हरियाणा में निजी स्कूल बच्चों को पढ़ा रहे मुफ्त, सरकार भुगतान से पीछे

हरियाणा में निजी स्कूल बच्चों को पढ़ा रहे मुफ्त, सरकार भुगतान से पीछे

चंडीगढ़, 23 अगस्त। हरियाणा के निजी स्कूलों को 134 ए, आरटीई और चिराग़ योजना के तहत विद्यार्थियों को मुफ्त पढ़ाने के बावजूद उनकी प्रतिपूर्ति राशि का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। वर्षों से भुगतान लंबित होने के कारण प्रदेश के निजी स्कूल गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। दूसरी तरफ शिक्षा विभाग हजारों स्कूलों के एमआईएस पोर्टल दोबारा बंद करने की तैयारी में है।

प्राईवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने रविवार को जारी जानकारी में कहा कि 134 ए के तहत कक्षा दूसरी से आठवीं तक विद्यार्थियों के सभी दस्तावेजों का जिला स्तरीय कमेटी द्वारा दो बार सत्यापन करवाया जा चुका है। इसके बावजूद 15 जिलों की दो वर्षों की प्रतिपूर्ति राशि बकाया है और कक्षा नौवीं से 12वीं का 11 वर्षों से प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान प्रदेश के स्कूलों को नहीं मिला है। यह 134ए समाप्त होने के बाद भी निजी स्कूलों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं रोकी और उन्हें शिक्षा उपलब्ध कराई लेकिन विभाग की ओर से उसकी प्रतिपूर्ति नहीं की गई।

लंबित प्रतिपूर्ति और पोर्टल बंद होने की समस्या

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कुंडू ने कहा कि आरटीई और चिराग योजना की भी दो तीन वर्षों से प्रतिपूर्ति राशि लंबित है। शिक्षा के अधिकार के तहत सीट डेक्लेरेसन या मान्यता का दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड न करने के कारण हजारों स्कूलों के एमआईएस पोर्टल लगभग तीन महीने से बंद किए हुए थे। स्पोर्ट्स टूर्नामेंट में भाग लेने वाले बच्चों के दाखिले स्कूलों के एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के लिए 21 अगस्त को इन स्कूलों के पोर्टल खोल दिए गए थे। लेकिन निदेशालय के पत्र अनुसार 25 अगस्त के बाद दोबारा से इन हजारों स्कूलों के पोर्टल बंद करने की तैयारी है जो कि न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर फॉर्म 6 ऑनलाइन करते समय स्कूल से कोई त्रुटि रह जाती है या किसी कारण से फाइनल सबमिट नहीं हो पाता तो उस स्कूल को गलती सुधारने का एक अवसर देने की बजाए उसके स्कूल के बच्चों का नाम चिराग़ योजना की भुगतान प्रतिपूर्ति राशि की सूची से हटा दिया जाता है। इससे उस स्कूल को राशि नहीं मिल पाती और वे बच्चे अभी भी उन स्कूलों में इस योजना के तहत पढ़ रहे हैं। स्कूलों ने शिक्षकों के वेतन, भवन, बिजली, पानी और अन्य खर्च लगातार वहन किए हैं, लेकिन विभाग से मिलने वाली राशि अटकने से निजी स्कूलों की आर्थिक व्यवस्था चरमरा रही है।

सरकार से प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान की मांग

प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने सरकार से मांग की कि 134 ए, आरटीई और चिराग़ योजना की समस्त लंबित प्रतिपूर्ति राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। इससे गरीब बच्चों की पढ़ाई में किसी प्रकार की रुकावट न आए और इन हजारों स्कूलों के एमआईएस पोर्टल स्थायी रूप से खोले जाएं ताकि निजी स्कूल संचालकों व इनमें अध्ययनरत लाखों बच्चों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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