हिसार : राज्य के 16-17 जिलों में सामान्य से कम बारिश, दो सितंबर तक वर्षा के आसार नहीं

हिसार : राज्य के 16-17 जिलों में सामान्य से कम बारिश, दो सितंबर तक वर्षा के आसार नहीं

हिसार में बारिश की कमी के बीच हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में फसलों की स्थिति पर मंथन किया गया है।वैज्ञानिकों ने फसलों को बचाने के लिए बचाव के उपाय बताए हैं।धान और कपास की फसलों में रोग और कीट के प्रकोप की समीक्षा की गई है।

प्रदेश में सामान्य से कम बारिश के बीच खरीफ फसलों की स्थिति पिछले साल के मुकाबले बेहतर बताई गई है। हालांकि धान और कपास की फसलों में कुछ क्षेत्रों में रोग-कीटों का प्रकोप चिंता का कारण बना हुआ है। इसी को लेकर यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि वैज्ञानिकों और पांच जिलों के कृषि अधिकारियों ने फसलों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करते हुए किसानों को संभावित समस्याओं से बचाने की रणनीति पर मंथन किया। वैज्ञानिकों ने धान, कपास समेत अन्य खरीफ फसलों के साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियों को लेकर भी कृषि अधिकारियों को आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए।

हिसार जोन की क्षेत्रीय अनुसंधान एवं विस्तार एडवाइजरी कमेटी की बैठक

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान में आयोजित हिसार जोन की क्षेत्रीय अनुसंधान एवं विस्तार एडवाइजरी कमेटी की बैठक की अध्यक्षता अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने की। बैठक में भिवानी, हिसार, जींद, फतेहाबाद और सिरसा जिलों से पहुंचे कृषि अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों के सामने आ रही समस्याओं और फसलों की स्थिति की जानकारी वैज्ञानिकों के साथ साझा की।

विभिन्न फसलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा

बैठक में गेहूं, चना, सरसों, जौ, जई और बरसीम सहित रबी फसलों तथा कपास, धान, बाजरा और मूंग जैसी खरीफ फसलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। कृषि अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ फसलों की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। धान में विषाणु जनित बौना रोग और कपास में गुलाबी सुंडी का प्रकोप अपेक्षाकृत कम रहा है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में धान की पत्ता लपेट सुंडी तथा कपास में सफेद मक्खी, तेले और चुरड़े का प्रकोप देखा गया है।

धान में बौना रोग की स्थिति नियंत्रण में

धान में बौना रोग की स्थिति नियंत्रण में रहने पर अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने संतोष जताया। उन्होंने पौध रोग विभाग की ओर से डॉ. राकेश चुघ के नेतृत्व में लगातार की जा रही निगरानी की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में सामने आने वाली समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध करवाना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। क्षेत्रीय स्तर पर कृषि अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी अनुसंधान एवं कृषि प्रसार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मौसम की स्थिति और बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अध्यक्ष एवं छात्र कल्याण निदेशक डॉ. मदन लाल खीचड़ ने बैठक में मौसम की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा के 23 जिलों में से करीब 16-17 जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है। उन्होंने कहा कि दो सितंबर तक प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में किसानों को उपलब्ध नमी और सिंचाई के पानी का प्रबंधन करते हुए कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।

रबी सीजन और गेहूं की किस्मों की जानकारी

रबी सीजन को लेकर गेहूं विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं फार्म निदेशक डॉ. ओपी बिश्नोई ने किसानों के लिए उपयोगी किस्मों की जानकारी दी। उन्होंने डब्ल्यूएच-1270, डीबीडब्ल्यू-303, डीबीडब्ल्यू-327 और पीबीडब्ल्यू-872 जैसी अगेती गेहूं किस्मों के अलावा कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए डब्ल्यूएच-1142 और डब्ल्यूएच-1402 किस्मों की सिफारिश संबंधी जानकारी साझा की। वहीं डॉ. राम अवतार ने सरसों की बिजाई, सिंचाई और रोग-कीट प्रबंधन को लेकर वैज्ञानिक सुझाव दिए।

बैठक में उपस्थित अन्य अधिकारी

संस्थान के सह-निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. अशोक कुमार गोदारा ने विभिन्न जिलों से पहुंचे कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों का स्वागत किया। डॉ. भूपेंद्र सिंह ने पिछले वर्ष किसान खेत परीक्षणों के परिणाम प्रस्तुत किए और आगामी वर्ष के लिए प्रस्तावित परीक्षणों को सुनिश्चित किया। बैठक में विश्वविद्यालय के मीडिया सलाहकार डॉ. संदीप आर्य, परियोजना निदेशक डॉ. एसके धनखड़ सहित विभिन्न विभागों के वैज्ञानिक एवं अधिकारी मौजूद रहे।

Share:

Comments

Leave a comment