हरियाणा पुलिस में होगा एआई टास्क फोर्स का गठन, साइबर अपराध जांच बनेगी तेज और तकनीक-सक्षम

हरियाणा पुलिस में होगा एआई टास्क फोर्स का गठन, साइबर अपराध जांच बनेगी तेज और तकनीक-सक्षम

हरियाणा पुलिस बदलते अपराध के स्वरूप और तेजी से बढ़ती डिजिटल चुनौतियों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में हरियाणा पुलिस में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब पुलिसिंग में और अधिक बढ़ेगा। टास्क फोर्स का नेतृत्व एक आईपीएस रैंक के अधिकारी को सौंपा जाएगा। जिन्हें हरियाणा पुलिस का एआई अफसर नॉमिनेट किया गया है।

चंडीगढ़ में दी गई जानकारी

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हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने सोमवार को चंडीगढ़ में जारी जानकारी में बताया कि इसका उद्देश्य पुलिसिंग में एआई के व्यावहारिक और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना है। तथा जांच एवं नागरिक सेवाओं को अधिक स्मार्ट, तेज और प्रभावी बनाना है।

हरियाणा पुलिस द्वारा एआई आधारित प्रणालियों के माध्यम से शिकायतों एवं न्यायालयों से संबंधित सूचनाओं के प्रबंधन का काम किया जा रहा है। इसके अलावा डेटा प्रोसेसिंग तथा आवश्यक कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित और कुशल बनाने में तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

तकनीकी क्षमता विकसित करना मुख्य उद्देश्य

पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि अपराधी जिस तेजी से तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, पुलिस को उससे एक कदम आगे रहकर तकनीकी क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पुलिसिंग को अधिक डेटा-ड्रिवन, तेज और सटीक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रस्तावित एआई टास्क फोर्स पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित उपयोगों की पहचान करने की दिशा में काम करेगी। मौजूदा प्रणालियों में एआई आधारित समाधान लागू करने और अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी यह टास्क फोर्स काम करेगी।

भविष्य में इसका उपयोग डेटा एनालिटिक्स और साइबर अपराध जांच में किया जा सकता है। डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण, दस्तावेजों की प्रोसेसिंग, अपराध के पैटर्न की पहचान और पुलिसिंग से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

डेटा सुरक्षा और मानव निगरानी पर जोर

टास्क फोर्स का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी रहेगा कि एआई आधारित प्रणालियां सटीकता और पारदर्शिता के साथ विकसित की जाएं। डेटा सुरक्षा और मानव निगरानी के सिद्धांतों के अनुरूप ही इन प्रणालियों को विकसित किया जाएगा।

इससे तकनीक के उपयोग के साथ-साथ जांच की विश्वसनीयता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही पुलिस जांच में जवाबदेही भी पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सकेगी।

एआई-असिस्टेड फाइनेंशियल ट्रेल एनालिसिस पर काम

पुलिस अधीक्षक साइबर मयंक गुप्ता ने बताया कि साइबर अपराधों में बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा जांच का हिस्सा बनता है। बैंकिंग लेन-देन, मोबाइल एवं ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं भी इस जांच का अहम हिस्सा होती हैं।

ऐसे में मैनुअल तरीके से प्रत्येक रिकॉर्ड और लेन-देन का विश्लेषण करना जांच अधिकारियों के लिए समय लेने वाला साबित हो सकता है। यह तरीका जांच अधिकारियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए हरियाणा पुलिस की टीम AI-assisted Financial Trail Analysis पर भी काम कर रही है। इस तकनीक का उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के बीच संबंधों को पहचानना है।

यह तकनीक लेन-देन के पैटर्न का विश्लेषण करने में भी मदद करेगी। धन के संभावित प्रवाह को समझने तथा महत्वपूर्ण कड़ियों को जांच अधिकारियों के सामने तेजी से रखने में यह तकनीक सहायता करेगी।

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