धमतरी में कलेक्ट्रेट पर सैकड़ों मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, कहा - 'मोदी सरकार को जाना ही होगा'

Atal Hind10 August 20263 min read56 viewsछत्तीसगढ़
धमतरी में कलेक्ट्रेट पर सैकड़ों मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, कहा - 'मोदी सरकार को जाना ही होगा'

सैकड़ों मजदूरों ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, कहा : आम जनता पस्त, लेकिन मोदी मस्त, उन्हें जाना ही होगा

धमतरी, छत्तीसगढ़/10 अगस्त 2026/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

धमतरी। किसानों और मजदूर-कर्मचारी संगठनों के संयुक्त देशव्यापी आह्वान पर आज सैकड़ों मजदूरों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ये मजदूर आंगनबाड़ी, मध्यान्ह भोजन, मंडी और एफसीआइ जैसे असंगठित क्षेत्र से जुड़े हुए थे, जिनके रोजगार निजीकरण की नीतियों के कारण खतरे में पड़ गए हैं और वे आज रोजगार की सुरक्षा के साथ ही अपनी मजदूरी में ठहराव का सामना कर रहे हैं। उन्हें नियमित करने का सरकार का वादा जुमला भर बनकर रह गया है।

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आज यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में सीटू के जिला अध्यक्ष मनीराम देवांगन और सचिव समीर कुरैशी ने बताया कि इस आंदोलन को और तेज किया जायेगा और अपनी वादाखिलाफी के लिए मोदी सरकार को जाना ही होगा। 6 अक्टूबर को मध्यान्ह भोजन योजना के रसोईया मजदूर दिल्ली पहुंचकर संसद का घेराव करेंगी।

प्रदर्शन से पहले हुई सभा को अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष संजय पराते ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज जनता के सभी तबके अपनी मांगों और अधिकारों के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन संसद में इस पर चर्चा न करने के कारण संसद ठप्प है। मोदी सरकार ने श्रम संहिताओं के नाम पर मजदूरों को दासता के युग में धकेल दिया है। कॉर्पोरेटपरस्त कृषि नीतियों के कारण हर साल 20000 से ज्यादा किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या कर रहे हैं। शिक्षा के निजीकरण के कारण पिछले 12 सालों में 150 से ज्यादा परीक्षाओं के पर्चे लीक हुए है और 7 करोड़ से ज्यादा बच्चों का भविष्य बर्बाद हुआ है। मोदी सरकार ने एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इस देश के सार्वजनिक क्षेत्र में जो कुछ भी निर्माण हुआ है, उसे सरकार में बैठे दो आदमी मिलकर बेच रहे हैं और इस देश के दो कॉर्पोरेट खरीद रहे हैं।

किसान सभा नेता ने कहा कि अमेरिका सहित विभिन्न देशों से जो कृषि व्यापार समझौते हो रहे हैं, उससे इस देश की खेती-किसानी नष्ट हो रही है और विदेशी सामानों के लिए बाजार बनाया जा रहा है। देश को एक नए औपनिवेशिक युग में धकेलने की साजिश की जा रही है और इसके लिए लोकतंत्र और संविधान को कुचला जा रहा है और हर प्रकार के लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाया जा रहा है। यह सरकार अपनी सत्ता बचाने के लिए लोगों के बीच सांप्रदायिक नफरत फैला रही है, यही फासीवाद है।

समीर कुरैशी और मनीराम यादव ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की दयनीय दशा का उल्लेख किया और बताया कि सरकार के तमाम दावों के बावजूद ये मजदूर समाज कल्याण की विभिन्न योजनाओं से बाहर है और उनको कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती। राष्ट्रीय सुरक्षा खाद्यान्न योजना में कटौती किए जाने के मोदी सरकार के प्रस्ताव का भी उन्होंने कड़ा विरोध किया और कहा कि इससे भुखमरी और कुपोषण में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि मोदी और साय सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष और तेज किया जायेगा।

ललिता साहू, बालाराम मरकाम, मधु नेताम, उकेश्वरी साहू, तुलेश्वरी रजक, रवि ध्रुव, युवराज साहू, पुरुषोत्तम साहू, अशोक ध्रुव, दुर्गा नेताम आदि सीटू नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया। सभा के पश्चात प्रदर्शन के जरिए अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

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