हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य और सिनेमा का युग-संवाद, सुदेश बेरी और डॉ. अवनीश राही के बीच हुई चर्चा

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य और सिनेमा का युग-संवाद, सुदेश बेरी और डॉ. अवनीश राही के बीच हुई चर्चा

नई दिल्ली में चल रहे हिन्दी दिवस के साहित्यिक पखवाड़े में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर धर्मसूत्र प्रोडक्शन के तत्वावधान में यह कार्यक्रम हुआ। इसमें नूवॉइस प्रेस एवं पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का विशेष सहयोग रहा। राष्ट्रीय साहित्यिक संवाद के द्वितीय सत्र में प्रख्यात फिल्म अभिनेता सुदेश बेरी और गीतकार, साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. अवनीश राही आमने-सामने आए। इस संवाद का मुख्य केंद्र डॉ. राही का महाग्रंथ ‘मैं भूख हूँ—एक युग-काव्य-संहिता (रोटी से राष्ट्र तक की वेदना)’ रहा।

14 सवालों में खुला ‘मैं भूख हूँ’ का विराट संसार

कार्यक्रम के दौरान 14 सवालों के माध्यम से ‘भूख’ के विभिन्न रूपों और उसके व्यापक मानवीय अर्थों को सामने रखा गया। अभिनेता सुदेश बेरी ने कहा कि हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है, इसलिए आज की यह काव्य-यात्रा 14 ही सवालों से होकर गुजरेगी। इस युग-संवाद में महाग्रंथ के 71 काव्यस्वरों में से चयनित 14 स्वरों के माध्यम से चर्चा हुई। इसमें जन्म, रोटी, संवेदना, मानवता, न्याय, विद्रोह, जीवन-बोध, मृत्यु और राष्ट्र तक जाती ‘भूख’ की काव्य-यात्रा प्रस्तुत की गई।

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

सुदेश बेरी और डॉ. अवनीश राही के बीच महत्वपूर्ण चर्चा

महाग्रंथ को पढ़ने के बाद सुदेश बेरी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि ‘मैं भूख हूँ’ में भूख केवल पेट की आवश्यकता नहीं रह जाती है। वह मनुष्य के भीतर की संवेदना, संघर्ष, सम्मान, न्याय और स्वप्न का स्वर बन जाती है। डॉ. राही ने भूख को ऐसे व्यापक मानवीय रूपक में रूपांतरित किया है। इसमें व्यक्ति से लेकर समाज और राष्ट्र तक की अनेक अनकही पीड़ाएँ और आकांक्षाएँ दिखाई देती हैं।

कृति की त्रि-आयामी साहित्यिक अवधारणा और वैश्विक पहुंच

प्रश्न, उत्तर और गीतों की संरचना ‘मैं भूख हूँ’ की पठनीय, श्रवणीय और दर्शनीय त्रि-आयामी साहित्यिक अवधारणा को सामने लाती है। प्रत्येक गीत के साथ क्यूआर कोड के माध्यम से उसके वीडियो तक पहुँचा जा सकता है। इसकी इस अभिनव प्रस्तुति को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड Records में स्थान मिल चुका है। ‘मैं भूख हूँ’ की ‘रोटी से राष्ट्र तक की वेदना’ पेंगुइन रैंडम हाउस के वैश्विक वितरण के माध्यम से अब अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुँच रही है।

साहित्य और सिनेमा का रचनात्मक संबंध

डॉ. राही ने कहा कि इस कृति में भूख रोटी के साथ-साथ सम्मान, न्याय, प्रेम, स्वाभिमान और बेहतर जीवन की आकांक्षा भी है। साहित्य और सिनेमा के इस संवाद ने दोनों माध्यमों के रचनात्मक संबंध को रेखांकित किया है। हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित इस राष्ट्रीय साहित्यिक संवाद का प्रसारण विभिन्न टीवी चैनलों के माध्यम से किया जाएगा।

Share:

Comments

Leave a comment