हरियाणा में 1 नवंबर तक सभी एसएनसीयू बदलेंगे एमएनसीयू में, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। जिला अस्पतालों में विशेष बाल देखभाल केंद्र बनाए जाएंगे। चंडीगढ़ से 22 अगस्त को मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने 8 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य यानी एमसीएच विंग्स के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा है। इसके साथ ही 1 नवंबर तक सभी विशेष नवजात देखभाल इकाइयों यानी एसएनसीयू को मदर-न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स यानी एमएनसीयू में बदलने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की बैठक में लिए गए बड़े फैसले
डॉ. सुमिता मिश्रा ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम की राज्य स्वास्थ्य समिति की कार्यकारी समिति की 12वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को ये सभी आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में कहा कि माताओं और नवजात शिशुओं को इलाज के दौरान एक साथ रखा जाना चाहिए। महिला-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाना चाहिए। अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाया जाना चाहिए। रेफरल सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था की निगरानी और ट्रैकिंग को और अधिक तेज किया जाना चाहिए।
एसएनसीयू को एमएनसीयू में बदलने का प्रस्ताव और वर्तमान आंकड़े
इस बैठक का मुख्य बिंदु एसएनसीयू को एमएनसीयू में परिवर्तित करने का मुख्य प्रस्ताव था। यह नया मॉडल मातृ और नवजात शिशु की देखभाल को एक एकीकृत प्रणाली के तहत लेकर आएगा। इससे माताओं को अपने नवजात शिशुओं के विशेष इलाज के दौरान उनके बहुत करीब रहने का अवसर मिलेगा। हरियाणा राज्य में वर्तमान समय में कुल 29 एसएनसीयू, 62 नवजात स्थिरीकरण इकाइयां यानी एनबीएसयू और 527 नवजात देखभाल कोने यानी एनबीसीसी मौजूद हैं।
स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार और मातृ-शिशु मृत्यु दर में सुधार
डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस योजनाबद्ध रूपांतरण को 1 नवंबर तक पूरी तरह से पूरा किया जाए। इससे एक ऐसा देखभाल मॉडल मजबूत होगा जिसमें मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य और रिकवरी पर एक साथ पूरा ध्यान दिया जाता है। डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को 8 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग्स के निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इससे महिलाओं और बच्चों के लिए समर्पित बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार होगा। साथ ही एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की सरकारी अस्पतालों की क्षमता में भी भारी वृद्धि होगी। हरियाणा राज्य ने नामित एफआरयू की संख्या को 40 से बढ़ाकर अब 100 कर दिया है। राज्य ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतकों में भी काफी सुधार दर्ज किया है। इसमें मातृ मृत्यु दर यानी एमएसआर 127 से घटकर अब 94 हो गई है। इसके अलावा नवजात मृत्यु दर यानी एनएमआर भी 26 से घटकर अब 17 पर आ गई है। डॉ. मिश्रा ने यह भी जानकारी दी कि राज्य में कुल 38 विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की गई है। इन नए डॉक्टरों में बाल रोग, स्त्री रोग, मेडिसिन और एनेस्थीसिया जैसे प्रमुख विशेषज्ञ पूरी तरह से शामिल हैं।
जिला अस्पतालों में बनेंगे बाल देखभाल केंद्र
डॉ. सुमिता मिश्रा ने यह भी कड़े निर्देश दिए कि राज्य के सभी जिला अस्पतालों में विशेष बाल देखभाल केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इस विशेष कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों के भीतर महिलाओं के अनुकूल एक बेहतरीन माहौल तैयार करना है। यह विशेष रूप से उन महिला कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए है जिन्हें काम करने या फिर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने के दौरान अपने छोटे बच्चों की देखभाल करने की आवश्यकता होती है।