हरियाणा की आवासीय कॉलोनियों में नर्सिंग होम खोलने की मिली मंजूरी, सरकार ने जारी की नई अधिसूचना

हरियाणा की लाइसेंस प्राप्त रिहायशी कॉलोनियों में अब नर्सिंग होम खोलने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने संशोधित नीति को लागू करते हुए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। नई नीति के तहत सरकार ने रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम की संख्या को भी सीमित रखा है। सेक्टर की डिवाइडिंग रोड से लगती सर्विस रोड पर एक ही साइट की अनुमति दी जाएगी। एक सेक्टर में अधिकतम चार साइट मंजूर की जा सकेंगी। इससे रिहायशी सेक्टरों में नर्सिंग होम की अनियंत्रित संख्या बढऩे पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से जारी नई नीति के मुताबिक नर्सिंग होम की अनुमति एलोपैथिक या आयुष के योग्य डॉक्टर को ही मिलेगी। डॉक्टर के नाम रिहायशी प्लॉट होना चाहिए। इसके अलावा डॉक्टर कम से कम 10 साल की लीज पर प्लॉट लेकर भी नर्सिंग होम संचालित कर सकता है। डॉक्टर का संबंधित मेडिकल अथवा आयुष काउंसिल में वैध पंजीकरण होना अनिवार्य है। स्थानीय इंडियन मेडिकल एसोसिएशन शाखा में पंजीकरण होना भी जरूरी होगा।
प्लॉट का आकार और अन्य जरूरी शर्तें
हाइपर और हाई पोटेंशियल जोन में कम से कम 350 वर्ग गज का प्लॉट जरूरी होगा। मीडियम और लो पोटेंशियल जोन में कम से कम 250 वर्ग गज का प्लॉट होना जरूरी है। हाइपर और हाई जोन में नर्सिंग होम के लिए साइट की पहुंच सर्विस रोड से होनी चाहिए। इसके अलावा जिस लाइसेंस प्राप्त प्लॉटेड कॉलोनी में नर्सिंग होम की अनुमति दी जाएगी, वहां सभी आंतरिक सेवाएं बिछी होना जरूरी है। वहां कंप्लीशन अथवा पार्ट-कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होना भी जरूरी होगा।
कन्वर्जन चार्ज और आवेदन की प्रक्रिया
नर्सिंग होम के लिए पोटेंशियल जोन के हिसाब से कन्वर्जन चार्ज तय किए गए हैं। हाइपर जोन में 10 हजार रुपये प्रति वर्ग गज का शुल्क लगेगा। हाई जोन में 8 हजार रुपये, मीडियम जोन में 6 हजार रुपये और लो जोन में 4 हजार रुपये प्रति वर्ग गज शुल्क लगेगा। खास बात यह है कि इन मामलों में ईडीसी समेत कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा। आवेदन नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निदेशक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को करना होगा।
व्यावसायिक गतिविधियां और पार्किंग के सख्त नियम
सरकार ने साफ किया है कि नर्सिंग होम परिसर में डायग्नोस्टिक सुविधाओं के अलावा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। इनडोर और आउटडोर मरीजों के लिए फार्मेसी चलाने की छूट दी जाएगी। नर्सिंग होम के लिए पार्किंग को लेकर भी नियम बहुत सख्त रखे गए हैं। हरियाणा बिल्डिंग कोड के अनुसार पार्किंग देनी होगी और स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य होगी। नर्सिंग होम आने वाले वाहनों के साथ एंबुलेंस की पार्किंग भी पूरी तरह प्लॉट की सीमा के भीतर करनी होगी। इसके लिए सामने की बाउंड्री वॉल बनाने की अनुमति नहीं होगी। बेसमेंट में क्लिनिक, एक्स-रे और लैब जैसी सुविधाएं भी निर्धारित नियमों के तहत बनाई जा सकेंगी।