हिसार में जाति का नाम बदलने के विरोध में रविदासिया समाज लामबंद, जींद में बनेगी आंदोलन की रणनीति

हिसार में चमार जाति का नाम बदलकर मेघवाल करने की मांग पर विवाद तूल पकड़ चुका है। इस मांग के विरोध में हरियाणा रविदासिया समाज महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि समाज की व्यापक सहमति के बिना ऐतिहासिक पहचान के साथ किसी भी प्रकार का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन
महासंघ ने मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में मांग उठाई गई है कि जाति के नाम में बदलाव को लेकर कोई भी निर्णय लेने से पहले समाज के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
जींद में होगी संयुक्त बैठक और आंदोलन की रणनीति
आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने के लिए 6 सितंबर को जींद स्थित गुरु रविदास धर्मशाला में बैठक बुलाई गई है। यह बैठक प्रदेशभर की गुरु रविदास सभाओं, डॉ. अंबेडकर सभाओं और अन्य सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक होगी।
पुतले फूंककर जताया गया कड़ा विरोध
सिरसा बाइपास स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास छात्रावास में महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एसपी चालिया की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक में इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताई गई। बैठक के बाद सदस्यों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के पुतले फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया।
ऐतिहासिक पहचान बदलने का विरोध
एसपी चालिया ने कहा कि कुछ लोगों की मांग के आधार पर पूरे चमार जाति की ऐतिहासिक पहचान बदलना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में चमार समाज अनुसूचित जाति के बड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। कुछ चुनिंदा लोगों या परिवारों की मांग को पूरे समाज की सामूहिक राय नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मुख्यमंत्री से मिलकर मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरे समाज की ओर से इस तरह की मांग रखने का नैतिक अधिकार नहीं है।