हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, 32 बर्खास्त और दो निलंबित

हरियाणा में छह अगस्त से हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों पर अब प्रदेश सरकार बहुत सख्त हो गई है। सोमवार को प्रदेश सरकार ने राज्य के अलग-अलग शहरी निकायों में पे रोल और हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से लगे 32 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इसके अलावा दो कर्मचारियों को निलंबित भी किया गया है। सोमवार को कुल 34 कर्मचारियों के विरूद्ध सरकार द्वारा कड़ी कार्रवाई की गई है। इन सभी कर्मचारियों के खिलाफ सफाई कार्य नहीं करने और काम कर रहे अन्य कर्मचारियों को भी काम करने से रोकने के गंभीर आरोप में एफआइआर दर्ज की गई है।
हड़ताल लंबी खिंचने के साथ ही प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। प्रदेश के सफाई कर्मचारी पहले ही नौ सितंबर तक अपनी हड़ताल का बड़ा ऐलान कर चुके हैं। हरियाणा में पालिका रोल पर मौजूद कुल 13091 सफाई कर्मचारी जो कि कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारी हैं, वे सभी छह अगस्त से लगातार हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उनका पूरा समर्थन करते हुए कुल 3418 रेगुलर सफाई कर्मचारी भी उनके साथ इस हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इस समर्थन के कारण कचरा उठाने का पूरा काम पूरी तरह से ठप हो गया है। प्रदेश के सभी शहरों में जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं।
सरकार और कर्मचारियों की मांगें
सरकार का यह दावा है कि वह कर्मचारियों की कुल 13 मांगों में से 12 मांगों को मानने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई है। इन प्रमुख मांगों में एलटीसी सुविधा, न्यूनतम वेतन, बीमा, पीएफ, रिस्क अलाउंस, दया के आधार पर मदद और सफाई कर्मचारियों व सीवरमैन का क्लर्क के पदों पर प्रमोशन शामिल है। विवाद की सबसे मुख्य वजह कर्मचारियों को पक्का करना है। सरकार कानूनी अड़चनों का हवाला देते हुए इस मांग को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।
हड़ताल की मुख्य वजह और विवाद
फिलहाल अर्बन लोकल बॉडीज़ डिपार्टमेंट कचरा उठाने के लिए 16657 आउटसोर्स कर्मचारियों पर पूरी तरह से निर्भर है। बड़ी समस्या यह है कि हड़ताल कर रहे कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों को कचरा उठाने से रोक रहे हैं। इस वजह से जगहों-जगहों पर झड़पें हो रही हैं। अब तक इस मामले में कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। हड़ताली कर्मचारी दो साल की पॉलिसी बनाकर नौकरी पक्का करने की मांग कर रहे हैं। सरकार इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं है। केवल इसी एक मांग को लेकर कर्मचारी और सरकार के बीच तनातनी बनी हुई है। हड़ताली कर्मचारी जॉब सिक्योरिटी की बजाए नियमितीकरण की मांग पर पूरी तरह से अड़े हुए हैं। यही मुख्य मुद्दा सरकार और कर्मचारियों के बीच समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। हाल के दिनों में इस हड़ताल के कारण गुरुग्राम समेत कई प्रमुख शहरों में कचरा उठाने और सफाई व्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
बर्खास्तगी के आंकड़े
सोमवार को सरकार ने कुल 32 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनमें सर्वाधिक 15 कर्मचारी अकेले सोनीपत जिले के शामिल हैं। इसके अलावा कैथल, जींद, सिरसा, फतेहाबाद और फरीदाबाद में भी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जिलावार बर्खास्त कर्मचारियों की संख्या
हिसार में 06 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। कैथल में 07 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। सोनीपत में सबसे ज्यादा 15 कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है। सिरसा में 01 कर्मचारी को निकाला गया है। फतेहाबाद में 01 कर्मचारी बर्खास्त हुआ है। जींद में 03 कर्मचारियों पर गाज गिरी है। फरीदाबाद में भी 01 कर्मचारी को बर्खास्त किया गया है।