हिसार में पशु क्रूरता मामलों की वैज्ञानिक जांच से मजबूत होगी न्यायिक प्रक्रिया

हिसार में पशु क्रूरता मामलों की वैज्ञानिक जांच से मजबूत होगी न्यायिक प्रक्रिया

मधुबन पुलिस अकादमी में आयोजित पशु कल्याण कानून एवं पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लुवास के डॉ. सुजय खन्ना ने पुलिस व पशु चिकित्सकों की भूमिका पर विशेष व्याख्यान दिया। हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन में आयोजित पशु कल्याण कानून एवं पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के सहायक प्रोफेसर-सह-विस्तार विशेषज्ञ डॉ. सुजय खन्ना ने शुक्रवार को पशु क्रूरता के मामलों में पुलिस और पशु चिकित्सकों की भूमिका पर विशेष व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान पशु क्रूरता के मामलों को सुलझाने में बहुत महत्वपूर्ण है।

डॉ. खन्ना ने विधिसम्मत पुलिस जांच के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि विधिसम्मत पुलिस जांच और वैज्ञानिक चिकित्सकीय जांच ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का मजबूत आधार बन सकती है। इससे अदालत में मामलों को सही दिशा मिलती है।

पशु क्रूरता मामलों में जांच और साक्ष्यों का महत्व

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डॉ. खन्ना ने मामलों की जांच से जुड़े कई जरूरी पहलुओं पर बात की। डॉ. खन्ना ने पशु क्रूरता के मामलों में घटनास्थल का निरीक्षण, साक्ष्यों का संग्रह व संरक्षण, बयान दर्ज करने, पशु की चिकित्सकीय जांच तथा कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। इन सभी चरणों का पालन करना बहुत जरूरी है।

पशु चिकित्सकों की भूमिका और साक्ष्यों की सुरक्षा

पशु चिकित्सकों की जिम्मेदारी इस प्रक्रिया में बहुत बड़ी होती है। उन्होंने पशु चिकित्सकों द्वारा चोटों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, उपचार, नमूने जुटाने, शव-परीक्षा और विशेषज्ञ राय की भूमिका भी समझाई। साक्ष्यों की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से साक्ष्यों की अभिरक्षा श्रृंखला को सुरक्षित रखने पर जोर दिया, ताकि अदालत में साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनी रहे।

पशुओं के अधिकार और आपसी समन्वय

पशु बोल नहीं सकते, इसलिए उनकी आवाज बनना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पशु अपनी पीड़ा और अपने साथ हुई क्रूरता को स्वयं व्यक्त नहीं कर सकते। ऐसे में पुलिस और पशु चिकित्सक उनके अधिकारों की आवाज बनकर उन्हें न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस काम के लिए सभी विभागों का मिलकर काम करना आवश्यक है। डॉ. खन्ना ने पुलिस, पशु चिकित्सकों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई लोगों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में पुलिस उपाधीक्षक, थाना प्रभारी, पुलिस अधिकारी, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि सहित अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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