भारत सरकार ने निजी क्षेत्र को पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों के टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की दी मंजूरी

भारत सरकार ने देश के निजी रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO द्वारा विकसित तकनीकों के ट्रांसफर को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को इस ऐतिहासिक फैसले को अधिकृत किया।
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना है। साथ ही इसका उद्देश्य रक्षा-औद्योगिक आधार का विस्तार करना और MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करना है। यह नीति मिसाइल विकास को DRDO प्रयोगशालाओं से औद्योगिक पैमाने पर उत्पादन तक तेजी से ले जाने का लक्ष्य रखती है। इससे आयात निर्भरता कम होगी और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को बढ़ावा मिलेगा। DRDO ने इन उन्नत तकनीकों को सफलतापूर्वक अपनाने को सुनिश्चित करने के लिए उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
नई व्यवस्था और नियम
इस नए ढांचे के तहत, निजी उद्यमों को इन प्रणालियों का निर्माण करने के लिए विशिष्ट तकनीकी, प्रमाणन और नियामक आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अग्नि और के-सीरीज जैसी रणनीतिक मिसाइलों को इस ट्रांसफर से बाहर रखा गया है। ये मिसाइलें राज्य के नियंत्रण में ही रहेंगी। इसके अलावा, रूस के साथ एक संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली अपने मौजूदा ढांचे के तहत काम करना जारी रखेगी। तक्षशिला संस्थान के एक शोधकर्ता आदित्य रामनाथन ने नोट किया कि यह बदलाव निजी कंपनियों को केवल पुर्जे बनाने से आगे बढ़कर मुख्य इंटीग्रेटर की भूमिका निभाने की अनुमति देता है। यह भूमिका पहले मुख्य रूप से भारत डायनेमिक्स के पास थी।
कौन सी मिसाइलें होंगी शामिल और संभावित भागीदार
25 अगस्त 2026 की मंजूरी के बाद, सरकार ने कई प्रमुख प्रणालियों के लिए भागीदारों की पहचान करना शुरू कर दिया है। इनमें 1,000-1,500 किमी की रेंज वाली लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल यानी LRLACRM और 150-500 किमी की रेंज वाली प्रलय क्वासी-बैलिस्टिक सामरिक मिसाइल शामिल हैं। इसके अलावा बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों के लिए अस्त्र मार्क I (110 किमी रेंज) और मार्क II (150 किमी रेंज) के लिए प्रस्ताव के लिए अनुरोध यानी RFP जारी किए गए हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए निर्धारित अन्य प्रणालियों में रुद्रम-द्वितीय अगली पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल, यूएवी-लॉन्च प्रेसिजन गाइडेड मिसाइल, लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम और स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार यानी SAAW शामिल हैं।
इस नीति से जुड़ने वाली उद्योग की प्रमुख फर्मों में अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, आईसीओएमएम, भारत फोर्ज, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, कल्याणी ग्रुप, महिंद्रा, हिंदुजा और सोलर इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।