हिसार: अब उत्तराखंड में लहलहाएगी एचएयू में विकसित सरसों की उन्नत किस्में, हुआ समझौता

हिसार के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की जा रही उन्नत कृषि किस्मों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय ने सरसों की अपनी पहली हाइब्रिड किस्म आरएचएच 2101 के बीज उत्पादन और विपणन के लिए उत्तराखंड की हेमट्रिक्स एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, रुद्रपुर के साथ गैर-अनन्य लाइसेंस समझौता किया है। इससे इस उन्नत किस्म का बीज बड़े स्तर पर तैयार कर किसानों को उपलब्ध करवाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। निजी कंपनी के साथ हुए इस गैर-अनन्य लाइसेंस समझौते से बीज उत्पादन और विपणन का अधिकार कंपनी को मिल जाएगा।
समझौते की मुख्य बातें और हस्ताक्षर
इस महत्वपूर्ण समझौते पर विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने हस्ताक्षर किए। कंपनी की ओर से इस समझौते पर जोनल मैनेजर बीएन मिश्रा ने अपने हस्ताक्षर किए हैं। कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने मंगलवार को इस बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तय समझौते के तहत कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस का भुगतान करेगी। इसके बाद ही कंपनी को आरएचएच 2101 के बीज का उत्पादन करने और उसका विपणन करने का अधिकार मिलेगा। इससे विश्वविद्यालय की विकसित तकनीक और उन्नत किस्म का लाभ सीधे तौर पर देश के किसानों तक पहुंच सकेगा।
आरएचएच 2101 किस्म की विशेषताएं और उपज
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने इस किस्म के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। आरएचएच 2101 सरसों की एक उन्नत हाइब्रिड किस्म है जो करीब 142 दिन में पककर पूरी तरह तैयार हो जाती है। इस किस्म की औसत उपज 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। इस विशेष किस्म में शाखाओं की संख्या काफी अधिक होती है और इसके साथ ही फलियों की संख्या भी बहुत ज्यादा होती है। इसी वजह से इसकी उत्पादन क्षमता अन्य सभी सामान्य उन्नत किस्मों की तुलना में काफी बेहतर रहती है। इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और इनमें लगभग 40 प्रतिशत तक तेल का अंश पाया जाता है।
व्यावसायिक विस्तार और किसानों को फायदा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस साझेदारी को लेकर बहुत अधिक उम्मीदें जताई हैं। निजी क्षेत्र के साथ इस तरह की साझेदारी होने से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई किस्मों और नई तकनीकों का व्यावसायिक स्तर पर विस्तार होगा। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण और उन्नत बीज बहुत आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। हिसार के इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय का यह कदम कृषि क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।