हरियाणा 657 करोड़ का बैंक घोटाला: मुख्य आरोपी ऋभव ऋषि की जमानत याचिका सीबीआई कोर्ट ने की खारिज

चंडीगढ़, 21 अगस्त। हरियाणा में हुए आईडीएफसी फस्र्ट बैंक एवं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हुए 657 करोड़ के घोटाले में पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने घोटाले के कथित मास्टरमाइंड ऋभव ऋषि की ज़मानत अर्जी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस मामले की जांच कर रही सीबीआई और बैंकों के वकीलों ने कोर्ट में कई बड़े खुलासे किए हैं और आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए हैं।
सीबीआई ने कोर्ट में दिए आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप और सबूत
सीबीआई ने अदालत में आरोप लगाया था कि आरोपित ने हरियाणा सरकार के गबन किए गए फंड का इस्तेमाल कई गलत कामों में किया। आरोपी ने इस पैसे का इस्तेमाल न सिर्फ़ प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया बल्कि डांसर्स और एस्कॉट्र्स के साथ पार्टियों को स्पॉन्सर करने, लग्जऱी होटलों में ठहरने और विदेश यात्राएं करने के लिए भी किया। सीबीआई के वकील ने कोर्ट के सामने दलील दी कि डॉक्यूमेंट्री, बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक और टेस्टिमोनियल सबूतों के बड़े ग्रुप पर आधारित जांच से यह साफ पता चला है कि ऋभव ऋषि पूरी आपराधिक साजिश का मुख्य रचियता और मास्टरमाइंड है। उसने खुद इस स्कीम को सोचा, शुरुआत की, कोऑर्डिनेट किया और उसे पूरा किया। इस पूरी प्रक्रिया के तहत हरियाणा राज्य के सरकारी फंड, जो बैंक को सौंपे गए थे, का गलत इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उस फंड को उसके और उसके सह-आरोपितों द्वारा कंट्रोल की जाने वाली शेल कंपनियों को दे दिया गया, जिससे निजी फायदे और इस्तेमाल के लिए उसे बदल दिया गया।
बैंक अधिकारियों की भूमिका और काम करने का तरीका
आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के वकील समीर सेठी ने कोर्ट में कहा कि ऋषि ने अगस्त 2025 में आईडीएफसी फस्र्ट बैंक, सेक्टर 32, चंडीगढ़ में ब्रांच मैनेजर के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह नवंबर 2025 में स्मॉल फाइनेंस बैंक में शिफ्ट हो गया, जहां उसने अपनी धोखाधड़ी की गतिविधियां लगातार जारी रखीं। उसके काम करने के खतरनाक तरीके के बारे में बताते हुए सीबीआई ने कहा कि उसने सबसे पहले हरियाणा सरकार के सीनियर अधिकारियों से संपर्क किया था। वह उन अधिकारियों के साथ क्रिमिनल साजिश में शामिल हुआ और फिर कई डिपार्टमेंट के साथ बैंकिंग प्रपोज़ल शुरू किए। उसने यह पूरी प्रक्रिया आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के हरियाणा में सरकारी काम के लिए आधिकारिक तौर पर पैनल में आने से बहुत पहले ही शुरू कर दी थी।
फर्जी ब्याज दरों पर सरकारी फंड का हुआ भारी इन्वेस्टमेंट
सीबीआई ने आगे अपनी दलील में कहा कि इसके बाद रिभव ऋषि ने आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के ऑफिशियल रेट से ज़्यादा इंटरेस्ट रेट दिखाए। हरियाणा सरकार के आरोपित अधिकारियों ने इस साजिश को आगे बढ़ाने के लिए झूठ की पूरी जानकारी होने के बावजूद उन प्रपोज़ल को मान लिया। इसके बाद सरकार ने उसी ब्रांच में भारी इन्वेस्टमेंट किया जहां पर रिभव ऋषि तैनात थे और इस तरह इस बड़े 657 करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम दिया गया।