सोनीपत में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव कुमार खंडेलवाल को घर जाकर किया सम्मानित

सोनीपत में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने एक नई पहल की शुरुआत की है। स्वास्थ्य कारणों से सम्मान समारोह में शामिल नहीं हो सके साहित्यकारों को अब उनके घर जाकर सम्मानित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोनीपत के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव कुमार खंडेलवाल को सेक्टर-14 स्थित उनके निवास पर विशेष हिंदी सेवी सम्मान-2021 से सम्मानित किया गया है।
सम्मान के रूप में एक लाख रुपये की मानदेय राशि पहले ही उनके खाते में भेजी जा चुकी है। अकादमी के कार्यकारी उप-चेयरमैन डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री और सदस्य सचिव मनजीत सिंह ने डॉ. खंडेलवाल को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किया। डॉ. खंडेलवाल स्वास्थ्य कारणों से 23 जुलाई को सूर्य कवि दादा लखमीचंद की 123वीं जयंती पर आयोजित राज्य स्तरीय साहित्यकार सम्मान समारोह में शामिल नहीं हो सके थे।
राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित हुए थे 80 से अधिक साहित्यकार
इस राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिंदी, पंजाबी, हरियाणवी, संस्कृत और उर्दू के 80 से अधिक साहित्यकारों को सम्मानित किया था। अकादमी ने यह तय किया है कि स्वास्थ्य या अन्य कारणों से समारोह में नहीं पहुंच पाने वाले साहित्यकारों को सम्मान से वंचित नहीं रखा जाएगा। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अकादमी के अधिकारी उनके निवास पर जाकर सम्मान देने की विशेष व्यवस्था कर रहे हैं।
लगभग 60 वर्षों से हिंदी साहित्य से जुड़े हैं डॉ. खंडेलवाल
डॉ. शिव कुमार खंडेलवाल करीब 60 वर्षों से हिंदी साहित्य से जुड़े हुए हैं। उनके लेखन में इतिहास, लोक संस्कृति, हरियाणवी भाषा और आम जनजीवन की बहुत सुंदर झलक मिलती है। कठिन ऐतिहासिक तथ्यों को बेहद सरल भाषा में प्रस्तुत करना उनके लेखन की एक बहुत बड़ी खासियत रही है।
साहित्यकारों का सम्मान केवल मंच तक सीमित नहीं: अकादमी
कार्यकारी उप-चेयरमैन डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि साहित्यकारों का सम्मान केवल किसी मंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अकादमी साहित्य और साहित्यकारों को सीधे आम लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। सदस्य सचिव मनजीत सिंह ने कहा कि साहित्यकारों के बहुमूल्य योगदान को जन-जन तक पहुंचाना अकादमी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हिंदी, हरियाणवी, पंजाबी, संस्कृत और उर्दू को समान मंच देने के साथ-साथ युवा और प्रतिभावान लेखकों को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।