पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के पोर्टल एक्सेस देने में हरियाणा देश भर में बना नंबर वन

- चंडीगढ़ में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
- हरियाणा पीएम गतिशक्ति स्टेट मास्टर प्लान पोर्टल पर अधिकारियों को एक्सेस देने के मामले में देश के राज्यों में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है।
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन को तेज तथा प्रभावी बनाने के लिए इस मास्टर प्लान का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
चंडीगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार हरियाणा राज्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन को तेज एवं प्रभावी बनाने के लिए पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में गुरुवार काे एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में अधिकारियों को यह जानकारी दी गई कि पीएम गतिशक्ति के माध्यम से चिन्हित, नियोजित या पूर्ण की गई परियोजनाओं की संख्या अप्रैल महीने में 9 थी जो बढ़कर अब अगस्त महीने में कुल 34 हो गई है।
मुख्य सचिव ने किया कंपेंडियम का विमोचन
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस समीक्षा बैठक के दौरान ‘कम्पेंडियम ऑफ यूज केस ऑफ पीएम गतिशक्ति इन हरियाणा’ का विमोचन भी किया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश दिए कि वे परियोजनाओं की योजना बनाने में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करें। इसके साथ ही उन्होंने लंबित डेटा इंटीग्रेशन के काम को जल्द से जल्द पूरा करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
पोर्टल एक्सेस देने में हरियाणा देश में अव्वल
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त तथा सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बैठक के दौरान यह जानकारी साझा की कि पीएम गतिशक्ति स्टेट मास्टर प्लान पोर्टल पर अधिकारियों को एक्सेस उपलब्ध कराने के मामले में हरियाणा देश के सभी राज्यों में प्रथम स्थान पर है। राज्य में अब तक 720 से अधिक अधिकारियों को इस पोर्टल के साथ जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा कुल 244 क्षमता निर्माण सत्रों का आयोजन करके 944 अधिकारियों को इसका विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
साइट असेसमेंट की प्रक्रिया में आई भारी तेजी
पीएम गतिशक्ति के जीआईएस आधारित टूल्स की वजह से विभिन्न परियोजनाओं की साइट असेसमेंट प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। हिसार के प्रस्तावित जिला नागरिक अस्पताल और पानीपत के मतलौडा में प्रस्तावित बस टर्मिनल के लिए साइट असेसमेंट का समय जो पहले लगभग 40 से 45 दिन लगता था, वह अब घटकर केवल 1 से 2 दिन ही रह गया है। वास्तुकला विभाग में भी यह समय 33 से 39 दिन से पूरी तरह घटकर अब 1 से 2 दिन हो गया है। इसके अलावा सिंचाई विभाग ने हिसार-घग्गर ड्रेन के साथ विभिन्न विभागों की परिसंपत्तियों से जुड़े अतिक्रमणों की पहचान करने के लिए भी इसी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया है। इससे इस पूरी प्रक्रिया का समय लगभग 45 दिन से घटकर मात्र 1 से 2 दिन रह गया है और ग्राउंड वेरिफिकेशन के दौरान लगभग 95 प्रतिशत डेटा पूरी तरह सटीक पाया गया है।
औद्योगिक बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं की योजना
औद्योगिक बुनियादी ढांचे की योजना तैयार करने के लिए एचएसआईआईडीसी ने राजस्व, सड़क, रेल, वन, सिंचाई, बिजली और कनेक्टिविटी सहित विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी को आपस में जोड़ने वाला एक जीआईएस आधारित टूल विकसित किया है। इस टूल का उपयोग रेवाड़ी, जींद, फरीदाबाद, अंबाला, सोनीपत के राई तथा सारल और नारायणगढ़ में औद्योगिक मॉडल टाउनशिप की योजना बनाने में किया जा रहा है। इसके साथ ही नूंह जिले में पीएम गतिशक्ति के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की पहुंच का जीआईएस आधारित विश्लेषण किया गया है। इससे स्थानीय जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच के आधार पर जरूरत वाले क्षेत्रों की सही पहचान करने में बहुत मदद मिली है।
समीक्षा बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि चिन्हित कुल 82 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से 61 की मैपिंग अब तक पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म पर सफलतापूप्र्वक की जा चुकी है, जबकि पिछले साल अप्रैल के महीने में यह संख्या केवल 40 थी। बाकी बची हुई शेष परियोजनाओं की मैपिंग के काम को भी जल्द से जल्द पूरा करने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। इसके अलावा कुल 23 विभागों द्वारा एपीआई के माध्यम से डेटा लेयर्स को आपस में जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें से 22 विभागों ने इस प्रक्रिया को या तो शुरू कर दिया है या फिर पूरा कर लिया है। मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मंजूरी के लिए एक एकीकृत एनओसी प्रणाली विकसित करने के काम में भी तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा बीआईएसएजी-एन के तकनीकी सहयोग से इस पायलट एप्लीकेशन को विकसित किया जा रहा है। अंत में मुख्य सचिव रस्तोगी ने जीएमडीए को यह निर्देश दिए कि वे गुरुग्राम के सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान को जल्द से जल्द अंतिम रूप दें और साथ ही फरीदाबाद के लिए भी ठीक इसी तरह की एक नई योजना तैयार करें। उन्होंने सभी विभागों को यह भी कहा कि वे अपने डेटा इंटीग्रेशन के काम को समय पर पूरा करें, आपसी समन्वय को बढ़ाएं और परियोजनाओं के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को तुरंत दूर करें।