सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा के तर्क पर शांत हुआ विपक्ष, हरियाणा विधानसभा में शुरू हुआ प्रश्नकाल

चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामेदार रहा। पहले दिन मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन में प्रश्नकाल की कार्यवाही बिल्कुल नहीं चल सकी थी। इसके बाद विपक्ष ने सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी सदन के अंदर जमकर हंगामा किया। 27 अगस्त के दिन स्पीकर की तरफ से प्रश्नकाल के लिए कुल 20 सवालों को सूचीबद्ध किया गया था। लेकिन कांग्रेस पार्टी के भारी हंगामे के कारण सभी विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल सदन के पटल पर नहीं उठा सके थे।
बिल्कुल ऐसी ही व्यवधान वाली स्थिति सोमवार को भी सदन के अंदर देखने को मिली। हंगामे के इस माहौल के बीच स्पीकर हरविंद्र कल्याण से अनुमति लेकर प्रदेश के सहकारिता एवं जेल मंत्री अरविंद शर्मा अपनी सीट पर खड़े हुए। मंत्री अरविंद शर्मा ने सदन में बोलते हुए कहा कि हल्ला मचाने वाले कई विधायक ऐसे हैं जो छह-छह बार चुनकर सदन में आए हैं। इसके बावजूद ये सभी विधायक नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सदन में प्रश्नकाल बेहद महत्वपूर्ण होता है।
सहकारिता मंत्री का बयान और विपक्ष की प्रतिक्रिया
अरविंद शर्मा ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर चर्चा हमेशा प्रश्नकाल के बाद की जाती है। कभी भी प्रश्नकाल की कार्यवाही को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद सत्र के दौरान 20 सवाल सदन में उठाए नहीं जा सके थे। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि आज के दिन भी सदन में कुल 20 प्रश्न लगे हुए हैं। अरविंद शर्मा ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विपक्ष के विधायक हर बार मेरे अधिकार का बार-बार हवाला दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बार-बार दिए जा रहे हवाले का वर्तमान में कोई भी औचित्य नहीं है।
जनता का अधिकार और लोकतांत्रिक मर्यादाएं
अरविंद शर्मा ने जोर देकर कहा कि आम जनता का अधिकार हमेशा सबसे ऊपर होता है। सहकारिता मंत्री के इस स्पष्ट तर्क पर ट्रेजरी बैंचों के सभी सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनका खुलकर समर्थन किया। शर्मा ने सदन को बताया कि आज सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और बिजली जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विधायकों के सवाल लगे हुए हैं। उन्होंने विपक्ष को समझाया कि विपक्ष अपने सभी जरूरी मुद्दे प्रश्नकाल के तुरंत बाद उठा सकता है। लेकिन इस तरह से प्रश्नकाल की कार्यवाही को बाधित करना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन करना है। सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा के इन मजबूत तर्कों को सुनने के बाद विपक्ष के सभी विधायक अपनी-अपनी सीटों पर शांति से बैठ गए और फिर जाकर प्रश्नकाल की कार्यवाही विधिवत रूप से शुरू हो पाई।