हिसार में राष्ट्रीय लाइब्रेरियन दिवस पर संगोष्ठी, डिजिटल युग में पुस्तकालयों की जिम्मेदारी बढ़ी

हिसार में राष्ट्रीय लाइब्रेरियन दिवस के अवसर पर गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में भी पुस्तकालयों को ज्ञान का मजबूत आधार बताया गया। सूचना और तकनीक के तेजी से बदलते दौर में ज्ञान के स्रोत भले ही बदल गए हों, लेकिन पुस्तकालयों का महत्व आज भी पूरी तरह से कायम है। डिजिटल युग में विश्वसनीय और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करवाने की बड़ी चुनौती सामने आई है। इस चुनौती के चलते पुस्तकालयों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
यह महत्वपूर्ण बात गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कही। उन्होंने यह बात गुरुवार को राष्ट्रीय लाइब्रेरियन दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय लाइब्रेरियन दिवस को बहुत उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस कार्यक्रम में 21वीं सदी के बदलते सूचना परिदृश्य पर विशेष रूप से मंथन किया गया। इस दौरान पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस.आर. रंगनाथन के विचारों और उनके सिद्धांतों की प्रासंगिकता पर भी चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के प्रो. मनोज कुमार जोशी ने विशेष व्याख्यान दिया। प्रो. मनोज कुमार जोशी ने ‘21वीं सदी में रंगनाथन के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने डॉक्टर एसआर रंगनाथन के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रंगनाथन के विचार अपने समय से काफी आगे थे। आज के इस आधुनिक डिजिटल युग में भी उनके वे विचार पूरी तरह से प्रासंगिकता बनाए हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से रंगनाथन के प्रसिद्ध सिद्धांत का उल्लेख किया। वह सिद्धांत ‘हर पाठक को उसकी पुस्तक मिले’ से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि आज सूचना का एक बहुत बड़ा विशाल भंडार मौजूद है। इस विशाल भंडार के बीच प्रत्येक उपयोगकर्ता को उसकी आवश्यकता के अनुरूप सही और उपयोगी सूचना उपलब्ध करवाना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने अपने संबोधन में आगे कहा कि आज का समय सूचना की बाढ़ का समय बन चुका है। इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने जानकारी तक की पहुंच को आज बेहद आसान बना दिया है। लेकिन इसके साथ ही सही, प्रमाणिक और उपयोगी जानकारी की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे मुश्किल समय में पुस्तकालय केवल किताबें उपलब्ध करवाने वाले केंद्र नहीं हैं। बल्कि वे विश्वसनीय ज्ञान और प्रमाणिक सूचना के एक मजबूत मार्गदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में पुस्तकालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम के अंत में संचालन से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। इस पूरे कार्यक्रम का संचालन पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन डॉ. विनोद कुमार द्वारा किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर असिस्टेंट लाइब्रेरियन सोमदत्त और विनायक वाधवा भी उपस्थित रहे। इनके अलावा विश्वविद्यालय पुस्तकालय के अन्य सभी कर्मचारी भी इस कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद रहे।