हरियाणा में अब बिना पंजीकरण के नहीं चलेंगे कोचिंग सेंटर, मंत्रिमंडल की बैठक में नए नियमों को मंजूरी

हरियाणा में अब बिना पंजीकरण के नहीं चलेंगे कोचिंग सेंटर, मंत्रिमंडल की बैठक में नए नियमों को मंजूरी

चंडीगढ़ में 13 अगस्त को मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में हरियाणा में कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए एक नया फ्रेम वर्क तैयार किया गया है। मंत्रिमंडल ने बैठक के दौरान ‘हरियाणा प्राइवेट कोचिंग संस्थान, रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन नियम, 2026’ को अपनी मंजूरी दे दी है।

ये नए नियम 'हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान पंजीकरण और विनियमन अधिनियम, 2024' के तहत बनाए गए हैं। ये नियम उच्चतर अध्ययन, नौकरियों, पेशेवर पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग देने वाले निजी कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण और विनियमन का प्रावधान करेंगे। यह एक्ट भारत सरकार द्वारा जनवरी 2024 में जारी की गई गाइडलाइन के पूरी तरह से अनुरुप हैं।

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छात्रों के हितों की रक्षा और पारदर्शिता

बैठक के बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी कोचिंग सेंटर अथवा संस्थान को रोकना बिल्कुल नहीं है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन संस्थानों को रेगुलेट करते हुए छात्रों के हितों की पूरी रक्षा करना है। हरियाणा तथा देश के अन्य राज्यों में कोचिंग सेंटरों में आग लगने जैसी गंभीर घटनाओं के अलावा अन्य कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के संबंध में नियम और कानून बनाने की मांग पिछले काफी लंबे समय से लगातार चली आ रही है।

वर्तमान समय में राज्यभर में हजारों की संख्या में कोचिंग सेंटर बिना किसी नियम और बुनियादी सुविधा के धड़ल्ले से चल रहे हैं। दिल्ली एनसीआर के अलावा राज्य के रोहतक, भिवानी, करनाल तथा पंचकूला आदि प्रमुख शहरों में कोचिंग सेंटरों की बहुत अधिक भरमार है। इन सभी कोचिंग सेंटरों को पूरी तरह से रेगुलेट करने के लिए ही राज्य सरकार ने इन नए नियमों को अपनी मंजूरी प्रदान की है।

पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण अनिवार्य

इन नए नियमों के तहत अब राज्य के सभी मौजूदा और नए स्थापित होने वाले प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कराना पूरी तरह से अनिवार्य होगा। इस विशेष कार्य के लिए सरकार बहुत जल्द ही एक नया पोर्टल विकसित करेगी। इस बनाए जाने वाले पोर्टल पर प्रत्येक कोचिंग सेंटर का पंजीकृत होना आवश्यक होगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी कोचिंग संस्थानों को अपने संस्थान, विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी तथा अन्य सभी आवश्यक जानकारियां अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध करानी होंगी। स्वीकृत किए गए इस नए ढांचे के तहत प्रत्येक मौजूदा निजी कोचिंग संस्थान के साथ-साथ नया कोचिंग सेंटर खोलने की इच्छा रखने वाले किसी भी संस्थान को नामित पोर्टल के माध्यम से ही पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा।

पंजीकरण शुल्क और समय सीमा

पंजीकरण के लिए सरकार ने 10,000 रुपये का शुल्क निर्धारित किया है, जिसे पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ही देना होगा। संबंधित प्राधिकरण प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों की जांच 30 दिनों के भीतर पूरी करेगा। यदि आवेदन सभी प्रकार से पूरी तरह पूर्ण पाए जाते हैं, तो प्राधिकरण तीन साल के लिए वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी कर देगा।

इन बनाए गए नियमों में पंजीकरण के नवीनीकरण का भी स्पष्ट प्रावधान शामिल किया गया है। किसी भी निजी कोचिंग संस्थान को अपने पंजीकरण प्रमाण-पत्र की समाप्ति से कम से कम एक महीने पहले आवेदन करना होगा। संस्थानों को 5,000 रुपये के नवीनीकरण शुल्क के साथ पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा।

बुनियादी सुविधाएं और भवन से जुड़ी जानकारी

यह नियामक ढांचा मुख्य रूप से कोचिंग संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता और पूरी जवाबदेही पर ही केंद्रित है। पंजीकृत संस्थानों को निर्धारित सभी रिकॉर्ड्स को सही से बनाए रखना होगा। इसके अलावा संबंधित प्राधिकरण को सालाना जानकारी प्रस्तुत करनी होगी और अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपेक्षित जानकारी अपलोड करना भी अनिवार्य होगा।

कोचिंग संस्थानों के लिए यह बेहद आवश्यक है कि वे अपने पाठ्यक्रमों, पाठ्यक्रम-सामग्री, शुल्क संरचना, कक्षाओं की संख्या और क्षमता की जानकारी दें। इसके अलावा प्रति बैच अधिकतम छात्रों की संख्या, शिक्षण, परामर्शदाता यानी काउंसलिंग और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता व बायोडाटा की जानकारी देनी होगी। छात्रों की संख्या के सही अनुपात में कोचिंग क्षेत्र के विवरण से संबंधित व्यापक जानकारी प्रदान करना भी संस्थानों के लिए आवश्यक है।

इन नए नियमों के माध्यम से छात्रों के लिए कोचिंग संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी पूरा प्रयास किया गया है। निर्धारित की गई जानकारी में फर्नीचर, पर्याप्त रोशनी, पीने योग्य पानी, पुरुष और महिला छात्रों के लिए अलग शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा अग्नि-सुरक्षा उपायों, चिकित्सा सहायता या फर्स्ट-एड, पार्किंग, पुस्तकालय या वाचनालय, वाई-फाई, स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर प्रयोगशाला, छात्रावास और कै́nटीन की सुविधाएं भी शामिल हैं।

यह नया ढांचा भवन से संबंधित सभी विवरण प्रस्तुत करने का भी स्पष्ट प्रावधान करता है। इसमें यह मुख्य रूप से शामिल है कि उपयोग किया जा रहा भवन अपना है या फिर लीज अथवा किराए पर लिया गया है। इसके साथ ही अग्नि-सुरक्षा प्रमाणन, संरचनात्मक स्थिरता यानी स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी प्रमाणन की जानकारी भी देनी होगी। संस्थान को यह भी बताना होगा कि क्या भवन विशेष रूप से सक्षम यानी दिव्यांग छात्रों के लिए बाधा मुक्त यानी बैरियर-फ्री है या नहीं। इसके अतिरिक्त, संस्थान के सभी कर्मचारियों के चरित्र और पूर्ववृत्त यानी एंटीसिडेंट्स के सत्यापन के संबंध में भी पूरी जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।

डिम्री एडमिशन पर रोक

आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि दसवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी होने के बाद विद्यार्थी स्कूलों में डमी एडमिशन करवा लेते हैं। इसके बाद वे सीधे विभिन्न कोचिंग सेंटरों में जाकर अपनी कोचिंग लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन अब इन नए नियमों के लागू होने के बाद इस प्रक्रिया पर भी एक प्रकार की तलवार लटक गई है।

राज्य सरकार ने इस बात को बिल्कुल साफ कर दिया है कि प्रत्येक संस्थान को यह बात सुनिश्चित करनी होगी। स्कूलों या अन्य शिक्षण संस्थानों में नियमित रूप से पढ़ने वाले छात्रों के लिए कोचिंग कक्षाएं कभी भी आयोजित नहीं की जाएंगी। यह कक्षाएं उनके नियमित अध्ययन या कार्य समय के दौरान बिल्कुल नहीं चलाई जा सकती हैं।

सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है कि राज्य के सभी निजी कोचिंग संस्थान पूरी तरह से पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र-अनुकूल तरीके से अपना कामकाज करें।

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