हरियाणा में सूचना अधिकार कानून में 25 हजार अफसरों की ट्रेनिंग, गांव-गांव सरपंच बनेंगे जवाबदेह और घर बैठे होगी ऑनलाइन सुनवाई

Atal Hind11 August 20267 min read103 viewsचंडीगढ़-हरियाणा
हरियाणा में सूचना अधिकार कानून में  25 हजार अफसरों की ट्रेनिंग, गांव-गांव सरपंच बनेंगे जवाबदेह और घर बैठे होगी ऑनलाइन सुनवाई

हरियाणा में आम नागरिकों के लिए सरकारी विभागों से सूचना हासिल करने की प्रक्रिया अब बेहद आसान, तेज और पारदर्शी होने जा रही है। राज्य सूचना आयोग (State Information Commission) ने सूचना का अधिकार (RTI) व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए एक व्यापक और ऐतिहासिक सुधार योजना की शुरुआत की है। इस महा-अभियान के तहत जहां एक तरफ राज्य के लगभग 25 हजार लोक सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ गांव-गांव के 6,300 सरपंचों को भी इस कानून के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा।

पंचकुला / 11 अगस्त 2026/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

हरियाणा में सूचना के अधिकार यानी आरटीआई व्यवस्था को आम लोगों के लिए और आसान, साफ-सुथरी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सूचना आयोग ने कुछ ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आयोग अब अधिकारियों के बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण, ऑनलाइन सुनवाई, दूसरी अपील और शिकायतों की ई-फाइलिंग, पुराने रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और महत्वपूर्ण फैसलों को आम लोगों तक पहुंचाने जैसी कई बातों पर काम कर रहा है।

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ये खबर मुख्य रूप से आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त टी.वी.एस.एन. प्रसाद द्वारा पंचकुला स्थित आयोग कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में दी गई जानकारी पर आधारित है। इसमें राज्य सूचना आयुक्त अमरजीत सिंह, करमवीर सैनी, नीता खेरा, संजय मदान और अजय सूरा भी मौजूद रहे।

आयोग की योजना के मुताबिक प्रदेश के करीब 25 हजार राज्य लोक सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफएए) को आरटीआई कानून की ट्रेनिंग दी जाएगी। इनमें करीब 6300 सरपंच भी शामिल होंगे। गांवों में जहां सरपंच एसपीआईओ की जिम्मेदारी निभाते हैं, वहां भी उन्हें कानून और सूचना देने की सही प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।

यह प्रशिक्षण अभियान 12 अगस्त 2026 से शुरू हो रहा है। यह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से चलेगा। प्रशिक्षण में सिर्फ कानून की धाराएं नहीं सिखाई जाएंगी। अधिकारियों को यह भी समझाया जाएगा कि कौन सी सूचना नागरिकों को दी जा सकती है और किन परिस्थितियों में दी जानी चाहिए। आयोग का जोर इस बात पर है कि अधिकारी सिर्फ छूट वाली सूचनाओं को रोकने पर ध्यान न दें, बल्कि नागरिक-केंद्रित नजरिया अपनाएं।

प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए आयोग ने हैदराबाद के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (एएससीआई) और हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एचआईपीए) के साथ सहयोग किया है। जरूरत पड़ने पर विधि संस्थानों से भी विशेषज्ञ बुलाए जाएंगे। आयोग का कहना है कि यह कार्यक्रम देश के बड़े आरटीआई क्षमता-वर्धन कार्यक्रमों में से एक होगा।

मुख्य सूचना आयुक्त टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने कहा कि आरटीआई की असली सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि आम नागरिक को सूचना कितनी आसानी से और कितनी जल्दी मिलती है। सिर्फ लंबित मामलों की संख्या घटाना ही लक्ष्य नहीं है।

आयोग ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों यानी एफएए की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण माना है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें उनके कानूनी अधिकार, दायित्व और अर्द्ध-न्यायिक भूमिका की खास ट्रेनिंग दी जाएगी। आयोग का मानना है कि अगर किसी आरटीआई आवेदन पर विभागीय स्तर पर ही पहली अपील का सही और समय पर समाधान हो जाए तो कई मामले दूसरी अपील के रूप में आयोग तक नहीं पहुंचेंगे। इससे आयोग का बोझ भी कम होगा।

इसी तरह एसपीआईओ को साफ, तथ्यपूर्ण और कानून के अनुसार जवाब तैयार करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे पूरे प्रदेश में सूचना देने की प्रक्रिया में एकरूपता आने की उम्मीद है।

राज्य सूचना आयोग अब आरटीआई मामलों की सुनवाई को पूरी तरह हाइब्रिड मोड में ले जाने की तैयारी कर रहा है। यानी अपीलकर्ता और अधिकारी चाहें तो आयोग कार्यालय आकर सुनवाई में शामिल हो सकते हैं या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने स्थान से भी जुड़ सकते हैं।

इसका सबसे बड़ा फायदा दूरदराज के जिलों के नागरिकों को होगा। उन्हें पंचकुला या चंडीगढ़ तक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आयोग की योजना है कि ऑनलाइन सुनवाई के दौरान संबंधित एसपीआईओ अपने कार्यालय में मामले से जुड़े रिकॉर्ड तैयार रखें। इससे रिकॉर्ड पेश करने में देरी और अनावश्यक स्थगन कम हो सकते हैं।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त की अदालत में सुनवाई पूरी तरह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कराने की भी व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ने पर सुनवाई का समय बदला जा सकेगा।

अभी हरियाणा में आरटीआई आवेदन और प्रथम अपील ऑनलाइन दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन दूसरी अपील और शिकायतें मैनुअल तरीके से ही दाखिल करनी पड़ती हैं। आयोग अब अपने वेब पोर्टल के जरिए दूसरी अपील और शिकायतों की ऑनलाइन ई-फाइलिंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

इसके लागू होने के बाद आरटीआई प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा डिजिटल हो जाएगा। आयोग प्राथमिकता वाली सुनवाई के लिए पोर्टल पर ‘लाइव लिंक’ सुविधा भी शुरू करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसके जरिए पक्षकार उपलब्ध तारीख और समय देखकर खुद प्राथमिकता सुनवाई का अनुरोध कर सकेंगे।

आयोग में केंद्रीय पंजीकरण इकाई स्थापित की गई है। यह व्यवस्था उच्च न्यायालयों की तरह काम करेगी। मामलों का व्यवस्थित पंजीकरण होगा और प्रारंभिक जांच के बाद रजिस्ट्रार स्तर पर आवंटन किया जाएगा। इससे मामलों का वितरण संतुलित होगा और निस्तारण में तेजी आएगी।

पहले सूचना आयुक्तों को विभागवार सीमित रखने की व्यवस्था थी। अब एक आयुक्त को एक से ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकेगी। इससे लंबित मामलों के निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है।

आयोग अपने पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। इससे पुराने मामलों और दस्तावेजों तक इलेक्ट्रॉनिक पहुंच आसान होगी। रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर और सुरक्षित होगा। फाइलें गुम होने या कागजी खोजबीन की परेशानी भी कम होगी।

आयोग आरटीआई कानून की व्याख्या और महत्वपूर्ण मामलों के फैसलों को नागरिकों तक सरल भाषा में पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए त्रैमासिक जर्नल और ‘इम्पोर्टेंट केसेज बुलेटिन’ शुरू करने की योजना है। महत्वपूर्ण फैसले वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे एसपीआईओ, एफएए, नागरिक और विधि विशेषज्ञ सभी को एकरूपता समझने में मदद मिलेगी।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 पूरे देश में लागू है। हरियाणा में भी राज्य के नियम 2009 के तहत काम होता है। आरटीआई आवेदन का शुल्क आमतौर पर 50 रुपये है। बीपीएल आवेदकों को छूट मिलती है। सूचना 30 दिन में देनी होती है। पहली अपील 30 दिन में और दूसरी अपील 90 दिन में दायर की जा सकती है।

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 20 साल में आयोग को एक लाख से ज्यादा दूसरी अपीलें और हजारों शिकायतें मिलीं। ज्यादातर निपटा ली गईं, लेकिन कुछ हजार मामले अभी भी लंबित हैं। कई पद खाली होने से भी काम प्रभावित होता रहा है।

हाल के महीनों में आयोग ने कुछ सख्त आदेश भी दिए हैं। जैसे ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों पर अगर समय पर कार्रवाई न हो तो उसे ‘डीम्ड रिफ्यूजल’ माना जाएगा। अधिकारी यह बहाना नहीं बना सकते कि आवेदन उनके संज्ञान में नहीं आया। आयोग ने कई मौकों पर एसपीआईओ पर जुर्माना भी लगाया है और जुर्माना वसूलने के लिए वेतन या पेंशन से कटौती का प्रावधान भी बनाया गया है।

कुछ मामलों में आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला सूचना प्रौद्योगिकी सोसायटी (डीआईटीएस) जैसी संस्थाओं से जुड़ी जानकारी भी आरटीआई के दायरे में आ सकती है अगर वह लोक प्राधिकरण के नियंत्रण में हो। अधिकारी नागरिकों को आरटीआई आवेदन दाखिल करने से नहीं रोक सकते या ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते।

ये सभी कदम आरटीआई को सिर्फ कानूनी प्रावधान नहीं बल्कि नागरिकों के लिए व्यावहारिक अधिकार बनाने की दिशा में हैं। अगर प्रशिक्षण, डिजिटल सुविधाएं और हाइब्रिड सुनवाई सही तरीके से लागू होती हैं तो आवेदन से लेकर सुनवाई तक की प्रक्रिया आम लोगों के लिए काफी आसान हो सकती है।

आयोग का लक्ष्य सिर्फ आंकड़े सुधारना नहीं है। टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने साफ कहा कि सूचना का अधिकार तभी सफल माना जाएगा जब आम नागरिक को जरूरी जानकारी समय पर, आसानी से और सही तरीके से मिल सके।

हरियाणा में आरटीआई का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के लिए ये बदलाव सीधे असर डाल सकते हैं। प्रशिक्षण 12 अगस्त से शुरू हो चुका होगा या हो रहा होगा। आगे की सुविधाएं जैसे ई-फाइलिंग और पूरी हाइब्रिड सुनवाई जल्द शुरू होने की उम्मीद है। नागरिक इन सुविधाओं का सही इस्तेमाल करके सरकारी विभागों से सूचना हासिल कर सकते हैं।

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