हिसार में बिजली कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन, वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए विधायकों को सौंपे ज्ञापन

हिसार में बिजली कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन, वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए विधायकों को सौंपे ज्ञापन

हरियाणा सरकार और हरियाणा विद्युत नियामक आयोग पर कर्मचारियों से वादाखिलाफी और विश्वासघात करने का गंभीर आरोप लगा है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने रविवार को प्रदेश के विभिन्न विधायकों को ज्ञापन सौंपे हैं। यह विरोध पैरलल लाइसेंस प्रणाली और अलग कृषि वितरण निगम बनाने की प्रक्रिया को लेकर किया जा रहा है। मोर्चा ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हिसार में इस पूरे मामले को लेकर बिजली कर्मचारियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।

गुरुग्राम और नूंह को निजी कंपनी को देने का विरोध

मोर्चा के नेता प्रदीप लौरा ने मीडिया को जानकारी दी कि एचईआरसी पैरालल लाइसेंस प्रणाली को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह क्षेत्र को निजी बिजली कंपनी को सौंपने के लिए लगातार पत्राचार और अन्य प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बीते 10 अगस्त को बिजली मंत्री अनिल विज के साथ मोर्चा की एक महत्वपूर्ण वार्ता हुई थी। इस बैठक में सरकार की तरफ से लिखित आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद 26 अगस्त को नए निर्देश जारी कर दिए गए और प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया। इस बात से कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है और मोर्चा इस पूरी प्रक्रिया का हर स्तर पर पुरजोर विरोध करेगा।

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विधायकों को सौंपे ज्ञापन और विधानसभा में उठाने की मांग

इस विरोध प्रदर्शन की कड़ी में कर्मचारियों ने कई प्रमुख विधायकों से मुलाकात की। आदमपुर के विधायक चंद्र प्रकाश, बरवाला के विधायक रणबीर गंगवा, नलवा के विधायक रणधीर पनिहार और सावित्री जिंदल समेत अन्य विधायकों को ज्ञापन सौंपे गए। इन सभी विधायकों से यह अपील की गई है कि वे आगामी विधानसभा सत्र के दौरान कर्मचारियों की इन मांगों को सदन में मजबूती से उठाएं। महासचिव रविंद्र घणघस ने इस दौरान कहा कि पैरालल लाइसेंस प्रणाली के खिलाफ मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री को आधिकारिक रूप से पत्र भेजा जाएगा। मोर्चा की तरफ से मुख्यमंत्री, बिजली मंत्री, एचईआरसी और बिजली निगमों के प्रबंधन को भी पत्र भेजे जाएंगे।

लंबित मांगों का समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी

मोर्चा के सभी नेताओं ने एक स्वर में मांग की है कि कर्मचारियों की सभी लंबित मांगों का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए। शेष बचे अन्य मुद्दों पर बातचीत करने के लिए कर्मचारियों को तुरंत चर्चा के लिए बुलाया जाना चाहिए। नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द से जल्द समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो संयुक्त संघर्ष मोर्चा अपनी आंदोलन की आगामी रणनीति का ऐलान कर देगा। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी संघ की ओर से हड़ताल का रास्ता भी अपनाया जा सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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