अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त विशेष: युवा शक्ति विकसित भारत के स्वर्णिम भविष्य का आधार

Team Atal Hind11 August 20265 min read55 viewsलेख
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त विशेष: युवा शक्ति विकसित भारत के स्वर्णिम भविष्य का आधार

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त पर विशेष

युवा शक्ति विकसित भारत के स्वर्णिम भविष्य का आधार है। लेखक डॉ. अशोक कुमार वर्मा के अनुसार युवा केवल राष्ट्र का भविष्य नहीं, अपितु उसका वर्तमान भी है। जिस राष्ट्र के युवाओं के विचार ऊँचे, चरित्र निर्मल, संकल्प अटल और लक्ष्य स्पष्ट होते हैं, वही राष्ट्र विश्व का नेतृत्व करता है। प्रतिवर्ष 12 अगस्त को समस्त विश्व में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल औपचारिक आयोजन का अवसर नहीं, बल्कि आत्म चिंतन, आत्म मूल्यांकन और आत्म संकल्प का दिवस है। यह हमें स्मरण कराता है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके शस्त्रागार, विशाल भवनों अथवा आर्थिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके जागरूक, शिक्षित, अनुशासित, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ युवाओं में निहित होती है। भारत आज विश्व का सर्वाधिक युवा राष्ट्र है। यह स्थिति ईश्वर का वरदान भी है और हमारे लिए महान उत्तरदायित्व भी।

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युवा शक्ति की सही दिशा और स्वामी विवेकानंद का संदेश

यदि भारत की युवा शक्ति सही दिशा में अग्रसर होती है, तो वह केवल अपने जीवन को ही नहीं, अपितु समूचे राष्ट्र के भविष्य को भी स्वर्णिम बना सकती है। परंतु यदि यही शक्ति दिशाहीन हो जाए, तो वह राष्ट्र की प्रगति में बाधा भी बन सकती है। इसलिए आज आवश्यकता केवल शिक्षित युवाओं की नहीं, बल्कि संस्कारित, उत्तरदायी और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले युवाओं की है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था— उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको। यह केवल प्रेरक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। इसी प्रकार भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहा करते थे कि सपने वे नहीं होते जो सोते समय देखे जाते हैं, सपने वे होते हैं जो हमें सोने नहीं देते। इन दोनों महान विभूतियों का संदेश आज के प्रत्येक युवा के लिए मार्गदर्शक है।

युवा जीवन का महत्व और वर्तमान युग की चुनौतियाँ

युवा जीवन उत्साह, ऊर्जा, साहस, सृजनशीलता और परिवर्तन का काल होता है। इसी अवस्था में मनुष्य अपने व्यक्तित्व का निर्माण करता है। यही वह समय है जब वह अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करता है। यदि इस आयु में समय का सदुपयोग, अनुशासन, अध्ययन, परिश्रम और आत्मसंयम को अपनाया जाए, तो सफलता निश्चित होती है। इसके विपरीत आलस्य, कुसंगति, असंयम और लक्ष्यहीनता जीवन की अमूल्य संभावनाओं को नष्ट कर देती है। भारत का इतिहास युवा शक्ति के अनुपम उदाहरणों से भरा हुआ है। वीरता, त्याग, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की प्रत्येक गाथा में युवाओं का अद्वितीय योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में असंख्य नवयुवकों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र के सम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। आज भी विज्ञान, अंतरिक्ष, चिकित्सा, कृषि, न्याय, शिक्षा, उद्योग, प्रशासन, साहित्य, खेल और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय युवा विश्व के समक्ष अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। यद्यपि वर्तमान युग विज्ञान और प्रौद्योगिकी का युग है, तथापि इसके साथ अनेक चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। आधुनिक संचार साधनों ने ज्ञान के अनंत द्वार खोल दिए हैं, किंतु इनका असंयमित उपयोग युवाओं की एकाग्रता, समय और मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। अनेक युवा अध्ययन और स्वाध्याय के स्थान पर निरर्थक मनोरंजन, आभासी संसार और क्षणिक आकर्षण में अपना बहुमूल्य समय नष्ट कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।

नशे से दूरी और आदर्श युवा के गुण

इससे भी अधिक चिंता का विषय मादक द्रव्यों का बढ़ता प्रचलन है। नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके परिवार, समाज और राष्ट्र को भी दुर्बल बना देता है। नशा प्रतिभा का हरण करता है, स्वास्थ्य को नष्ट करता है, विवेक को समाप्त करता है और जीवन को अंधकारमय बना देता है। आज आवश्यकता है कि प्रत्येक युवा यह संकल्प ले कि वह किसी भी प्रकार के नशे से स्वयं दूर रहेगा तथा अपने मित्रों, परिवार और समाज को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। यही सच्ची राष्ट्र सेवा है। एक आदर्श युवा वही है जो अपने माता-पिता का सम्मान करे, गुरुजनों के प्रति श्रद्धा रखे, सत्य का पालन करे, अनुशासन को जीवन का आधार बनाए तथा परिश्रम को सफलता का एकमात्र साधन माने। चरित्र मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है। धन, पद और प्रतिष्ठा समय के साथ बदल सकते हैं, किंतु उत्तम चरित्र जीवन भर सम्मान दिलाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि धन दारा सूत लक्ष्मी पापी के भी होये, संत समागम हरि कथा तुलसी दुर्लभ दोए।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य और जनकल्याणकारी कार्य

आज शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विवेक, संवेदनशीलता, नैतिकता और उत्तरदायित्व का विकास करना है। जो युवा प्रतिदिन अध्ययन करता है, श्रेष्ठ साहित्य पढ़ता है, महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करता है तथा निरंतर नवीन ज्ञान अर्जित करता रहता है, वही जीवन में स्थायी सफलता प्राप्त करता है। भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल अपने परिवार तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी समर्पित हों। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, रक्तदान, नेत्रदान के प्रति जागरूकता, स्वच्छता, सड़क सुरक्षा, नारी सम्मान, निर्धनों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण तथा नशा मुक्ति जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जो हाथ केवल अपने लिए कार्य करते हैं वे सामान्य होते हैं, किंतु जो हाथ समाज के लिए उठते हैं वे इतिहास रचते हैं। युवाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति भी सजग रहना चाहिए। नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, संतुलित आहार, समय पर विश्राम और सकारात्मक चिंतन उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाते हैं। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ विचार ही महान राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

विकसित भारत 2047 का संकल्प और निष्कर्ष

आज भारत विकसित भारत–2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस महान अभियान की सफलता किसी शासन, संस्था या एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं की कर्मनिष्ठा, ईमानदारी, नवाचार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति पर निर्भर है। प्रत्येक युवा यदि प्रतिदिन एक श्रेष्ठ कार्य करने का संकल्प ले, एक पौधा लगाए, एक निरक्षर को शिक्षित करें, एक पीड़ित की सहायता करें, एक परिवार को नशा मुक्त जीवन के लिए प्रेरित करे और अपने जीवन को सत्य तथा सेवा के मार्ग पर चलाए, तो भारत का भविष्य निश्चय ही उज्ज्वल होगा। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस हमें केवल उत्सव मनाने की प्रेरणा नहीं देता, बल्कि यह संदेश देता है कि युवा अपने भीतर छिपी दिव्य शक्ति को पहचानें। वे अपने समय का सम्मान करें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें, अपने चरित्र को निर्मल बनाएं और अपने जीवन को राष्ट्र तथा मानवता की सेवा के लिए समर्पित करें। आइए, इस अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर हम सब यह संकल्प लें कि हम ज्ञान को अपना प्रकाश, चरित्र को अपनी पहचान, परिश्रम को अपना धर्म, अनुशासन को अपनी जीवन-पद्धति, सेवा को अपना कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति को अपना सर्वोच्च आदर्.

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