हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने डायरेक्टर जनरल आरके श्रीवास्तव की सभी शक्तियां की निलंबित

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने डायरेक्टर जनरल आरके श्रीवास्तव की सभी शक्तियां की निलंबित

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने डायरेक्टर जनरल आरके श्रीवास्तव की सभी ऑपरेशनल पावर यानी संचालन शक्तियों को छीन लिया है। यह फैसला गवर्निंग बॉडी से जुड़े आठ आरोपों के बाद लिया गया है। यह प्रशासनिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब महासंघ एशियन गेम्स के क्वालीफायर की तैयारी कर रहा है। इससे अंदरूनी देखरेख के तंत्र पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

दिलीप तिर्की ने 12 सितंबर को कमांडर आरके श्रीवास्तव को शो-कॉज नोटिस जारी किया था। इसके बाद डायरेक्टर जनरल ऑफिस से जुड़ी हर ताकत को सस्पेंड कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस व्यापक निलंबन में फाइनेंशियल, एडमिनिस्ट्रेटिव, कॉन्ट्रैक्टुअल और रिप्रेजेंटेशनल यानी वित्तीय, प्रशासनिक, अनुबंध और प्रतिनिधित्व से जुड़े सभी अधिकार शामिल हैं। अब श्रीवास्तव को अपने सभी आधिकारिक क्रेडेंशियल, फाइलें और एसेट्स प्रेसिडेंट द्वारा नियुक्त व्यक्ति को सौंपने होंगे।

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अंतरिम प्रशासनिक कदम और जवाब का समय

यह पूरा मामला कोई अंतिम फैसला नहीं है बल्कि एक अंतरिम प्रशासनिक कदम है। नोटिस में यह साफ किया गया है कि श्रीवास्तव को अपनी सामान्य सर्विस बेनिफिट्स और कॉन्ट्रैक्टुअल सैलरी मिलती रहेगी। इस बीच उन्हें अपना औपचारिक जवाब तैयार करना होगा। नोटिस मिलने के चार हफ्ते के भीतर उन्हें अपना जवाब और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे।

गवर्नेंस विवाद और ऑपरेशनल चुनौतियां

चुनी हुई लीडरशिप और एग्जीक्यूटिव ऑफिस के बीच विवाद की मुख्य वजह आठ विशेष मुद्दे हैं। अध्यक्ष का आरोप है कि श्रीवास्तव ने भारत में रहकर लीग कोॉर्डिनेशन करने के सीधे निर्देशों की अवहेलना की। इसके बजाय वह नीदरलैंड्स और बेल्जियम में हुए वर्ल्ड कप में चले गए। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पूर्व अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने पहले यह आरोप लगाया था कि उस यात्रा के दौरान चार पदाधिकारियों के डेली अलाउंस पर लगभग 43.68 लाख रुपये खर्च किए गए थे। हालांकि यह आंकड़ा अभी तक एक अनऑडिटेड आरोप ही बना हुआ है।

राष्ट्रीय टीम की जर्सी और अन्य आरोप

राष्ट्रीय टीम की जर्सी को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था। एशियन गेम्स से पहले जर्सी का रंग नीले से बदलकर नारंगी कर दिया गया था और बाद में फिर से पुराना रंग कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार अध्यक्ष का आरोप है कि यह बदलाव बिना किसी एग्जीक्यूटिव कमेटी के प्रस्ताव या उचित दस्तावेजी मंजूरी के किया गया था। अन्य आरोपों में वर्कप्लेस पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के रिकॉर्ड पेश करने में असफलता और साउथ अफ्रीका दौरे तथा हेड कोच क्रेग फुल्टन से जुड़े मामलों में गड़बड़ी के आरोप शामिल हैं।

संस्था की साख और आगे की राह

अगर महासंघ पारदर्शी और ऑडिटेड वर्कफ्लो नहीं दिखा पाता है, तो संस्था की साख खतरे में पड़ सकती है। बिना फॉर्मल मिनट्स या शक्तियों के अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के, संगठन इस महत्वपूर्ण एथलेटिक सीजन के दौरान ठप हो सकता है। मेंस टीम एशियन गेम्स में डिफेंडिंग चैंपियंस के तौर पर उतरेगी। वहीं वुमन्स टीम 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधा क्वालीफिकेशन हासिल करना चाहती है।

हॉकी इंडिया को अब स्पॉन्सर्स, लीग फ्रेंचाइजी और खिलाड़ियों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट की निरंतरता सुनिश्चित करनी होगी। ऑपरेशनल देरी को रोकने के लिए जिम्मेदारियों को किसी तय अधिकारी को सौंपना इस समय की पहली प्राथमिकता है। महासंघ को अंत में यह तय करना होगा कि क्या इन आठ आरोपों पर कोई और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए या फिर रिव्यू पीरियड पूरा होने के बाद मौजूदा प्रतिबंध हटा लिए जाएं।

लोगों की दिलचस्पी इस बात पर टिकी है कि क्या इस प्रक्रिया से कोई पारदर्शी और तार्किक परिणाम सामने आएगा। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार श्रीवास्तव ने अभी तक इन सभी दावों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है। भविष्य की व्यवस्था इस बात पर निर्भर करेगी कि हॉकी इंडिया का एग्जीक्यूटिव बोर्ड अपने एथलेट्स का फोकस बनाए रखते हुए इन विवादों को कैसे सुलझा पाता है।

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