अपराधियों पर पुलिस का डिजिटल शिकंजा: हरियाणा में 45 हजार से अधिक अपराधी रडार पर, 57 प्रतिशत से ज्यादा का सत्यापन पूरा

अपराधियों पर पुलिस का डिजिटल शिकंजा: हरियाणा में 45 हजार से अधिक अपराधी रडार पर, 57 प्रतिशत से ज्यादा का सत्यापन पूरा

हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और सक्रिय अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए अपना इंटेलिजेंस आधारित क्राइम मॉनिटरिंग मॉडल मजबूत किया है। आरजेएसएफ पैटर्न के तहत 1 फरवरी से 25 अगस्त 2026 तक प्रदेशभर में 45,207 सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार किया गया है। इनमें से 26,026 अपराधियों की जांच पूरी हो चुकी है जो कुल संख्या का 57.57 प्रतिशत है। पुलिस अब शेष 19,137 अपराधियों का सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर कर रही है।

अपराध रोकथाम के लिए डिजिटल डेटा का उपयोग

चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस का लक्ष्य अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय उपलब्ध खुफिया और डिजिटल डेटा के आधार पर अपराध की संभावना को पहले ही चिन्हित कर रोकथाम करना है। आरजेएसएफ पैटर्न पर साप्ताहिक जांच के दौरान अब तक सत्यापित 26,026 अपराधियों में से 7,425 अपने दर्ज पतों पर मौजूद मिले। वहीं 1612 अपराधी जेल में पाए गए जबकि 375 की मृत्यु हो चुकी है। इस प्रक्रिया से पुलिस के पास अपराधियों की वास्तविक और वर्तमान स्थिति का अपडेटेड रिकॉर्ड तैयार हो रहा है जिससे निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई को प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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तकनीकी निगरानी और एफआरएस डेटा अपलोड

आरजेएसएफ पैटर्न के तहत अब तक 6762 अपराधियों का एफआरएस डेटा अपलोड किया जा चुका है। इसका उद्देश्य अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों की तकनीकी निगरानी को मजबूत करना है। अपराधियों की प्रोफाइलिंग, फील्ड निगरानी, तकनीकी निगरानी और इंटेलिजेंस इनपुट को एक-दूसरे से जोड़कर डेटा का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था संजय कुमार के अनुसार आरजेएसएफ मॉडल की शुरुआत रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जैसे अपराध की दृष्टि से संवेदनशील जिलों से हुई थी। अपराधियों की प्रोफाइलिंग, वर्तमान स्थिति के सत्यापन और आपराधिक नेटवर्क की पहचान को एक साथ जोड़ने वाले इस मॉडल के अनुभव और सफलता के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

विभिन्न जिलों में सत्यापन की स्थिति

जिला स्तर पर भी अभियान में तेजी दिखाई दे रही है। रोहतक, झज्जर और फरीदाबाद में 100 प्रतिशत सक्रिय अपराधियों की जांच पूरी हो चुकी है। हिसार में 99.11 प्रतिशत, सोनीपत में 93.13 प्रतिशत और सिरसा में 81.97 प्रतिशत जांच पूरी हुई है। इसी तरह कैथल में 68.43 प्रतिशत, जींद में 62.82 प्रतिशत और फतेहाबाद में 57.49 प्रतिशत सक्रिय अपराधियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बदलते अपराध के स्वरूप के मद्देनजर पुलिसिंग को इंटेलिजेंस आधारित, तकनीक समर्थित और डेटा संचालित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अपराधी की सही पहचान, वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की जानकारी पुलिस के पास होना अपराध नियंत्रण की पहली आवश्यकता है। संदिग्ध या सक्रिय गतिविधि सामने आने पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अब जिलों के बीच डेटा साझा करने और समन्वय को भी मजबूत करेगी जिससे एक जिले में उपलब्ध अपराधी से संबंधित महत्वपूर्ण सूचना दूसरे जिले की पुलिस तक तेजी से पहुंच सकेगी।

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