हरियाणा सरकार ने सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी इको-सेंसिटिव ज़ोन के लिए मास्टर प्लान किया मंजूर

हरियाणा सरकार ने सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी इको-सेंसिटिव ज़ोन के लिए मास्टर प्लान किया मंजूर

हरियाणा सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी इको-सेंसिटिव ज़ोन यानी ईएसजेड के लिए ज़ोनल मास्टर प्लान नोटिफ़ाई कर दिया है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि सैंक्चुअरी की सीमा के आसपास 24.61 सक्वेयर किलोमीटर के बफऱ में क्या रेगुलेट किया जा सकता है। इसमें यह भी साफ हो गया है कि क्या नहीं किया जा सकता और क्या किया जाना चाहिए। यह क्षेत्र 10 गांवों और पंचकूला शहर के कुछ हिस्सों को छूता है। राज्य के पर्यावरण, वन और वाइल्डलाइफ़ डिपार्टमेंट द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।

मास्टर प्लान में नए कंस्ट्रक्शन पर रोक

मास्टर प्लान ने सैंक्चुअरी के कैचमेंट एरिया में किसी भी तरह के नए कंस्ट्रक्शन पर रोक लगा दी है। इस रोक में कमर्शियल होटल और रिज़ॉर्ट भी शामिल हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों को राहत दी गई है। स्थानीय निवासियों को अपनी रहने की ज़रूरतों को पूरा करने की पूरी छूट होगी। वे बिल्डिंग बायलॉज़ के अनुसार अपनी ज़मीन पर रहने के इस्तेमाल के लिए कंस्ट्रक्शन करने की इजाज़त पा सकेंगे।

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हाई-राइज़ स्ट्रक्चर पर प्रतिबंध और मौजूदा प्लान

इकोलॉजिकल इंटीग्रिटी बनाए रखने के लिए ईएसजेड के अंदर हाई-राइज़ ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी की इजाज़त नहीं होगी। इसके अलावा किसी भी दूसरे बड़े हाई-राइज़ स्ट्रक्चर पर भी रोक रहेगी। अधिसूचना के अनुसार सभी मौजूदा अप्रूव्ड डेवलपमेंट प्लान बिना किसी रुकावट के चलते रहेंगे। पंचकूला शहर में मनसा देवी कॉम्प्लेक्स के पहले से अप्रूव्ड प्लानिंग फ्रेमवर्क का सख्ती से पालन किया जाएगा। मंज़ूर प्लान से कोई भी ऐसा बदलाव जो ईएसजेड नोटिफिकेशन से अलग हो, उसकी इजाज़त नहीं दी जाएगी। एमडीसी के अप्रूव्ड लेआउट एरिया का कुल 194.9 एकड़ हिस्सा इसके दायरे में आता है। इसके अलावा इसके डेवलपमेंट प्लान एरिया का 283 एकड़ हिस्सा एक किलोमीटर के ईएसजेड बफर में आता है।

कमर्शियल गतिविधियों और पेड़ों की कटाई पर पाबंदी

कमर्शियल माइनिंग, पत्थर की खदान और पत्थर क्रशिंग यूनिट पर पूरी रोक लगा दी गई है। नई आरा मिलें और प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री भी इस दायरे में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी। ईएसजेड में ग्राउंडवाटर समेत प्राकृतिक पानी के सोर्स का कमर्शियल इस्तेमाल मना होगा। पानी को खराब होने या प्रदूषण से बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। फर्मों, कॉर्पोरेशन और कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर कमर्शियल पशुधन बनाने पर रोक है। पोल्ट्री फार्म बनाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ईएसजेड एरिया में जंगल की ज़मीन पर बिना अनुमति पेड़ नहीं काटे जा सकेंगे। सरकारी, रेवेन्यू या प्राइवेट ज़मीन पर भी प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स की पहले से इजाज़त लेनी होगी। इसके बिना पेड़ नहीं काटे जा सकेंगे। इसके बजाय, नई टूरिज्म और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी को ज़ोनल प्लान के हिसाब से होना चाहिए। यह सब टूरिज्म मास्टर प्लान के नियमों के तहत ही किया जाना चाहिए।

इको-फ्रेंडली गतिविधियों को बढ़ावा और जिम्मेदारी

मास्टर प्लान लोकल कम्युनिटी द्वारा इको-फ्रेंडली खेती को बढ़ावा देता है। इसमें बागवानी, डेयरी और मछली पालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही रेनवाटर हार्वेस्टिंग और रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने पर जोर दिया जाएगा। ऑर्गेनिक खेती, एग्रोफॉरेस्ट्री और गांव के कारीगरों द्वारा कॉटेज इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलेगा। ईएसजेड में मास्टर प्लान के नियमों के उल्लंघन पर नजर रखने की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। इसका संज्ञान लेने की मुख्य जिम्मेदारी सक्षम डिस्ट्रिक्ट-लेवल अथॉरिटी की होगी। इसे पूरी तरह लागू करने और मॉनिटर करने की ज़िम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट मॉनिटरिंग कमेटी की होगी।

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