हिसार में एचएयू की रबी सीजन के लिए 21 नई सिफारिशें मंजूर, खेती की तस्वीर बदलेगी

हिसार में आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के लिए नई तकनीकों का पूरा लाभ मिलेगा। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला रबी-2026 में वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों के बीच गहरा मंथन किया गया। इस मंथन के बाद विभिन्न फसलों से जुड़ी 21 नई सिफारिशों को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। इन नई सिफारिशों में गेहूं, सरसों, गन्ना, राया, जई और अन्य फसलों की बेहतर पैदावार के लिए बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन, कतार दूरी और सिंचाई से जुड़ी विशेष तकनीकें शामिल हैं।
कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज के निर्देश
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि इन सिफारिशों का वास्तविक लाभ किसानों को तभी मिल पाएगा जब इन नई तकनीकों को समय पर किसानों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिए कि वे स्वीकृत सभी सिफारिशों का खेत स्तर तक व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। उन्होंने आगे कहा कि कृषि अधिकारियों के माध्यम से मिलने वाला किसानों की समस्याओं का फीडबैक भविष्य में शोध और नई तकनीक विकसित करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य में इस फीडबैक तंत्र को डिजिटल माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
विस्तार शिक्षा निदेशक और अतिरिक्त निदेशक के बयान
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यशाला के दौरान कुल छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए थे। इन सत्रों में गेहूं एवं जौ, गन्ना-मक्का, दलहनी एवं चारा फसलें, तिलहन, एग्रोफोरेस्ट्री और शुष्क खेती जैसे विषयों पर देश और क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। वहीं दूसरी ओर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप सिंहाग ने कहा कि इन सभी नई सिफारिशों को बहुत जल्द किसानों तक पहुंचाया जाएगा ताकि आगामी रबी सीजन में किसानों को इसका पूरा लाभ मिल सके।
सरसों की हाइब्रिड किस्म और खारे पानी के प्रबंधन से जुड़े सुझाव
इस कार्यशाला के दौरान हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की पहली हाइब्रिड सरसों किस्म आरएचएच 2101 को सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए विशेष रूप से अनुशंसित किया गया। यह खास किस्म लगभग 135 से 142 दिन के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ करीब 11.5 से 12 क्विंटल तक की शानदार उपज देने में पूरी तरह सक्षम है। इसके साथ ही गन्ने की सीओएच 179 किस्म को बसंतकालीन बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है जिसकी औसत उपज 450 क्विंटल प्रति एकड़ आंकी गई है।
लवणीय सिंचाई जल और उर्वरक प्रबंधन की तकनीकें
गेहूं की फसल में 6 से 7 डेसीसीमेंस प्रति मीटर विद्युत चालकता वाले लवणीय सिंचाई जल की कठिन स्थिति में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन करने की सिफारिश की गई है। इसके अंतर्गत किसानों को बीज उपचार के साथ-साथ गोबर की खाद और 75 प्रतिशत अनुशंसित उर्वरक मात्रा का ही प्रयोग करने की सलाह दी गई है। ऐसा करने से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और किसान बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा सरसों की फसल में डीएपी के साथ जिप्सम के एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर 12 किलोग्राम बेंटोनाइट सल्फर प्रति एकड़ इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है।
चारा फसलों और भूजल मानचित्र से जुड़ी महत्वपूर्ण सिफारिशें
चारा फसल जई में एचएयू एनपीके बायोफर्टिलाइजर से बीज उपचार करने तथा गेहूं की फसल में एचएयू एजोटिका प्लस-ई का उपयोग करने की जोरदार सिफारिश की गई है। बसंतकालीन गन्ने की खेती के लिए 90 सेंटीमीटर की कतार दूरी रखने और 30 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ बीज दर अपनाने की बेहद उपयोगी सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त हरियाणा के भूजल गुणवत्ता मानचित्र के संशोधन और अद्यतनीकरण की सिफारिश भी की गई है ताकि भूमिगत खारे पानी के उचित उपयोग और उसके बेहतर प्रबंधन को अधिक बढ़ावा मिल सके। अंत में सिंचित राया में 45 सेंटीमीटर कतार दूरी रखने तथा राया और सरसों दोनों के लिए एक किलोग्राम प्रति एकड़ बीज दर रखने की सिफारिश भी कार्यशाला में की गई।