आईडीएफसी बैंक घोटाला: सीबीआई ने पंचकूला कोर्ट में दाखिल की तीसरी चार्जशीट, 19 और लोग बने आरोपी

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक एवं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हुए घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला में सीबीआई स्पेशल कोर्ट में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में 19 अधिकारियों, कर्मचारियों एवं निजी व्यक्तियों को आरोपित बनाया गया है। यह मामला हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों और संगठनों के सरकारी फंड के गबन से जुड़ा हुआ है। यह सरकारी फंड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में रखे गए थे। इस मामले में सीबीआई की तरफ से बुधवार को तीसरी चार्जशीट दाखिल की गई है।
सीबीआई की चार्जशीट में छह आईएएस समेत 19 अधिकारी हुए आरोपित
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि यह चार्जशीट हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक अधिकारी और हरियाणा राज्य सरकार के नौ अन्य अधिकारियों के खिलाफ दाखिल की गई है। इन सभी आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, सबूत मिटाने, जालसाजी करने, नकली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने और खातों में हेरफेर करने के गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा इन पर आपराधिक विश्वासघात, बीएनएस के तहत उकसाने, तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार के आरोप भी शामिल हैं।
बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से रची गई साजिश
जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि आरोपित सरकारी कर्मचारियों ने आईडीएफसी फर्स्ट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंकों के आरोपित बैंकरों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश बनाई थी। इन लोगों ने मिलकर धोखाधड़ी की योजना को तैयार किया और फिर उसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया। हरियाणा सरकार के 8 विभागों का फंड अलग-अलग अधिकृत बैंकों से निकालकर आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंकों की खास शाखाओं में ट्रांसफर किया गया। इन खास शाखाओं में बैंक अधिकारी साजिश के तहत पहले से ही काम कर रहे थे और उन्होंने ही इन शाखाओं में बैंक खाते खोले थे।
वित्तीय नियमों का उल्लंघन कर तीसरे पक्षों को ट्रांसफर की गई रकम
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वित्तीय समझदारी और धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए हरियाणा सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। इन बैंक खातों से फंड को पूरी तरह धोखाधड़ी के तरीकों से निकाला गया और उन तीसरे पक्षों को ट्रांसफर कर दिया गया जिनका सरकारी विभागों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। ट्रांसफर की गई इस रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और अंत में इसे कैश में बदल दिया गया। इस तरह से सभी आरोपितों ने गलत तरीके से खुद के लिए भारी वित्तीय फायदा पहुंचाया है।
घोटाले की कुल रकम 504 करोड़ रुपये, आठ विभाग हुए प्रभावित
इस बड़े बैंक घोटाले की वजह से हरियाणा सरकार के कुल आठ विभाग और संगठन प्रभावित हुए हैं। इन प्रभावित विभागों में पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड भी इसमें शामिल हैं। इस पूरी धोखाधड़ी की कुल रकम 504 करोड़ रुपये की है। राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर सीबीआई ने हरियाणा के स्टेट विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो से इस मामले की जांच अपने हाथों में ली थी।
अब तक कुल 37 लोगों के खिलाफ दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
इस चार्जशीट के दाखिल होने से पहले सीबीआई ने इस मामले में 18 अन्य आरोपितों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की थी। उन पहले के आरोपितों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारी, हरियाणा सरकार के सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट व्यक्ति और कई प्राइवेट कंपनियां भी शामिल थीं। इस नई चार्जशीट के अदालत में दाखिल होने के साथ ही, इस पूरे मामले में अब तक कुल 37 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। जांच का दायरा लगातार आगे बढ़ रहा है।
सीबीआई की अब तक की कार्रवाई और अन्य मामलों की जांच
बैंक घोटाले की इस पूरी जांच के दौरान सीबीआई ने कुल 54 जगहों पर तलाशी ली है और लगभग 20 करोड़ रुपये की कीमत के सोने सहित कई अहम सबूत ज़ब्त किए हैं। इसके साथ ही अब तक इस मामले में तीन आईएएस और एक आईएफएस समेत कुल 26 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से दो अन्य संबंधित मामलों को भी अपने हाथ में ले लिया है। एक मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चंडीगढ़ से जुड़ा हुआ है, और दूसरा मामला चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी से संबंधित है। इन दोनों मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अन्य सभी संदिग्धों और आरोपियों के खिलाफ इन तीनों मामलों की जांच अभी भी लगातार जारी रहेगी। सीबीआई सभी जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने और गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए सरकारी फंड का पूरा पता लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।