IAS डी सुरेश पर FIR: गुरुग्राम प्लॉट आवंटन केस की पूरी सच्चाई

गुरुग्राम सेक्टर-23 में प्लॉट के दोबारा आवंटन मामले में आईएएस डी सुरेश पर एसीबी ने केस दर्ज किया है। हाईकोर्ट से राहत मिलने और सेवानिवृत्ति के दिन की पूरी कार्रवाई रिपोर्ट पढ़ें।
हरियाणा के गुरुग्राम में सेक्टर-23 के प्लॉट आवंटन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर ली हैं। एसीबी के एक अधिकारी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
फतह सिंह उजाला/गुरुग्राम, /01 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ा मामला सामने आया है। गुरुग्राम के सेक्टर-23 में प्लॉट आवंटन से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत 1995 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डी. सुरेश और अन्य कई लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। यह पूरा मामला उस समय का है जब डी. सुरेश हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के मुख्य प्रशासक पद पर तैनात थे।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार, पहला मामला 26 अगस्त को चार आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। इसमें मुख्य रूप से आईएएस अधिकारी डी. सुरेश का नाम शामिल है। इसके ठीक अगले दिन 27 अगस्त को एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई। इस दूसरी एफआईआर में आईएएस अधिकारी के साथ-साथ एचएसवीपी के चार अधिकारियों व कर्मचारियों और तीन अन्य निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। निजी लोगों में एक local प्रॉपर्टी डीलर और एक राजनीतिक हस्ती का नाम भी शामिल है।
एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित प्लॉटों के फिर से आवंटन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि जिन प्लॉटों को पहले रद्द या वापस लिया जा चुका था, उन्हें नियमों को ताक पर रखकर दोबारा आवंटित कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को भारी वित्तीय नुकसान होने की बात कही जा रही है। राज्य सतर्कता ब्यूरो ने इस मामले में सबसे पहले नवंबर 2019 में शुरुआती जांच शुरू की थी, जिसकी जांच की आंच अब जाकर केस में तब्दील हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ अधिकारी की सेवानिवृत्ति के समय आया। आईएएस डी. सुरेश 31 अगस्त 2026 को अपनी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे थे। ठीक रिटायरमेंट से पहले केस दर्ज होने पर उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जब मामले की सुनवाई चल रही थी, उसी दिन शाम को जल्दबाजी में एफआईआर दर्ज की गई, ताकि सेवानिवृत्ति के मिलने वाले लाभों को रोका जा सके।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि मामले में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई है। सरकार से प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति 29 जुलाई को मिली थी, जिसे प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया। इसमें किसी भी तरह की दुर्भावना की बात से इनकार किया गया। हालांकि, पुलिस और राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि यदि जांच के सिलसिले में याचिकाकर्ता को हिरासत में लेने की आवश्यकता पड़ेगी, तो उन्हें सात दिन पहले लिखित नोटिस दिया जाएगा।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस आश्वासन के बाद राज्य सरकार को औपचारिक नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने का समय दिया है। अदालत ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 के लिए तय की है। फिलहाल अधिकारी को गिरफ्तारी से फौरी राहत तो मिल गई है, लेकिन एसीबी की जांच तेजी से जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 16 अक्टूबर को कोर्ट में सरकार की ओर से क्या तथ्य प्रस्तुत किए जाते हैं।