शिक्षक दिवस पर हरियाणा में 79 शिक्षक राज्य स्तर पर सम्मानित, राज्यपाल और मुख्यमंत्री रहे मौजूद

शिक्षक दिवस पर हरियाणा में 79 शिक्षक राज्य स्तर पर सम्मानित, राज्यपाल और मुख्यमंत्री रहे मौजूद

शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर हरियाणा के पंचकूला में एक भव्य राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट और असाधारण योगदान देने वाले 79 शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा गया।

इस राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सभी 79 शिक्षकों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले प्रत्येक शिक्षक को एक-एक लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की गई। इसके अलावा शिक्षकों को पदक, शॉल और दो-दो अग्रिम वेतन वृद्धि भी दी गई।

इस अवसर पर हरियाणा की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह के दौरान अतिथियों ने शिक्षकों की मेहनत और उनके योगदान की सराहना की।

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राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष का संबोधन

समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सभी सम्मानित शिक्षकों को अपनी ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत उपलब्धि का सम्मान नहीं है। यह पूरे शिक्षक समुदाय, शिक्षा व्यवस्था और हरियाणा के उज्ज्वल भविष्य का सम्मान है।

राज्यपाल ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन इस बात का एक बड़ा प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने बताया कि शिक्षण केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि यह समाज निर्माण का एक बहुत ही सशक्त माध्यम है। शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को बधाई देने का दिन नहीं है। यह शिक्षा के महत्व को स्वीकार करने और शिक्षकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का भी दिन है।

तकनीक और शिक्षक की भूमिका

राज्यपाल ने आज के बदलते दौर का जिक्र करते हुए कहा कि आज शिक्षा की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थी कुछ ही पलों में दुनिया भर की जानकारी हासिल कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जानकारी और ज्ञान में अंतर होता है तथा ज्ञान और विवेक में भी अंतर होता है।

उन्होंने कहा कि तकनीक सिर्फ सूचना दे सकती है, लेकिन शिक्षक हमेशा विवेक प्रदान करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपको उत्तर दे सकती है, लेकिन एक शिक्षक ही सही प्रश्न पूछना सिखाता है। तकनीक के इस आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका जरा भी कम नहीं हुई है, बल्कि शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

शिक्षा का उद्देश्य अच्छा इंसान बनाना

राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि आज के शिक्षक का दायित्व केवल अपना पाठ्यक्रम पूरा करना और परीक्षा परिणाम देना नहीं है। शिक्षक को ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों के चरित्र का भी निर्माण करना चाहिए। शिक्षक को विद्यार्थियों के अंदर अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को विकसित करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है कि कोई भी बच्चा अपनी आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा की दौड़ में पीछे न छूट जाए। विशेष रूप से बेटियों को समान अवसर प्रदान करना और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना हम सभी की एक सामूहिक जिम्मेदारी है।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल यह तय करना नहीं होना चाहिए कि बच्चा भविष्य में क्या बनेगा। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह आगे चलकर कैसा मनुष्य बनेगा। हमें समाज के लिए ऐसे डॉक्टर चाहिए जिनमें सेवा की भावना हो। ऐसे वैज्ञानिक चाहिए जो मानवता के हित में कार्य करें। ऐसे अधिकारी चाहिए जो न्याय और संवेदनशीलता के साथ अपने निर्णय लें। ऐसे उद्यमी चाहिए जो रोजगार के नए अवसर पैदा करें और ऐसे नागरिक चाहिए जो देश एवं समाज के प्रति पूरी तरह जिम्मेदार हों।

जीवन के लिए तैयार करें विद्यार्थी

राज्यपाल ने सभी शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे विद्यार्थियों को केवल परीक्षाओं के लिए तैयार न करें, बल्कि उन्हें सीधे जीवन की वास्तविकताओं के लिए तैयार करें। उन्हें केवल नौकरी प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी बनने के लिए तैयार करना चाहिए। उन्हें केवल रटे-रटाए उत्तर न दें, बल्कि नए प्रश्न पूछना भी सिखाएं।

उन्होंने समझाया कि प्रश्न पूछने वाला विद्यार्थी ही भविष्य का एक अच्छा शोधकर्ता और नवप्रवर्तक यानी इनोवेटर बनता है।

2047 के विकसित भारत की नींव

वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत की मजबूत नींव आज की कक्षाओं में ही रखी जा रही है। आज किसी भी विद्यालय में पढ़ने वाला साधारण बच्चा कल को एक बड़ा वैज्ञानिक बन सकता है। कोई बेटी देश की महान प्रशासक बन सकती है।

कोई भी विद्यार्थी एक अच्छा खिलाड़ी, चिकित्सक या शिक्षक बनकर देश की सेवा कर सकता है। भविष्य की उस मजबूत नींव को आज एक शिक्षक ही तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य जितना संसद में आकार लेता है, उतना ही वह विद्यालय की कक्षाओं में भी आकार लेता है और उस भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण वास्तुकार केवल एक शिक्षक होता है।

सम्मान एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत

राज्यपाल ने विशेष रूप से सभी सम्मानित होने वाले शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनकी इस यात्रा का अंत नहीं है। यह पुरस्कार उनकी यात्रा की एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। आज राज्य सरकार ने उनके उत्कृष्ट कार्यों को सही पहचान दी है।

अब उनकी यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे अपने लंबे अनुभव को अन्य शिक्षकों के साथ साझा करें। वे नई पीढ़ी के शिक्षकों का सही मार्गदर्शन करें। वे अपने विद्यालयों को और अधिक बेहतर बनाने में अपना पूरा योगदान दें और विद्यार्थियों में उत्कृष्टता के साथ-साथ अच्छे मानवीय मूल्यों का भी विकास करें।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री विजय सिंह दहिया, राज्यपाल के सचिव श्री विजयकुमार भाविकट्टी, माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक श्री जितेंद्र कुमार, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक श्रीमती मनीता मलिक, उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा, पंचकूला के महापौर श्री श्याम लाल बंसल और जिला भाजपा अध्यक्ष श्री अजय मित्तल सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

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