हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर स्टैंप ड्यूटी छूट में बेटी के बच्चों को भी शामिल किया

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर स्टैंप ड्यूटी छूट में बेटी के बच्चों को भी शामिल किया

प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने वाले परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। हरियाणा सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परिवार के भीतर अचल संपत्ति के जीवनकाल में ट्रांसफर पर मिलने वाली पूरी स्टैंप ड्यूटी छूट में बेटी के बच्चे यानी दोहता-दोहती और नाती-नातिन भी शामिल होंगे। सरकार ने ग्रांड चिल्ड्रन शब्द को पूरी तरह से परिभाषित कर दिया है।

राजस्व विभाग ने दूर की भाषा संबंधी अस्पष्टता

राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने साल 2014 के नोटिफिकेशन के हिंदी-वर्शन में लंबे समय से चली आ रही भाषा संबंधी अस्पष्टता को दूर किया है। इसके लिए एक औपचारिक सुधार जारी किया गया है।

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क्या था साल 2014 का मूल आदेश

16 जून 2014 को हरियाणा सरकार ने इंडियन स्टैंप एक्ट, 1899 की धारा 9 के तहत यह नियम बनाया था। मालिक के जीवनकाल में खून के रिश्तों जैसे माता-पिता, बच्चे, पोते-पोतियां, भाई-बहन और जीवनसाथी के पक्ष में किए गए प्रॉपर्टी ट्रांसफर डीड पर 100 प्रतिशत स्टैंप ड्यूटी माफ कर दी गई थी।

क्यों आ रही थी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में समस्या

मूल अंग्रेजी टेक्स्ट में व्यापक रूप से grandchildren शब्द का इस्तेमाल किया गया था। वहीं दूसरी और हिंदी नोटिफिकेशन में केवल पौत्र-पौत्री यानी बेटे के बच्चे का ही जिक्र किया गया था। इस गलत शब्दावली के कारण स्थानीय सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में भ्रम पैदा हो गया था। इसकी वजह से अक्सर बेटी के बच्चे जीरो-ड्यूटी के लाभ से पूरी तरह वंचित रह जाते थे।

गजट में प्रकाशित हुआ नया संशोधित सुधार

इस बड़ी समस्या को हल करने के लिए राजस्व विभाग ने 24 जुलाई 2026 को एक सुधार जारी किया था। इसके बाद इसे 13 जून 2026 की बजाय 13 अगस्त 2026 को हरियाणा सरकार के गजट में औपचारिक रूप से प्रकाशित कर दिया गया। संशोधित सुधार में अब ‘पौत्र-पौत्री’ वाक्यांश को पूरी तरह से बदल दिया गया है।

नागरिकों को मिलेगा कानूनी स्पष्टता का लाभ

अब इस वाक्यांश को बदलकर ‘पौत्र-पौत्री, दौहता-दोहती और नाती-नातिन’ कर दिया गया है। इससे स्टैंप ड्यूटी छूट के लिए बेटी के बेटे-बेटियों को स्पष्ट रूप से बेटे के बच्चों के बराबर का दर्जा मिल गया है। डॉ. मिश्रा ने यह बात कही कि मूल 2014 के आदेश में सुधार के तौर पर यह स्पष्टीकरण जारी करने से राज्य के सभी राजस्व और रजिस्ट्री ऑफिस में पिछली तारीख से कानूनी स्पष्टता पूरी तरह से सुनिश्चित होती है। इससे सभी नागरिक बिना किसी अनावश्यक टैक्स विवाद या प्रक्रियात्मक देरी के आसानी से अपनी बेटी के बच्चों को प्रॉपर्टी गिफ्ट या फिर ट्रांसफर कर सकेंगे।

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