हरियाणा विधानसभा: 7255 करोड़ अनुपूरक बजट आज

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को राज्य सरकार वर्ष 2026-27 की पहली अनुपूरक बजट मांगें सदन में रखेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वित्त मंत्री के तौर पर कुल 7,255.42 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बजट मांगें पेश करेंगे। सरकार के प्रस्ताव में राजस्व खर्च के लिए 5,440.45 करोड़ और पूंजीगत खर्च के लिए 1,814.97 करोड़ रुपये शामिल हैं।
हरियाणा सरकार के घाटे और कर्ज में जाने के मुख्य कारण:
- कर्ज का ब्याज (Committed Obligations): राज्य की अपनी कर-आय का बड़ा हिस्सा पुराने कर्जों का ब्याज और पेंशन चुकाने में खर्च हो जाता है, जिससे नए राजस्व कार्यों के लिए पैसे कम पड़ते हैं।
- सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाएं: बिजली सब्सिडी, कृषि प्रोत्साहन, और व्यापक सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के कारण राजस्व व्यय लगातार बढ़ा है।
- पूंजीगत विकास की जरूरतें: बुनियादी ढांचे (सड़कें, मेट्रो, औद्योगिक पार्क) को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए सरकार को बाजार से अतिरिक्त ऋण (Borrowings) उठाना पड़ता है।
चंडीगढ़ /30 अगस्त 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र अपने दूसरे कामकाजी दिन में प्रवेश कर रहा है। सोमवार दोपहर दो बजे से शुरू होने वाली कार्यवाही में सरकार वर्ष 2026-27 की पहली अनुपूरक बजट मांगें सदन के पटल पर रखेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वित्त मंत्री के रूप में 7,255.42 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बजट मांगें प्रस्तुत करेंगे। इनमें 5,440.45 करोड़ रुपये राजस्व व्यय तथा 1,814.97 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए प्रस्तावित हैं। अनुपूरक बजट की यह पेशकश मात्र वित्तीय औपचारिकता नहीं, बल्कि राज्य की विकास प्राथमिकताओं और प्रशासनिक जरूरतों का प्रतिबिंब है।
सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल और शून्यकाल से आरंभ होगी। इसके पश्चात कांग्रेस के सत्रह विधायक हरियाणा कौशल रोजगार निगम में संविदा भर्ती को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। वे कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाएंगे। इस राजनीतिक घमासान के बाद ही मुख्यमंत्री अनुपूरक बजट मांगें पेश करेंगे। मांगों पर चर्चा के उपरांत मतदान होगा। यह क्रम दर्शाता है कि सत्र में वित्तीय और राजनीतिक दोनों एजेंडे एक साथ चल रहे हैं।
सरकार ने कुल पंद्रह विभागों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया है। ऊर्जा, उद्योग एवं वाणिज्य, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम तथा सिंचाई विभागों के लिए 1,441.54 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसमें 1,341.53 करोड़ रुपये राजस्व और मात्र 100.01 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के हैं। ये विभाग प्रदेश की आर्थिक रीढ़ और कृषि व्यवस्था से सीधे जुड़े हैं। ऊर्जा और सिंचाई में निवेश दीर्घकालिक विकास की नींव रखता है, जबकि उद्योग क्षेत्र रोजगार सृजन का माध्यम बन सकता है।
शहरी और ग्रामीण विकास पर सबसे अधिक बल दिया गया है। शहरी विकास, नगर निकाय, पंचायत, ग्रामीण विकास तथा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी से जुड़े विभागों के लिए कुल 1,797.08 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। इसमें 1,356.74 करोड़ रुपये राजस्व और 440.34 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के रूप में रखे गए हैं। नगर नियोजन, शहरी सुविधाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे पर यह राशि खर्च की जानी है। यह प्रावधान इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार शहर और गांव दोनों की बुनियादी जरूरतों को एक साथ संबोधित करना चाहती है।
वित्त विभाग के लिए 1,005.03 करोड़ रुपये की मांग रखी गई है। यह राशि वित्त, ऋण नियंत्रण, आपूर्ति और सांख्यिकी से जुड़े अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए है। सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामलों से जुड़े विभागों के लिए 1,104.25 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इनमें 904.25 करोड़ रुपये राजस्व और 200 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के हैं। खाद्य सुरक्षा और सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने का यह प्रयास आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ा है।
गृह, जेल और न्याय प्रशासन से संबंधित विभागों के लिए 665.18 करोड़ रुपये की मांग है। इसमें 323.67 करोड़ रुपये राजस्व और 341.51 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के रूप में हैं। गृह रक्षक, नागरिक सुरक्षा, जेल, उच्च न्यायालय, अभियोजन और कानूनी सेवाओं पर यह राशि खर्च होगी। कानून व्यवस्था और न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का यह प्रावधान शासन की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।
लोक निर्माण, परिवहन और नागरिक विमानन के लिए 882.18 करोड़ रुपये, कृषि एवं संबंधित विभागों के लिए 110.48 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य के लिए 176.57 करोड़ रुपये तथा शिक्षा व महिला एवं बाल विकास के लिए 40.53 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। खेल, विरासत और पर्यटन के लिए 10 करोड़ रुपये, श्रम एवं कौशल विकास के लिए 9.01 करोड़ रुपये तथा सामाजिक न्याय एवं कल्याण विभाग के लिए 12.86 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांग रखी गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार ने विकास के विभिन्न आयामों को छुआ है, यद्यपि कुछ क्षेत्रों में राशि अपेक्षाकृत सीमित है।
अनुपूरक बजट के साथ-साथ सरकार सदन में नौ नए विधेयक भी पेश करेगी। इनमें हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, हरियाणा स्थानीय लेखा परीक्षा विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, हरियाणा राज्य महिला आयोग संशोधन विधेयक, माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक, हरियाणा पंचायती राज संशोधन विधेयक तथा हरियाणा राज्य फिजियोथेरेपी परिषद निरसन विधेयक प्रमुख हैं। शामलात भूमि और विधि अधिकारियों से संबंधित संशोधन विधेयक भी रखे जाएंगे। अग्निशमन कानून में बदलाव तथा शहरी विकास के पुराने प्रावधानों को हटाने वाले संशोधित विधेयक भी पेश होंगे। ये विधेयक प्रशासनिक सुधार और सामाजिक न्याय की दिशा में कदम माने जा सकते हैं।
चार विधेयकों पर सदन में विचार कर उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया आरंभ होगी। इनमें हरियाणा न्यायालय संशोधन विधेयक, हरियाणा नगरपालिका संशोधन विधेयक, हरियाणा नगर निगम संशोधन विधेयक तथा बाबा खाटू श्याम चुलकाना धाम तीर्थ विधेयक शामिल हैं। इन विधेयकों का पारित होना स्थानीय शासन और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों के प्रबंधन को प्रभावित करेगा।
सरकार जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को हरियाणा में लागू करने का प्रस्ताव भी रखेगी। इसके अंतर्गत छोटे जल प्रदूषण अपराधों को आपराधिक श्रेणी से बाहर करने और दंड व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाने का प्रावधान है। पर्यावरण संरक्षण के साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का यह प्रयास उल्लेखनीय है।
मानसून सत्र 27 अगस्त से आरंभ हुआ था। पहले दिन कानून व्यवस्था के मुद्दे पर हंगामा हुआ और कुछ कांग्रेस विधायकों को निलंबित किया गया। आज का दिन अपेक्षाकृत कामकाजी रहने की संभावना है। अनुपूरक बजट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वित्तीय वर्ष के मध्य में नई जरूरतें उभरती हैं। बाढ़, योजनाओं का विस्तार या प्रशासनिक दबाव के कारण अतिरिक्त संसाधनों की मांग उत्पन्न होती है। सरकार इन मांगों को पूरा कर विकास कार्यों में निरंतरता बनाए रखना चाहती है।
शहरी विकास पर अधिक राशि का आवंटन शहरों की बढ़ती आबादी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को स्वीकार करता है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज को मजबूत करने से स्थानीय स्वशासन को बल मिलेगा। ऊर्जा और सिंचाई क्षेत्र में निवेश कृषि उत्पादकता और औद्योगिक विकास दोनों को प्रभावित कर सकता है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम राशि दी गई है, जो भविष्य में चर्चा का विषय बन सकती है।
कांग्रेस का ध्यानाकर्षण प्रस्ताव हरियाणा कौशल रोजगार निगम में संविदा भर्ती की पारदर्शिता पर केंद्रित है। यह मुद्दा पहले भी उठ चुका है। संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। सरकार को इन आरोपों का स्पष्ट जवाब देना होगा। सदन में दोनों पक्षों के तर्क-वितर्क से मुद्दे की गंभीरता सामने आएगी।
अनुपूरक बजट मात्र आंकड़ों का खेल नहीं है। यह दर्शाता है कि सरकार किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है। पूंजीगत व्यय दीर्घकालिक परिसंपत्तियां बनाता है, जबकि राजस्व व्यय वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है। दोनों का संतुलन बनाए रखना वित्तीय अनुशासन की मांग है। पंद्रह विभागों में राशि का वितरण विकास के बहुआयामी दृष्टिकोण को प्रकट करता है।
नए विधेयक प्रशासनिक सुधार की दिशा में हैं। अल्पसंख्यक और महिला आयोग जैसे संस्थानों को मजबूत करना सामाजिक समावेशन की दिशा में कदम है। पंचायती राज और नगर निकायों संबंधी संशोधन स्थानीय शासन को प्रभावी बनाएंगे। न्यायालय संशोधन न्याय व्यवस्था में सुधार की संभावना रखता है। जल प्रदूषण संबंधी बदलाव पर्यावरणीय दायित्व और व्यावहारिकता का मिश्रण प्रस्तुत करते हैं।
हरियाणा सरकार के कुल बजट दायरा, आय के स्रोतों (राजस्व), विभिन्न मदों पर होने वाले खर्च और राज्य के ऊपर बढ़ते वित्तीय घाटे तथा कर्ज के मुख्य कारणों का विस्तृत खाका नीचे दी गई तालिका में समझाया गया है:
| श्रेणी (Category) | विवरण और आंकड़े (प्रतिवर्ष/अनुमानित) | मुख्य कारण / विश्लेषण |
|---|---|---|
| 1. सरकार की आय (Revenue Receipts) | कुल आय: ~₹1.46 लाख करोड़ • राज्य के अपने कर (SGST, VAT, स्टाम्प ड्यूटी, आबकारी): ~₹1.04 लाख करोड़ • गैर-कर राजस्व (Non-Tax): ~₹10,870 करोड़ • केंद्र से हिस्सा और अनुदान (Grants & Tax Share): ~₹30,653 करोड़ | आय का मुख्य स्रोत राज्य का अपना टैक्स (GST, शराब पर एक्साइज, जमीन रजिस्ट्री फीस, व्हीकल टैक्स) है। |
| 2. जन कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च | कुल बजटीय खर्च: ~₹1.87 लाख करोड़ • शिक्षा, खेल और युवा कार्य: ~₹23,603 करोड़ • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण: ~₹14,007 करोड़ • सामाजिक कल्याण व पेंशन योजनाएं: ~₹17,250 करोड़ • कृषि, सिंचाई एवं ग्रामीण विकास: ~₹15,000+ करोड़ | जनता को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन (बुढ़ापा, विधवा पेंशन), सब्सिडी, मुफ्त राशन, सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, double desk योजना, और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे पर बड़ा खर्च होता है। |
| 3. प्रशासनिक एवं अधिकारियों/नेताओं पर खर्च (Committed Expenditure) | वेतन और प्रशासनिक खर्च: • सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों का वेतन: ~₹35,000+ करोड़ (राजस्व का ~24%) • पूर्व कर्मचारियों/नेताओं की पेंशन: ~₹17,500+ करोड़ (राजस्व का ~12%) • प्रशासनिक सेवाएं, सुरक्षा व न्याय व्यवस्था: ~₹10,000+ करोड़ | प्रशासनिक अमले के वेतन, भत्ते, गाड़ियों, सरकारी दफ्तरों के संचालन तथा वीआईपी सुरक्षा पर भारी राशि खर्च होती है। |
| 4. पुराने कर्ज का ब्याज और पुनर्भुगतान (Debt Servicing - घाटे का बड़ा कारण) | कर्ज भुगतान: ~₹65,000 से ₹71,000 करोड़ • केवल ब्याज भुगतान (Interest): ~₹29,266 करोड़ (राजस्व का ~20%) • मूलधन की अदायगी (Principal Repayment): ~₹36,101 करोड़ | राज्य के कुल बजट का लगभग 30% हिस्सा केवल पुराने कर्ज और उसके ब्याज को चुकाने में चला जाता है, जो वित्तीय स्थिति पर सबसे बड़ा बोझ है। |
| 5. विकास कार्य (Capital Expenditure) | पूंजीगत व्यय: ~₹21,757 करोड़ • नई सड़कें, फ्लाईओवर, मेट्रो विस्तार, नए अस्पताल व स्कूल भवन | नए ढांचागत निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए यह बजट इस्तेमाल होता है। |
| 6. वित्तीय घाटा और बढ़ता कर्ज (Fiscal Deficit & Debt) | राजकोषीय घाटा: ~₹40,293 करोड़ (GSDP का ~2.7%) • राज्य पर कुल कर्ज का अनुमान: राज्य के कुल उत्पादन (GSDP) का लगभग 25% से 30% | सरकार की कुल आय (Receipts) उसके कुल खर्च (Expenditure) से कम रहती है, जिसके कारण सरकार को हर साल अतिरिक्त कर्ज (Net Borrowings) लेना पड़ता है। |
सत्र की अवधि सीमित होने के कारण समय का सदुपयोग आवश्यक है। आज का एजेंडा स्पष्ट है—प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अनुपूरक बजट और विधेयक। यदि कार्यवाही सुचारू रही तो महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। सदन लोकतंत्र का मंच है, जहां वित्तीय प्रस्ताव और राजनीतिक मुद्दे दोनों पर चर्चा होती है।
हरियाणा की जनता इन फैसलों की प्रतीक्षा कर रही है। अनुपूरक बजट पास होने से विभागों को संसाधन मिलेंगे और विकास कार्यों को गति मिलेगी। विधेयक पारित होने से कानूनी ढांचा अद्यतन होगा। विपक्ष के मुद्दे भी सुने जाएंगे। यह संतुलन ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की विशेषता है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा बजट पेश करना इस बात का संकेत है कि वित्त संबंधी मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विभागवार विवरण देने के बाद चर्चा का दौर चलेगा। विधायक सुझाव देंगे और सरकार जवाब देगी। अंततः मतदान से फैसला होगा।
यह अनुपूरक बजट राज्य की वर्तमान जरूरतों और भविष्य की आकांक्षाओं के बीच सेतु का कार्य कर सकता है। शहरी-ग्रामीण विकास, ऊर्जा, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक न्याय—सभी क्षेत्रों को छुआ गया है। कितनी राशि कितने प्रभावी ढंग से खर्च होती है, यह भविष्य में स्पष्ट होगा। फिलहाल सदन में चर्चा और मतदान ही निर्णायक चरण है।
सोमवार दोपहर दो बजे से शुरू होने वाली कार्यवाही हरियाणा के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करेगी। अनुपूरक बजट की स्वीकृति विकास की निरंतरता सुनिश्चित करेगी, जबकि विधेयक और विपक्षी मुद्दे लोकतांत्रिक संवाद को बनाए रखेंगे। सदन की कार्यवाही पर समस्त प्रदेश की दृष्टि टिकी रहेगी।