोग में बढ़ेंगी सदस्यों की संख्या, विधानसभा में बिल पेश

हरियाणा में बहुत जल्द अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया जाएगा। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सरकार ने हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक-2026 पेश किया। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है। इसके साथ ही यह संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा। राज्य में उनके सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक वैधानिक हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की जा रही है।
आयोग की संरचना और कार्यकाल
आयोग में सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष, पांच गैर-सरकारी सदस्य और एक सचिव शामिल होंगे। अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा। इस कानून में इस्तीफे, हटाने और रिक्तियों को भरने से संबंधित सभी प्रावधान शामिल किए गए हैं। यह आयोग अल्पसंख्यक समुदायों को उपलब्ध संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की जांच करेगा। साथ ही उनके प्रभावी प्रवर्तन के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश भी करेगा।
आयोग के प्रमुख कार्य और जिम्मेदारियां
यह आयोग अल्पसंख्यकों से संबंधित सरकारी नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की निगरानी करेगा। इसके अलावा यह अध्ययन और अनुसंधान का काम भी करेगा। यह आयोग सरकारी सेवाओं में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व का आकलन करेगा। साथ ही उनके कल्याण और विकास के लिए नए उपायों की सिफारिश करेगा। यह राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का काम करेगा। आयोग अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित करने संबंधी शिकायतों की भी जांच करेगा। ऐसे सभी मामलों को उपयुक्त अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।
हरियाणा महिला आयोग में सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी
हरियाणा महिला आयोग में अब महिला सदस्यों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। हरियाणा विधानसभा में सोमवार को हरियाणा राज्य महिला आयोग संशोधन विधेयक-2026 पेश किया गया। इस संशोधन के बाद आयोग में सदस्यों की संख्या 5 से बढ़कर अब 7 हो जाएगी। इसके लिए सरकार ने हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) अध्यादेश से संबंधित अधिसूचना पहले ही जारी कर दी है। सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम 2012 की धारा 3(2)(बी) में बदलाव किया गया है।
बदलाव के कारण और लाभ
सदस्यों की संख्या बढ़ने से आयोग में विभिन्न वर्गों व क्षेत्रों की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। इसके साथ ही महिलाओं की शिकायतों, अधिकारों और कल्याण से जुड़े मामलों की सुनवाई की गति भी तेज हो सकेगी। सरकार के मुताबिक राज्य महिला आयोग में बदलाव की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। आयोग के पास घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, साइबर अपराध और महिला अधिकारों से जुड़े मामलों की संख्या पहले की तुलना में काफी अधिक हो गई है। कानूनी जागरूकता बढ़ने, आयोग तक पहुंच आसान होने और लोगों के भरोसे में इजाफा होने के कारण अधिक महिलाएं अपनी शिकायतें दर्ज करा रही हैं। सरकार का मानना है कि मौजूदा पांच गैर-सरकारी सदस्यों वाली व्यवस्था बढ़ते कार्यभार के लिए अब पर्याप्त नहीं रह गई थी। इसी वजह से शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण में कठिनाई आ रही थी। इसी कारण आयोग में सदस्यों की अधिकतम संख्या पांच से बढ़ाकर सात करने का फैसला लिया गया है।