पलवल के 95 वर्षीय लोक कलाकार हवा सिंह नाथ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया सम्मानित

पलवल के 95 वर्षीय लोक कलाकार हवा सिंह नाथ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया सम्मानित

पलवल जिले के छोटे से गांव रजोलका के रहने वाले 95 वर्षीय लोक कलाकार हवा सिंह नाथ ने अपनी पारंपरिक कला बीन की धुन से देश-विदेश में पहचान बनाई है। सपेरा जाति से संबंध रखने वाले हवा सिंह नाथ को 13 अगस्त को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया है। सम्मान प्राप्त करने के बाद शनिवार को पैतृक गांव रजोलका पहुंचने पर ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत कर सम्मानित किया है। यह पलवल और पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है।

शनिवार को अपने जीवन की यादें साझा करते हुए हवा सिंह नाथ ने बताया कि वह चार भाई थे और उनके परिवार की आजीविका पारंपरिक रूप से बीन बजाने तथा सांपों के खेल दिखाने से चलती थी। परिवार के लोग खुशियों के अवसर पर बीन बजाकर लोगों का मनोरंजन करते थे। जब उन्हें कोई काम नहीं मिलता था, तब वह गांव-गांव जाकर सांपों के खेल दिखाया करते थे। पारंपरिक कला से ही उनके परिवार का जीवनयापन होता था।

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उन्होंने आगे बताया कि बचपन में बड़े भाइयों ने खेल-खेल में एक छोटी सी बीन बनाकर करीब सात-आठ वर्ष की उम्र में उनके हाथों में थमा दी थी। उन्होंने उस बीन को अपनी मां की तरह अपनाया और धीरे-धीरे उसमें ऐसी प्रवीणता हासिल कर ली कि उनकी प्रतिभा की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी। युवावस्था में उनका नाम देवा सिंह नाथ के रूप में जाना जाता था। बाद में बीन और तुम्बा के एक बड़े पारंपरिक कलाकार ने उनकी प्रतिभा को परखने के लिए उनसे अलग-अलग राग और धुनें बजवाईं। उनकी कला से प्रभावित होकर उन्होंने कहा था कि जब तुम बीन बजाते हो तो बिल्कुल हवा बन जाते हो। इसी घटना के बाद उनका नाम हवा सिंह नाथ पड़ गया।

राष्ट्रपति से मुलाकात को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हुए हवा सिंह नाथ भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के सामने पहुंचकर उन्होंने राम-राम कहा तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उन्हें राम-राम कहा। इसके बाद राष्ट्रपति ने धीमी आवाज में उन्हें दोबारा बुलाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले वह लोगों के दर्शन करने जाते थे, लेकिन आज बड़े-बड़े लोग स्वयं उनके घर आकर उन्हें सम्मान दे रहे हैं। यह उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

लोक कला और नई पीढ़ी का भविष्य

हवा सिंह नाथ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोक कला का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण नई पीढ़ी इस कला को सीखने में रुचि नहीं दिखा रही है। उन्होंने अपने दो बेटों को बीन की कला सिखाई है और 95 वर्ष की उम्र में भी वह लगातार करीब 10 मिनट तक बीन बजा सकते हैं। इस सम्मान समारोह में विमुक्त घुमंतू जाति विकास बोर्ड, हरियाणा के अध्यक्ष जसमेर सिंह बंजारा भी पहुंचे थे। उन्होंने हवा सिंह नाथ को अपनी ओर से तथा प्रदेश सरकार की ओर से बधाई दी है। 95 की उम्र में भी उनका यह जज्बा सराहनीय है।

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