हिसार में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, पांच दिवसीय बैंकिंग और लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे कर्मी

हिसार में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के आह्वान पर शुक्रवार को देशभर के बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर रहे। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह समेत लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर यह हड़ताल की गई। इस हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हुईं। हिसार में पीएलए मार्केट स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न बैंकों और यूनियन संगठनों से जुड़े करीब 500 कर्मचारियों व अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
समझौते के बाद भी मांगें लागू नहीं होने से जताया रोष
यूनियन नेताओं ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और बैंक यूनियनों के बीच पांच दिवसीय बैंकिंग को लेकर एक समझौता हुआ था। लेकिन समझौते के ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसी वजह से कर्मचारियों को मजबूरन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों सहित कई अन्य सरकारी व वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह पहले से ही लागू है। जबकि बैंक एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई के माध्यम से सप्ताह के सातों दिन ग्राहकों को अपनी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।
अतिरिक्त काम करने को तैयार थे बैंककर्मी
यूनियन नेताओं ने जानकारी दी कि समझौते के तहत बैंककर्मी प्रत्येक कार्यदिवस में 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हो गए थे। यह इसलिए तय किया गया था ताकि शनिवार को अवकाश होने के बावजूद ग्राहकों को उपलब्ध कुल बैंकिंग समय में किसी भी प्रकार की कमी न आए। इसके अलावा नेताओं ने एकतरफा और भेदभावपूर्ण पीएलआई व्यवस्था में बदलाव करने की मांग उठाई। साथ ही सभी लंबित मुद्दों पर यूनियनों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने की भी पुरजोर मांग की गई।
कर्मचारियों ने किया आर्थिक त्याग और दी चेतावनी
नेताओं ने स्पष्ट किया कि हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट लिया जाता है। इसके बावजूद सभी कर्मचारियों ने अपनी सामूहिक मांगों के समर्थन में यह बड़ा आर्थिक त्याग किया है। हिसार के स्थानीय कार्यक्रम में राजेश पसरीजा, अजीत सिंह, आशीष पंघाल, राज पूनिया, वीएल शर्मा और राजेश सरदाना सहित कई अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे। इस अवसर पर मोनिका धूल, संजीव शास्त्री, प्रतीक, सुमन, प्रतीक अलावादी, धर्मबीर बुरा, संदीप संधू, दिशांत गिल और सत्यवान भी उपस्थित रहे। यूएफबीयू ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है। अंत में नेताओं ने कहा कि सरकार और आईबीए के पास अभी भी बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाने का पूरा अवसर मौजूद है।