हिसार : ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में मानवीय आधार को शामिल करे सरकार, सांझा मोर्चा की मांग

हिसार : ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में मानवीय आधार को शामिल करे सरकार, सांझा मोर्चा की मांग

हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने हरियाणा सरकार द्वारा चालक एवं परिचालकों के लिए प्रस्तावित ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर परिवहन मंत्री के समक्ष महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखी हैं। मोर्चा ने कहा है कि ऑनलाइन ट्रांसफर प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। लेकिन चालक एवं परिचालकों की कठिन और जोखिमपूर्ण ड्यूटी तथा उनकी पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए इस नीति में मानवीय आधार को उचित महत्व दिया जाना बेहद जरूरी है। जो दूर है उसे नजदीक लाओ और जो नजदीक है उसे दूर मत भेजो के सिद्धांत पर तबादले किए जाने चाहिए।

वर्षों से दूर कार्यरत कर्मचारियों को मिले प्राथमिकता

सांझा मोर्चा ने कहा है कि बड़ी संख्या में चालक और परिचालक ऐसे हैं जो अपने गृह जिले से दो सौ से तीन सौ किलोमीटर या इससे भी अधिक दूरी पर स्थित डिपो में पिछले पांच, सात और दस वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर उनके गृह जिले अथवा नजदीकी डिपो में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इसके अलावा जो कर्मचारी पहले से अपने गृह जिले अथवा नजदीकी डिपो में कार्यरत हैं, उन्हें बिना किसी ठोस कारण के दूर-दराज के डिपो में भेजना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं होगा।

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

चालक और परिचालकों की कठिन कार्य परिस्थितियां

मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया है कि चालक और परिचालक कोई सामान्य कार्यालयी कर्मचारी नहीं होते हैं। उनकी ड्यूटी अत्यंत जिम्मेदारी और पूरी एकाग्रता वाली होती है। वे प्रतिदिन लगभग ढाई सौ से सात सौ किलोमीटर तक की दूरी तय करते हुए कई जिलों को जोड़ने वाले लंबे मार्गों पर यात्रियों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाते हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को अपनी ड्यूटी करने के लिए कार्यस्थल तक पहुंचने में ही डेढ़ सौ से दो सौ किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़े, तो इसका प्रतिकूल असर उसके स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और एकाग्रता पर पड़ना स्वाभाविक है।

रिक्त पदों और वरिष्ठता के आधार पर हो समायोजन

सांझा मोर्चा ने यह मांग की है कि जिन डिपो में स्टाफ की आवश्यकता है अथवा रिक्त पद उपलब्ध हैं, वहां आवश्यकता, वरिष्ठता और सेवा अवधि के आधार पर कर्मचारियों का समायोजन किया जाना चाहिए। विशेष रूप से वर्षों से दूर-दराज के डिपो में कार्यरत कर्मचारियों को उनके गृह जिले अथवा नजदीकी डिपो में उपलब्ध पदों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विशेष वेटेज और मानवीय दृष्टिकोण की मांग

मोर्चा ने प्रस्तावित ट्रांसफर पॉलिसी में कर्मचारी की आयु पचास वर्ष से अधिक होने, गंभीर बीमारी से पीड़ित होने, पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने, गृह जिले से कार्यस्थल की दूरी तथा लंबे समय से दूर-दराज के डिपो में कार्यरत रहने की अवधि को विशेष वेटेज देने की मांग उठाई है। सांझा मोर्चा ने कहा है कि चालक और परिचालकों को दिन-रात, रविवार, सरकारी अवकाश और त्योहारों के दिनों में भी अपनी ड्यूटी निभानी पड़ती है। उनकी ट्रांसफर पॉलिसी सामान्य कार्यालयी कर्मचारियों की तर्ज पर नहीं बनाई जानी चाहिए और उनकी वास्तविक कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

यात्रियों की सुरक्षा और कार्यक्षमता पर सीधा असर

मोर्चा ने कहा कि चालक की ड्यूटी सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी हुई होती है। यदि कोई चालक या परिचालक लगातार अपने परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलेगा, तो इसका सीधा असर उसकी कार्यक्षमता और एकाग्रता पर पड़ सकता है। इसके विपरीत गृह जिले या नजदीकी डिपो में कार्यरत कर्मचारी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुंच सकेंगे और अधिक ऊर्जा, एकाग्रता एवं जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे सकेंगे। इसका सीधा और सकारात्मक लाभ रोडवेज की कार्यक्षमता, यात्री सुविधा और विभाग की आय पर भी पड़ेगा।

Share:

Comments

Leave a comment