हिसार में बिजली निजीकरण का विरोध, किसान, मजदूर और कर्मचारियों से एकजुट होने की अपील

पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति ने गुरुग्राम और नूंह जैसे अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में समानांतर निजी बिजली लाइसेंस देने की सिफारिश का कड़ा विरोध जताया है। समिति का कहना है कि बिजली आम जनता, किसान और मजदूर की मूलभूत जरूरत है। यह मामला केवल कर्मचारियों का नहीं बल्कि सभी से जुड़ा है।
सतीश बेनीवाल का बयान
समिति के जिला प्रधान सतीश बेनीवाल ने सोमवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के कमाऊ क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने से सरकारी बिजली व्यवस्था कमजोर होगी। भविष्य में आम उपभोक्ताओं तथा किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी पर भी संकट पैदा हो सकता है।
युवाओं के रोजगार और सरकारी व्यवस्था पर असर
सतीश बेनीवाल ने कहा कि सरकार को बिजली के निजीकरण के बजाय सरकारी बिजली व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। निजीकरण से युवाओं के लिए सरकारी रोजगार के अवसर भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि बिजली का निजीकरण केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि किसान के खेत, मजदूर के घर और आम जनता के भविष्य का सवाल है।
सरकार से प्रमुख मांगें और संघर्ष का आह्वान
सतीश बेनीवाल ने सरकार से मांग की कि निजी बिजली लाइसेंस देने की प्रक्रिया को रोका जाए। उन्होंने बिजली व्यवस्था को सरकारी क्षेत्र में बनाए रखने, स्थायी भर्ती शुरू करने तथा किसानों की बिजली सब्सिडी सुरक्षित रखने की मांग की। उन्होंने किसान, मजदूर, कर्मचारी और आम जनता से निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिजली का निजीकरण किसी भी सूरत में मंजूर नहीं किया जाएगा।