हिंदी मेरी पहचान: चेन्नई की लेखिका मोनिका डागा की स्वरचित कविता

हिंदी मेरी पहचान: चेन्नई की लेखिका मोनिका डागा की स्वरचित कविता

अटल हिन्द विशेष के पाठकों के लिए चेन्नई की लेखिका मोनिका डागा "आनंद" की एक स्वरचित कविता प्रस्तुत है। इस रचना का शीर्षक हिंदी मेरी पहचान है। इस रचना के माध्यम से हिंदी भाषा के महत्व और उसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है। यह रचना सर्वाधिकार सुरक्षित है और लेखिका द्वारा भेजी गई है।

शीर्षक - हिंदी मेरी पहचान

हिंदी मेरी अभिव्यक्ति, हिंदी मेरी पहचान,

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इसमें है विराजित, मधुर "आनंद" गान,

हिंदी भाषाओं में प्यारी, हिंदी में बसे हैं प्राण, 

शब्दों की अनूठी शक्ति, हिंदी मेरा अभिमान ।

हिंदी भावों की सरिता, संजीवनी सा स्पंदन, 

माटी की सौंधी खुशबू , हिंदी से है हिंदुस्तान,

हिंदी भाषा है अनोखी, पुरातत्व एक ज्ञान, 

संस्कृत की है बिटिया, आधार प्रकाशमान ।

जीवन की खुशियों का, हिंदी सुंदर दर्पण,

सरल सरस भाषा, हृदय की है मुस्कान,

हिंदी में ममता बसी, भरा है अपनापन,

सुंदर संस्कार जड़ें, है नेह पल्लवन ।

अपनी भाषा का करें, सहर्ष हम वंदन,

मीठी बोली को करें, तन-मन ये अर्पण,

निज भाषा से उन्नति, निज भाषा से मान,

आत्मा की आवाज बनी, हिंदी अपनी है शान ।

हिंदी को सदा ही मिले, अपनों से यश मान,

बोलचाल खुलकर, राष्ट्र का होए उत्थान, 

हिंदी पर गर्व करें, राजभाषाओं की प्राण, 

हिंदी को दिलाएं आप, राष्ट्र भाषा सम्मान ।

हिंदी को मिलें विश्व में, सदा ही सर्वोच्च स्थान,

सुपथ अग्रसर हो, जीवन का अभियान,

हिंदी सबकी सहेली, छलकाती बड़प्पन,

अनुपम रस धारा, गणतंत्र स्वाभिमान ।

  • मोनिका डागा “आनंद", चेन्नई

 

आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद 

रचना स्वरचित और सर्वाधिकार सुरक्षित

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