हिसार के खेदड़ पावर प्लांट की यूनिट ठप, गांव और खेतों की बिजली पर बढ़ा संकट

हिसार जिले के बरवाला क्षेत्र में स्थित राजीव गांधी खेदड़ पावर प्लांट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। 600 मेगावाट की एक यूनिट में तकनीकी खराबी आने के कारण कई दिनों से बिजली उत्पादन पूरी तरह बंद है। इस तकनीकी खराबी का सीधा असर आम जनता की बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। गांवों तथा खेतों की बिजली लाइनों पर रात के समय लगातार कट लग रहे हैं। यूनिट बंद रहने के कारण बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस वजह से बिजली की आपूर्ति के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भरता भी काफी हद तक बढ़ गई है।
प्लांट के चीफ इंजीनियर ने दी जानकारी
प्लांट के चीफ इंजीनियर अशोक महेश्वरी ने गुरुवार को इस पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेदड़ प्लांट के अंदर 600-600 मेगावाट क्षमता की कुल दो यूनिटें मौजूद हैं। इनमें से वर्तमान में एक यूनिट के अंदर तकनीकी खामी आ गई है। इसी तकनीकी खामी के कारण उस यूनिट का बिजली उत्पादन रोक दिया गया है।
चीन से बुलाए गए विशेष इंजीनियर
प्लांट के भीतर लगी हुई सभी मशीनें चीन देश की बनी हुई हैं। इस तकनीकी खराबी को पूरी तरह दूर करने के लिए चीन से विशेष इंजीनियरों को बुलाया गया है। खराब हुई यूनिट को दुरुस्त करने का काम इस समय तेजी से चल रहा है। प्रबंधन का पूरा प्रयास है कि कल तक बिजली उत्पादन को दोबारा से बहाल कर दिया जाए। यूनिट की इस तकनीकी खराबी को दूर करने में कुल करोड़ों रुपये का भारी खर्च आने की बात सामने आई है। प्लांट प्रबंधन का कहना है कि मशीनों के अंदर तकनीकी समस्याएं अक्सर आती रहती हैं। सामान्य तौर पर प्लांट में काम करने वाले इंजीनियर ही इन समस्याओं को दुरुस्त कर लेते हैं। लेकिन इस बार विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की बहुत अधिक आवश्यकता पड़ गई। इसी वजह से मजबूरन चीन से इंजीनियरों को बुलाना पड़ा है।
विभिन्न बिजलीघरों को होती है बिजली की आपूर्ति
खेदड़ पावर प्लांट के माध्यम से एचवीपीएनएल को लगातार बिजली की आपूर्ति की जाती है। हिसार और बरवाला क्षेत्र के अंतर्गत किरोड़ी में स्थित 400 केवी बिजलीघर के लिए दो सर्किट बनाए गए हैं। इसके अलावा सिरसा जिले के नुईयांवाली में स्थित 400 केवी बिजलीघर को भी यहीं से बिजली मिलती है। फतेहाबाद के मताना स्थित पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के बिजलीघर को भी यहीं से बिजली की सप्लाई दी जाती है। इन बड़े बिजलीघरों के अलावा आसपास के अन्य कई बिजलीघरों को भी खेदड़ प्लांट से ही बिजली प्राप्त होती है। ऐसी स्थिति में यदि कोई एक यूनिट लंबे समय तक बंद रहती है। तो इससे संपूर्ण क्षेत्र की बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ना पूरी तरह स्वाभाविक है।