सदन और विधान परिसर की मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी : हरविन्द्र कल्याण

सदन और विधान परिसर की मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी : हरविन्द्र कल्याण

चंडीगढ़ में मानसून सत्र के दौरान हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने एक महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि विधान सभा के नियमों, परंपराओं और गरिमा के अनुरूप सदन एवं विधान परिसर में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी सदस्यों से यह अपील की है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध करने के अधिकार का प्रयोग करते हुए सदन की मर्यादा तथा स्थापित नियमों का भी पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए।

विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने सत्र के पहले दिन वीरवार को विधान परिसर में कुछ विपक्षी विधायकों द्वारा किए गए रोष प्रदर्शन के संदर्भ में यह स्पष्ट किया है कि हरियाणा विधान सभा के कर्मचारी तथा सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग कर रही विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी निर्धारित ड्यूटी के अनुसार ही कार्य किया है। उन्होंने यह जानकारी दी कि प्रत्येक सत्र से पूर्व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक आयोजित की जाती है। इस बैठक में सदन की सुरक्षा, अनुशासन और डेकोरम बनाए रखने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाती है।

उन्होंने कहा कि इस बार आयोजित सुरक्षा बैठक में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा की गई थी कि मानसून सत्र के दौरान विधान सभा परिसर और सदन में अनुशासन तथा सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी ढंग से बनाए रखा जाए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी तरह से नियमों के अनुसार करें। विधान सभा के कर्मचारियों और सुरक्षा में सेवारत कर्मचारियों ने बिल्कुल वैसा ही कार्य किया है।

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विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना और अपनी बात रखना सभी का अधिकार है तथा किसी को भी इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि विभिन्न माध्यमों के जरिए अपनी बात जनता के समक्ष रखते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विधान सभा के भीतर विरोध सांकेतिक और मर्यादित होना चाहिए ताकि जनहित और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर होने वाली चर्चा किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विधान सभा के नियमों में यह पूरी तरह से निर्धारित है कि प्रदर्शन अथवा किसी अन्य गतिविधि के दौरान किन वस्तुओं को परिसर के किस हिस्से तक ले जाया जा सकता है और किन्हें नहीं। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा अथवा व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी स्थान पर किसी वस्तु को आगे ले जाने से रोका जाता है, तो यह संबंधित कर्मचारियों द्वारा केवल अपनी ड्यूटी का निर्वहन होता है।

विस अध्यक्ष ने उदाहरण देते हुए कहा कि हम जब एयरपोर्ट पर जाते हैं, तो वहां भी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए चेकिंग आदि में पूरा सहयोग करते हैं। विधान सभा परिसर में सुरक्षा और अनुशासन के नियमों का पालन उसी प्रकार से आवश्यक है, जैसे अन्य सार्वजनिक एवं संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा जांच के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी नियम का उद्देश्य किसी के अधिकारों को सीमित करना बिल्कुल नहीं होता, बल्कि सभी की सुरक्षा और व्यवस्था को सुनिश्चित करना होता है।

उन्होंने सुरक्षा बैठक के दौरान हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि विगत वर्षों में विधान परिसर में विभिन्न अवसरों पर ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनके मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और परिसर की मर्यादा बनाए रखने के लिए सभी को अधिक सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समय पंजाब की तरफ से कुछ लोग आ गए थे। इसी वर्ष 27 अप्रैल में आयोजित स्पेशल सत्र के दौरान बाहर एक मॉक एसेंबली का आयोजन किया गया था, जो कि अलाउड नहीं होता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बैठक में इन सभी विषयों पर चर्चा के बाद यह तय हुआ कि विधान सभा परिसर की सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक न हो तथा यहां की गरिमा और डेकोरम पूरी तरह से बनाए रखा जाए।

विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि विधान सभा का मूल उद्देश्य प्रदेश और जनता से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा करना है। अनावश्यक शोर-शराबे अथवा ऐसे मुद्दों को हावी नहीं होने देना चाहिए, जिनसे जनहित के महत्वपूर्ण विषय पीछे छूट जाएं। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने मतभेदों और विरोध के बावजूद सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में पूरा सहयोग करें, ताकि प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर पर्याप्त चर्चा हो सके।

विस अध्यक्ष ने अंत में कहा कि प्रदेश की जनता ने अपने प्रतिनिधियों को सदन में अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं रखने के लिए भेजा है। इसलिए सभी सदस्यों की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि सदन के समय का अधिकतम उपयोग जनहित के विषयों पर सार्थक और रचनात्मक चर्चा के लिए किया जाए।

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